मनीषा शर्मा। राजस्थान सरकार ने सहकारी विभाग के अधीन संचालित एजेंसियों जैसे राजफैड, नेफेड, तिलम संघ और अन्य में कार्यरत भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। सहकारिता राज्य मंत्री गौतम कुमार दक ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिन विभागीय कार्मिकों के खिलाफ गबन या अनियमितता की शिकायतें मिली हैं और वे जांच में दोषी पाए गए हैं, उनके वित्तीय लेन-देन के अधिकार तत्काल प्रभाव से निलंबित किए जाएं।
जनसुनवाई के दौरान मंत्री ने जताई सख्त नाराजगी
जयपुर में आयोजित अपेक्स बैंक के सभागार में जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान मंत्री गौतम कुमार दक ने यह बयान दिया। इस मौके पर उन्होंने सहकारिता विभाग में आ रही लगातार शिकायतों की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि हर शिकायत का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सभी प्रकरणों का एक माह के भीतर समाधान कर रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। मंत्री ने यह भी कहा कि जिन अधिकारियों द्वारा किसी कार्मिक के खिलाफ मिली शिकायत की जांच में अनावश्यक देरी की जा रही है, उनके खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
झूठी शिकायतों पर भी होगी निगरानी
गौतम कुमार दक ने स्पष्ट रूप से यह निर्देश दिए कि लगातार झूठी या आदतन शिकायत करने वाले व्यक्तियों की पहचान की जाए। इसके पीछे उद्देश्य यह है कि जांच प्रक्रिया और शिकायत निस्तारण प्रणाली को दुरुपयोग से बचाया जा सके। इस दौरान सहकारिता विभाग की प्रमुख शासन सचिव मंजू राजपाल समेत अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।
विभाग में बढ़ रही अनियमितताओं से मंत्री नाराज
कुछ समय से सहकारी विभाग के अंतर्गत काम करने वाली संस्थाओं में भारी मात्रा में गबन, वित्तीय अनियमितता, और पक्षपात की शिकायतें सामने आ रही हैं। इनमें से कई मामलों की शिकायतें खुद मंत्री तक पहुंची हैं। जनसुनवाई के अलावा लिखित माध्यमों और शिकायत पोर्टल पर भी भ्रष्टाचार की जानकारी दी जा रही है। मंत्री ने कहा कि इन शिकायतों पर जांच में देरी सहन नहीं की जाएगी। जिन कर्मचारियों को दोषी पाया गया है, उनके खिलाफ न केवल वित्तीय शक्तियों पर रोक लगाई जाएगी, बल्कि यदि आवश्यक हुआ तो एफआईआर भी दर्ज की जाएगी।
दोषी कर्मचारियों पर होगी एफआईआर, संपत्तियां होंगी जब्त
गौतम कुमार दक ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिन कार्मिकों के खिलाफ विभागीय जांच में भ्रष्टाचार या गबन सिद्ध होता है, उनके खिलाफ जल्द से जल्द प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज की जाए। इसके साथ ही धोखाधड़ी के मामलों में आरोप पत्र जारी करने में भी कोई देरी न हो। उन्होंने आगे कहा कि गंभीर मामलों में दोषी पाए गए कर्मचारियों की संपत्तियों को अटैच करने की कार्रवाई भी की जाए और ऐसे कार्मिकों को निलंबित करते हुए कोर्ट में केविएट दायर किया जाए, ताकि वे किसी भी प्रकार की राहत न ले सकें।


