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पाली में बांडी नदी प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट टीम की सख्त फटकार

पाली में बांडी नदी प्रदूषण: सुप्रीम कोर्ट टीम की सख्त फटकार

मनीषा शर्मा।   पाली जिले में बांडी नदी  प्रदूषण का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित निरीक्षण टीम पिछले दो दिनों से पाली के औद्योगिक क्षेत्रों, ट्रीटमेंट प्लांट्स और नदी के विभिन्न हिस्सों का जायजा ले रही है। रविवार को सेवानिवृत्त जस्टिस संगीत लोढ़ा स्वयं टीम के साथ पाली पहुंचे और करीब तीन घंटे तक अलग-अलग स्थानों का निरीक्षण किया। इस दौरान नदी और प्लांट्स की बदतर हालत देखकर उन्होंने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। सुबह जस्टिस लोढ़ा ने सबसे पहले रोटरी क्लब के पास बह रही बांडी नदी को देखा। नदी में फैली गंदगी, काली-भूरी धारा और बदबूदार पानी देखकर वे नाराज दिखाई दिए। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों से पूछा कि इतने समय बाद भी स्थिति क्यों नहीं सुधरी और जिम्मेदारी तय क्यों नहीं की गई।

बांडी नदी प्रदूषण: ट्रीटमेंट प्लांट्स में खामियां, नदी में उतरकर देखा हाल

निरीक्षण के दौरान टीम मंडिया रोड स्थित ट्रीटमेंट प्लांट नंबर 1 और 2 पहुंची। यहां जस्टिस लोढ़ा बांडी नदी में खुद उतरकर पानी की स्थिति देखने पहुंचे। नदी किनारे जमा अपशिष्ट, प्लास्टिक के ढेर और कीचड़ देखकर उन्होंने सवाल दागा कि यदि यह व्यवस्था है, तो फिर प्रदूषण रोकने के दावे कैसे सही माने जाएं। टीम ने कई जगहों से रंगीन पानी के नमूने लिए। जस्टिस लोढ़ा ने सीईटीपी फाउंडेशन के पदाधिकारियों और जिला प्रशासन से पूछा कि जब नदी का हाल ऐसा है, तो क्या उद्योगों को निर्बाध तरीके से चलने दिया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट कहा, “मैं पूरा बेल्ट घूमकर आया हूं, मगर हालात बिल्कुल संतोषजनक नहीं हैं।”

उद्योगों ने ट्रीटेड पानी लेना बंद किया

निरीक्षण के दौरान नगर निगम के सीटीपी प्लांट का भी जायजा लिया गया। जस्टिस लोढ़ा ने नगर निगम आयुक्त नवीन भारद्वाज से पूछा कि वर्तमान में उद्योग ट्रीटेड पानी का कितना उपयोग कर रहे हैं। जवाब में बताया गया कि करीब एक वर्ष से उद्योग यह पानी नहीं ले रहे। सीईटीपी फाउंडेशन के सचिव चोपड़ा ने स्वीकार किया कि पानी की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं है, इसलिए उद्योगों ने इसका उपयोग बंद कर दिया। इस जवाब पर जस्टिस लोढ़ा ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि यदि ट्रीटमेंट सही नहीं हो रहा, तो इसका खामियाजा आम जनता और किसान क्यों भुगतें।

किसानों ने सुनाई अपनी पीड़ा

पुनीत औद्योगिक क्षेत्र और ट्रीटमेंट प्लांट नंबर 6 के निरीक्षण के दौरान नालों में जमा स्लज और बदबूदार बहाव देखकर भी जस्टिस लोढ़ा ने अधिकारियों से जवाब-तलब किया। उन्होंने कहा कि भले ही किसानों की सभी बातें सौ फीसदी सही न हों, लेकिन वास्तविक स्थिति का आकलन नेहड़ा बांध जाकर जरूर किया जाना चाहिए। मौके पर मौजूद किसानों ने शिकायत की कि वे उद्योगों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन बांडी नदी के दूषित पानी ने उनकी फसलों को बर्बादी के कगार पर पहुंचा दिया है। खेतों में मिट्टी सख्त हो गई है, उपज कम हो रही है और पानी उपयोग योग्य नहीं रह गया।

नेहड़ा बांध तक पहुंच रहा रंगीन पानी

किसानों ने आरोप लगाया कि कुछ ट्रीटमेंट प्लांट्स से चोरी-छुपे अवैध पाइपलाइन के जरिए रंगीन पानी सीधे नदी में छोड़ा जा रहा है। यही दूषित पानी नेहड़ा बांध तक पहुंच रहा है, जो साफ संकेत देता है कि प्रदूषण नियंत्रण के नियमों का पालन नहीं हो रहा। उन्होंने बताया कि नदी किनारे कई फैक्ट्रियों के पीछे छिपाकर पाइप डाले गए हैं, जिन्हें सामान्य निरीक्षण में पकड़ना मुश्किल है। इस पर जस्टिस लोढ़ा ने निर्देश दिए कि नदी किनारे कई जगह खुदाई करवाई जाए, ताकि गुप्त पाइपलाइन का पता चल सके।

“कठोर कार्रवाई जरूरी” – संकेत मजबूत

निरीक्षण के दौरान जस्टिस लोढ़ा ने साफ कहा कि यदि उद्योग प्रदूषण रोकने के मानकों का पालन नहीं कर रहे, तो ऐसे उद्योगों पर कठोर कार्रवाई से ही स्थिति सुधर सकती है। उन्होंने प्रशासन को चेताया कि अदालत के आदेशों के बावजूद यदि प्रदूषण जारी रहा, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर भी जवाबदेही तय होगी।

स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं का कहना है कि बांडी नदी का मुद्दा पिछले कई वर्षों से अदालत और प्रशासन के बीच झूलता रहा है, लेकिन जमीन पर सुधार उम्मीद के मुताबिक नजर नहीं आया। इस बार सुप्रीम कोर्ट टीम का सख्त रुख संभवतः बड़े बदलाव की शुरुआत साबित हो सकता है।

आगे की कार्रवाई

टीम द्वारा लिए गए नमूनों की लैब जांच कराई जाएगी और रिपोर्ट सीधे सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी। इसके आधार पर आगे के निर्देश और कार्रवाई तय होगी। फिलहाल प्रशासनिक तंत्र में हलचल है और सभी विभाग अपनी-अपनी रिपोर्ट तैयार करने में जुट गए हैं।

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