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उपराष्ट्रपति चुनाव को ले कर NDA और I.N.D.I.A. में रणनीतिक हलचल तेज

उपराष्ट्रपति चुनाव को ले कर  NDA और I.N.D.I.A. में रणनीतिक हलचल तेज

मनीषा शर्मा।  भारत के नए उपराष्ट्रपति के चुनाव की तारीखों की घोषणा हो चुकी है। चुनाव आयोग ने 9 सितंबर 2025 को उपराष्ट्रपति चुनाव कराने की अधिसूचना जारी की है। इसके लिए नामांकन की अंतिम तिथि 21 अगस्त तय की गई है। यह चुनाव इसलिए आवश्यक हो गया क्योंकि वर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई की रात अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे को अगले ही दिन, 22 जुलाई को, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने स्वीकृति दे दी। 74 वर्षीय धनखड़ का कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक था, लेकिन समय से पहले इस्तीफे ने राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि सत्तारूढ़ NDA (राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन) और विपक्षी I.N.D.I.A. गठबंधन किसे इस प्रतिष्ठित संवैधानिक पद के लिए उम्मीदवार बनाते हैं।

उपराष्ट्रपति कैसे चुना जाता है: जानिए पूरी प्रक्रिया

उपराष्ट्रपति का चुनाव एक विशेष प्रक्रिया के तहत होता है, जिसमें देश के आम नागरिक वोटर नहीं होते। आइए समझते हैं इसके 6 प्रमुख चरण:

  1. निर्वाचक मंडल का गठन
    उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और मनोनीत सांसदों द्वारा किया जाता है। यह एक विशेष निर्वाचक मंडल होता है।

  2. चुनाव की अधिसूचना जारी होना
    चुनाव आयोग एक अधिसूचना जारी करता है, जिसमें नामांकन दाखिल करने की तिथि, मतदान और परिणाम की तारीखें शामिल होती हैं।

  3. नामांकन प्रक्रिया
    इच्छुक प्रत्याशी को कम से कम 20 सांसदों द्वारा प्रस्तावक और 20 सांसदों द्वारा समर्थक के रूप में नामांकन पत्र पर हस्ताक्षर कराना होता है। साथ ही एक निर्दिष्ट राशि की जमानत राशि जमा करनी होती है।

  4. प्रचार अभियान
    चूंकि मतदाता केवल सांसद होते हैं, इसलिए प्रचार सीमित दायरे में होता है। विभिन्न दलों के सांसद अपने प्रत्याशी के लिए समर्थन जुटाते हैं।

  5. मतदान प्रक्रिया
    सांसद गुप्त मतदान के माध्यम से अपना वोट डालते हैं। उन्हें प्रत्याशियों को प्राथमिकता के क्रम में (1, 2, 3…) अंकित करना होता है।

  6. मतगणना और परिणाम
    मतों की गिनती के बाद, जो प्रत्याशी कुल वैध मतों का 50% से अधिक प्राप्त करता है, वह निर्वाचित घोषित होता है। परिणाम की घोषणा रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा की जाती है।

किसके पास कितना समर्थन: एक नजर संसद के आंकड़ों पर

  • लोकसभा: कुल 542 सदस्य

    • NDA के पास: 293

    • I.N.D.I.A. गठबंधन के पास: 234

    • अन्य/निर्दलीय: 15

  • राज्यसभा: कुल 240 प्रभावी सदस्य

    • NDA समर्थक: 130

    • I.N.D.I.A. समर्थक: 79

    • अन्य: 31

कुल आंकड़ा

  • NDA समर्थक सांसद: लगभग 423

  • I.N.D.I.A. समर्थक सांसद: करीब 313

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि NDA के पास साधारण बहुमत है, लेकिन विपक्ष भी चुनावी मैदान में उतरने से पीछे नहीं हटना चाहता।

कौन होंगे संभावित उम्मीदवार? चर्चाएं जोरों पर

धनखड़ के इस्तीफे के बाद भाजपा और NDA ने संभावित उम्मीदवारों पर मंथन शुरू कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक, भाजपा के शीर्ष नेतृत्व की नजरें दो नामों पर केंद्रित हैं:

  1. थावरचंद गहलोत – वर्तमान में कर्नाटक के राज्यपाल और वरिष्ठ दलित नेता हैं।

  2. ओम माथुर – सिक्किम के राज्यपाल और आरएसएस पृष्ठभूमि से जुड़े वरिष्ठ नेता।

भाजपा की रणनीति यह हो सकती है कि वह इस पद पर किसी सहयोगी दल के नेता की बजाय स्वयं के उम्मीदवार को खड़ा करे और उसके नाम पर सहयोगी दलों से समर्थन मांगे। दूसरी ओर, विपक्षी I.N.D.I.A. गठबंधन भी संयुक्त प्रत्याशी की तलाश में जुट गया है। हालांकि उन्हें पता है कि संख्या बल उनके पक्ष में नहीं है, फिर भी वे मुकाबले को एकतरफा नहीं मानते।

राजनीतिक संकेत: चुनाव से क्या बदल सकता है?

उपराष्ट्रपति न केवल राज्यसभा के सभापति होते हैं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में भारत के राष्ट्रपति की अनुपस्थिति में कार्यवाहक राष्ट्रपति की भूमिका भी निभा सकते हैं। ऐसे में यह पद राजनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण होता है। NDA यदि अपने प्रत्याशी को सफलतापूर्वक निर्वाचित करा लेता है, तो यह उनकी राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा। वहीं, विपक्ष यदि कोई कड़ा प्रत्याशी उतारता है, तो यह उन्हें आगामी लोकसभा चुनावों के लिए नैतिक बढ़त दिला सकता है।

चुनाव आयोग की तैयारियां तेज

चुनाव आयोग ने उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इसके तहत निर्वाचक मंडल, रिटर्निंग ऑफिसर, पर्यवेक्षक, और मतदान केंद्रों के निर्धारण जैसी व्यवस्थाएं अंतिम चरण में हैं। आयोग पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल मॉनिटरिंग तंत्र का भी सहारा लेगा।

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