मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए जापान ने स्टेम सेल आधारित नई चिकित्सा तकनीकों को मंजूरी दे दी है। यह नई थेरेपी खास तौर पर पार्किंसंस रोग और हार्ट फेलियर जैसे गंभीर रोगों के इलाज के लिए विकसित की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स और संबंधित कंपनियों के अनुसार इन उपचारों को मंजूरी मिलने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले कुछ महीनों में मरीजों को इस तकनीक का लाभ मिलना शुरू हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह उपचार व्यापक रूप से सफल साबित होता है तो यह आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकता है।
पार्किंसंस रोग के इलाज के लिए नई तकनीक
जापान की फार्मास्युटिकल कंपनी सुमितोमो फार्मा ने जानकारी दी है कि उसे पार्किंसंस रोग के इलाज के लिए विकसित दवा अमचेप्री स्टेम सेल थेरेपी के निर्माण और बिक्री की अनुमति मिल गई है। यह उपचार स्टेम सेल तकनीक पर आधारित है और इसका उद्देश्य मस्तिष्क में क्षतिग्रस्त हो चुकी कोशिकाओं को दोबारा सक्रिय करना है।
इस थेरेपी में विशेष प्रकार की स्टेम सेल्स को मरीज के मस्तिष्क में ट्रांसप्लांट किया जाता है। पार्किंसंस रोग के कारण मस्तिष्क में डोपामिन बनाने वाली कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं, जिससे शरीर की गति नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित होती है। स्टेम सेल्स के माध्यम से इन कोशिकाओं की कार्यक्षमता को पुनर्स्थापित करने का प्रयास किया जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह उपचार सफल रहता है तो यह पार्किंसंस रोग के इलाज में एक क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, क्योंकि अब तक इस बीमारी का पूर्ण इलाज उपलब्ध नहीं था और केवल लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए दवाएं दी जाती थीं।
हार्ट फेलियर के इलाज में भी नई उम्मीद
पार्किंसंस रोग के अलावा जापान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने हार्ट फेलियर के इलाज के लिए विकसित एक और तकनीक को मंजूरी दी है। यह उपचार Cuorips नामक मेडिकल स्टार्टअप द्वारा विकसित किया गया है, जिसे Reheart regenerative therapy के नाम से जाना जाता है। इस तकनीक में हृदय की मांसपेशियों की विशेष शीट्स तैयार की जाती हैं। इन शीट्स को मरीज के हृदय पर लगाया जाता है, जिससे शरीर में नए ब्लड वेसल्स बनने में मदद मिलती है और हृदय की कार्यक्षमता बेहतर हो सकती है।
हार्ट फेलियर एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसमें हृदय शरीर की जरूरत के अनुसार रक्त पंप करने में असमर्थ हो जाता है। इस स्थिति में मरीज को सांस लेने में परेशानी, थकान और अन्य गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ता है। नई तकनीक के माध्यम से हृदय की मांसपेशियों को पुनर्जीवित करने की कोशिश की जाती है।
जल्द बाजार में आ सकते हैं नए उपचार
रिपोर्ट्स के अनुसार, इन दोनों उपचारों को इस वर्ष गर्मियों तक बाजार में उपलब्ध कराया जा सकता है। यदि ऐसा होता है तो यह दुनिया का पहला ऐसा कॉमर्शियल चिकित्सा उत्पाद होगा जिसमें सेल आधारित उपचार का बड़े स्तर पर उपयोग किया जाएगा।
जापान लंबे समय से स्टेम सेल रिसर्च के क्षेत्र में अग्रणी रहा है। इसी तकनीक पर शोध के लिए जापानी वैज्ञानिक शिन्या यामानाका को वर्ष 2012 में Nobel Prize in Physiology or Medicine से सम्मानित किया गया था। उन्होंने इंड्यूस्ड प्लुरिपोटेंट स्टेम सेल्स यानी आईपीएस सेल्स की खोज की थी, जिसने आधुनिक चिकित्सा अनुसंधान में नई संभावनाओं के द्वार खोल दिए। आईपीएस सेल्स की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इन्हें शरीर की लगभग किसी भी प्रकार की कोशिका में बदला जा सकता है। इसी कारण वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि भविष्य में कई गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा सकेगा।
सरकार ने जताई वैश्विक उम्मीद
जापान के स्वास्थ्य मंत्री केनइचिरो उएनो ने कहा है कि उन्हें उम्मीद है कि यह उपचार न केवल जापान बल्कि पूरी दुनिया के मरीजों के लिए राहत लेकर आएगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार सभी आवश्यक प्रक्रियाओं को तेजी से पूरा कर इस तकनीक को जल्द से जल्द मरीजों तक पहुंचाने के लिए प्रयास कर रही है। कंपनी सुमितोमो फार्मा के अनुसार, अमचेप्री थेरेपी को फिलहाल सशर्त और समय-सीमित मंजूरी दी गई है। इसका मतलब यह है कि इसे एक प्रकार का अस्थायी लाइसेंस माना जाएगा, ताकि नई तकनीक को तेजी से मरीजों तक पहुंचाया जा सके और साथ-साथ इसके प्रभावों की निगरानी भी जारी रहे।
क्या यह थेरेपी सुरक्षित है
इस नई तकनीक की सुरक्षा को लेकर भी शोध किया गया है। क्योटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा की गई एक स्टडी में इस थेरेपी को सुरक्षित बताया गया है। इस अध्ययन में 50 से 69 वर्ष की उम्र के सात पार्किंसंस मरीजों को शामिल किया गया था।
इन मरीजों के मस्तिष्क में लगभग 5 से 10 मिलियन स्टेम सेल्स ट्रांसप्लांट किए गए और दो वर्षों तक उनकी स्थिति की निगरानी की गई। अध्ययन के दौरान किसी भी मरीज में गंभीर साइड इफेक्ट की जानकारी सामने नहीं आई। इसके अलावा चार मरीजों में बीमारी के लक्षणों में स्पष्ट सुधार भी देखा गया।
पार्किंसंस रोग एक पुरानी न्यूरोलॉजिकल बीमारी है जो शरीर की गति को प्रभावित करती है। इस बीमारी के कारण अक्सर हाथों में कंपकंपी, चलने-फिरने में कठिनाई और शरीर के संतुलन में समस्या जैसी स्थितियां उत्पन्न होती हैं। वैश्विक स्तर पर लगभग एक करोड़ लोग इस बीमारी से प्रभावित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि स्टेम सेल आधारित यह उपचार व्यापक स्तर पर सफल साबित होता है तो यह भविष्य में न्यूरोलॉजिकल और हृदय संबंधी कई जटिल बीमारियों के इलाज का रास्ता खोल सकता है और चिकित्सा विज्ञान के इतिहास में एक नई दिशा प्रदान कर सकता है।


