latest-newsकोटाराजस्थान

कोटा में दुर्लभ यूरो एशियन ईगल आउल का सफल रेस्क्यू

कोटा में दुर्लभ यूरो एशियन ईगल आउल का सफल रेस्क्यू

मनीषा शर्मा।  कोटा शहर के झालावाड़ रोड स्थित लखवा इलाके में एक दुर्लभ यूरो एशियन ईगल आउल घायल अवस्था में मिलने का मामला सामने आया है। इस घटना ने न केवल वन्यजीव प्रेमियों का ध्यान आकर्षित किया, बल्कि स्थानीय लोगों की संवेदनशीलता और पशु चिकित्सकों की तत्परता का भी उदाहरण पेश किया। गंभीर रूप से घायल इस उल्लू को समय पर इलाज मिलने से उसकी जान बचाई जा सकी और पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद उसे वन विभाग को सौंप दिया गया।

घटना 11 दिसंबर की बताई जा रही है, जब कुछ राहगीरों ने सड़क किनारे एक बड़े आकार के उल्लू को बेसुध हालत में पड़ा देखा। पास जाकर देखने पर पता चला कि वह उड़ने में असमर्थ है और उसके शरीर पर गहरी चोटों के निशान हैं। राहगीरों ने तुरंत आसपास के ग्रामीणों को सूचना दी, जिसके बाद पशु चिकित्सक को बुलाया गया। स्थानीय लोगों की मदद से घायल उल्लू को सुरक्षित तरीके से पशु चिकित्सालय पहुंचाया गया।

अस्पताल पहुंचने पर बेहद नाजुक थी हालत

पशु चिकित्सक डॉ. यश शर्मा ने बताया कि जब उल्लू को अस्पताल लाया गया, तब उसकी हालत अत्यंत गंभीर थी। उसके शरीर पर कई जगह गहरी चोटें थीं और वह काफी कमजोर हो चुका था। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हो गया कि यह कोई सामान्य उल्लू नहीं, बल्कि दुर्लभ प्रजाति का यूरो एशियन ईगल आउल है। यह उल्लू अपनी विशाल कद-काठी और तेज नजर के लिए जाना जाता है और इसे संरक्षित वन्यजीवों की श्रेणी में रखा जाता है।

डॉ. शर्मा के अनुसार, स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उल्लू को तुरंत ICU में भर्ती किया गया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने उसकी हालत पर लगातार निगरानी रखी। तीन दिनों तक दिन-रात उसकी देखभाल की गई, ताकि उसे किसी तरह का अतिरिक्त तनाव न हो और घाव तेजी से भर सकें।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने किया उपचार

इलाज के दौरान उल्लू को आवश्यक दवाइयां दी गईं और चोटों की सर्जरी भी की गई। डॉक्टरों का कहना है कि यदि कुछ घंटों की भी देरी हो जाती, तो उल्लू की जान बचाना मुश्किल हो सकता था। समय पर उपचार, सही दवाइयों और लगातार निगरानी के चलते उसकी स्थिति में धीरे-धीरे सुधार आने लगा। कुछ ही दिनों में उल्लू ने खुद को संभालना शुरू कर दिया और उसकी सक्रियता लौट आई।

डॉ. यश शर्मा ने बताया कि उपचार के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि उल्लू का प्राकृतिक व्यवहार प्रभावित न हो। उसे शांत वातावरण में रखा गया और न्यूनतम मानवीय हस्तक्षेप किया गया, ताकि वह जल्द से जल्द अपने प्राकृतिक जीवन के लिए तैयार हो सके।

स्वस्थ होने पर वन विभाग को सौंपा गया

तीन दिन के गहन उपचार और देखभाल के बाद जब यह सुनिश्चित हो गया कि यूरो एशियन ईगल आउल पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है, तो नियमों के अनुसार उसे वन विभाग को सौंप दिया गया। उल्लू को डीएफओ के सुपुर्द किया गया, ताकि आगे की प्रक्रिया के तहत उसे उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ा जा सके।

वन विभाग के अधिकारियों ने भी पशु चिकित्सकों और स्थानीय लोगों की तत्परता की सराहना की है। अधिकारियों का कहना है कि ऐसे मामलों में आमजन की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि घायल या संकट में पड़े वन्यजीवों की समय पर सूचना दी जाए, तो उनकी जान बचाई जा सकती है।

वन्यजीव संरक्षण के लिए जागरूकता जरूरी

यह घटना वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखी जा रही है। यूरो एशियन ईगल आउल जैसी दुर्लभ प्रजातियां पर्यावरण संतुलन में अहम भूमिका निभाती हैं। सड़क दुर्घटनाएं, शहरीकरण और मानवीय गतिविधियां अक्सर ऐसे पक्षियों के लिए खतरा बन जाती हैं। ऐसे में आम लोगों की सतर्कता और संवेदनशीलता ही इनके संरक्षण की सबसे बड़ी ताकत है।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading