राजस्थान में मानसून से पहले स्कूलों की स्थिति सुधारने को लेकर राज्य सरकार ने गंभीर रुख अपनाते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि राज्य भर में जो भी स्कूल भवन जर्जर स्थिति में हैं, लेकिन मरम्मत योग्य हैं, उनका जीर्णोद्धार मानसून शुरू होने से पहले हर हाल में पूरा किया जाए। इस दिशा में व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसी क्रम में शुक्रवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा) राजेश यादव की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक का उद्देश्य शिक्षा विभाग की प्रमुख योजनाओं, गतिविधियों और अत्यावश्यक मुद्दों का आकलन करना था। बैठक में राज्य के विभिन्न जिलों से जुड़े अधिकारियों ने भाग लिया और स्कूलों की वर्तमान स्थिति तथा आवश्यक सुधारों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक के दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव ने पिछले वर्ष झालावाड़ में हुई एक दर्दनाक घटना का उल्लेख किया, जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया था। उस घटना में एक सरकारी स्कूल भवन की छत गिरने से सात मासूम बच्चों की जान चली गई थी, जबकि 25 से अधिक बच्चे घायल हो गए थे। इस हादसे ने राज्य के सरकारी स्कूलों में बुनियादी ढांचे की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे और यह स्पष्ट कर दिया था कि स्कूल भवनों की नियमित निगरानी और समय पर मरम्मत कितनी आवश्यक है।
राजेश यादव ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति किसी भी हालत में नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जर्जर और कमजोर ढांचों की पहचान कर उन्हें प्राथमिकता के आधार पर ठीक किया जाए। जहां मरम्मत संभव नहीं है, वहां नए भवनों के निर्माण के लिए तत्काल योजना बनाई जाए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में स्कूल भवनों का विस्तृत सर्वेक्षण करें और जोखिम वाले भवनों की सूची तैयार करें, ताकि समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
इस बैठक में केवल भवनों की मरम्मत ही नहीं, बल्कि शिक्षा से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने समग्र शिक्षा, पीएम-श्री योजना, फ्री यूनिफॉर्म डीबीटी, आईसीटी प्रयोगशालाएं, टैबलेट वितरण और ज्ञान संकल्प जैसी योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की। इन योजनाओं का उद्देश्य छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराना और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना है। अतिरिक्त मुख्य सचिव ने इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए कहा कि इनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
इसके अलावा बैठक में राजस्थान राज्य पाठ्यपुस्तक बोर्ड और राजस्थान राज्य मुक्त विद्यालय जैसी प्रमुख संस्थाओं के कामकाज की भी समीक्षा की गई। इन संस्थाओं की भूमिका राज्य में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण मानी जाती है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि इन संस्थाओं के कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाया जाए, ताकि छात्रों को बेहतर शैक्षणिक सामग्री और अवसर मिल सकें।
मध्याह्न भोजन योजना की प्रगति का भी जायजा लिया गया। यह योजना छात्रों के पोषण स्तर को सुधारने और स्कूलों में उपस्थिति बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। बैठक में इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन और गुणवत्ता बनाए रखने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता जताई गई। साथ ही भाषा और पुस्तकालय विभागों की भूमिका का भी आकलन किया गया, ताकि छात्रों के समग्र विकास को सुनिश्चित किया जा सके।
राज्य सरकार ने इस बैठक के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया है कि वह स्कूली शिक्षा को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं करेगी। छात्रों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे आपसी समन्वय के साथ काम करें और सभी योजनाओं को समय पर लागू करें।
राजस्थान में हर साल मानसून के दौरान कई क्षेत्रों में भारी बारिश होती है, जिससे कमजोर और जर्जर भवनों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में स्कूल भवनों की समय पर मरम्मत और मजबूती सुनिश्चित करना बेहद जरूरी हो जाता है। सरकार के इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में स्कूलों की स्थिति में सुधार होगा और छात्रों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।


