मनीषा शर्मा। राज्य में पंचायतीराज संस्थाओं और शहरी निकायों के आगामी चुनावों को लेकर राज्य निर्वाचन आयोग ने बड़ा फैसला लिया है। आयोग ने चुनावी खर्च की अधिकतम सीमा को दोगुना तक बढ़ा दिया है। इसके लिए अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी की गई हैं। हालांकि खर्च सीमा बढ़ाने के साथ-साथ चुनाव प्रचार को लेकर सख्त नियम और पाबंदियां भी लागू कर दी गई हैं, ताकि चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी और अनुशासित बनी रहे।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार अब उम्मीदवार तय सीमा से अधिक चुनावी खर्च नहीं कर सकेंगे। सभी प्रत्याशियों को अपने चुनाव खर्च का पूरा ब्योरा रखना अनिवार्य होगा और चुनाव समाप्त होने के बाद 15 दिन के भीतर जिला निर्वाचन अधिकारी को खर्च का विवरण जमा कराना होगा। यदि कोई प्रत्याशी निर्धारित सीमा से अधिक खर्च करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बड़े वाहनों और पशु-चलित गाड़ियों पर रोक
आयोग ने चुनाव प्रचार में इस्तेमाल होने वाले वाहनों को लेकर भी सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब उम्मीदवार चुनाव प्रचार में बस, ट्रक, मिनी बस, मेटाडोर जैसे बड़े वाहनों का उपयोग नहीं कर सकेंगे। इसके साथ ही पशुओं से चलने वाली किसी भी तरह की कार्ट या गाड़ी जैसे तांगा, ऊंटगाड़ी या बैलगाड़ी के इस्तेमाल पर भी पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। निर्वाचन आयोग का कहना है कि इन वाहनों के उपयोग से न केवल यातायात बाधित होता है, बल्कि कानून-व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती है। यदि कोई प्रत्याशी इन प्रतिबंधित वाहनों का उपयोग करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सरपंच प्रत्याशी को सिर्फ एक वाहन की अनुमति
पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में प्रचार के लिए वाहनों की संख्या भी सीमित कर दी गई है। आयोग के आदेश के अनुसार सरपंच पद के प्रत्याशी चुनाव प्रचार में केवल एक वाहन का ही उपयोग कर सकेंगे। पंचायत समिति सदस्य के चुनाव में उम्मीदवार अधिकतम दो वाहन और जिला परिषद सदस्य के चुनाव में अधिकतम तीन वाहन ही इस्तेमाल कर पाएंगे। इन सभी वाहनों की जानकारी प्रत्याशी को पहले से रिटर्निंग ऑफिसर को देनी होगी। बिना अनुमति या तय सीमा से अधिक वाहन लगाने पर निर्वाचन आयोग द्वारा कार्रवाई की जाएगी।
नगर निकाय चुनाव में भी वाहन सीमा तय
शहरी निकाय चुनावों के लिए भी प्रचार वाहनों की सीमा तय कर दी गई है। नगर निगम पार्षद उम्मीदवार चुनाव प्रचार में अधिकतम तीन वाहनों का उपयोग कर सकेंगे। नगर परिषद पार्षद प्रत्याशी के लिए यह सीमा दो वाहन तय की गई है, जबकि नगर पालिका पार्षद उम्मीदवार को केवल एक वाहन के उपयोग की अनुमति होगी। निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी उम्मीदवारों पर समान रूप से लागू होंगे और किसी भी तरह की छूट नहीं दी जाएगी।
चुनाव कार्यालय पर लाउडस्पीकर पर पाबंदी
चुनाव प्रचार में ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए आयोग ने लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। पंचायतीराज और निकाय चुनाव के उम्मीदवार अपने चुनाव कार्यालय पर लाउडस्पीकर लगाकर प्रचार नहीं कर सकेंगे।
इसके अलावा अस्पताल, स्कूल और धार्मिक स्थलों से 100 मीटर की परिधि में लाउडस्पीकर से चुनाव प्रचार पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक लाउडस्पीकर का उपयोग केवल मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति से ही किया जा सकेगा। किसी भी तरह की रैली या जुलूस निकालने से पहले भी मजिस्ट्रेट से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
पारदर्शी और अनुशासित चुनाव कराने पर जोर
राज्य निर्वाचन आयोग का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और शांतिपूर्ण बनाना है। खर्च सीमा बढ़ाने से उम्मीदवारों को राहत जरूर मिलेगी, लेकिन सख्त निगरानी और नियमों के जरिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी प्रत्याशी अनुचित लाभ न उठा सके।


