राजस्थान की राजधानी जयपुर से रविवार को भारतीय आस्था और संस्कृति को वैश्विक मंच पर स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की गई। शहर के ब्रह्मपुरी क्षेत्र स्थित नहर के गणेश जी मंदिर से भगवान परशुराम की प्रतिमा को विधिवत पूजा-अर्चना के बाद ऑस्ट्रेलिया के लिए रवाना किया गया। यह प्रतिमा ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत में स्थापित की जाएगी, जहां भारतीय समुदाय के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
इस धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन सर्व ब्राह्मण महासभा के ऑस्ट्रेलिया चैप्टर की पहल पर किया गया। प्रतिमा को रवाना करने से पहले मंदिर परिसर में संत-महंतों की उपस्थिति में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भगवान परशुराम के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की और इस ऐतिहासिक पहल का हिस्सा बने।
कार्यक्रम के दौरान महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित सुरेश मिश्रा ने बताया कि इस आयोजन के साथ ही परशुराम जयंती महोत्सव 2026 की औपचारिक शुरुआत भी हो गई है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष न केवल भारत में, बल्कि विदेशों में भी परशुराम जयंती को भव्य रूप से मनाने की योजना बनाई गई है। इस अवसर पर 11 विद्वान ब्राह्मणों द्वारा विशेष पूजा संपन्न करवाई गई और संकष्टी चतुर्थी के उपलक्ष्य में मंदिर परिसर में महाआरती का आयोजन भी किया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया।
प्रतिमा के निर्माण को लेकर भी विशेष जानकारी साझा की गई। पंडित सुरेश मिश्रा के अनुसार, यह प्रतिमा लगभग सवा दो फीट ऊंची है और इसे तैयार करने में करीब एक महीने का समय लगा। इस प्रतिमा को विशेष रूप से ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया प्रांत के क्रेगीबर्न क्षेत्र स्थित काली माता मंदिर में स्थापित किया जाएगा। यह स्थापना वहां रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि यह उनकी सांस्कृतिक पहचान को भी सशक्त करेगी।
उन्होंने आगे बताया कि महासभा का उद्देश्य भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। इसी लक्ष्य के तहत इस वर्ष विदेशों में करीब 10 अलग-अलग स्थानों पर परशुराम जयंती महोत्सव आयोजित करने की योजना बनाई गई है। इसके साथ ही हर वर्ष विदेशों में भगवान परशुराम की प्रतिमा स्थापित करने का लक्ष्य भी निर्धारित किया गया है, ताकि आने वाली पीढ़ियां अपनी जड़ों और परंपराओं से जुड़ी रह सकें।
कार्यक्रम में महासभा के प्रदेश अध्यक्ष दिनेश शर्मा ने जानकारी दी कि परशुराम जयंती महोत्सव के अंतर्गत पूरे राजस्थान में एक महीने तक विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में परशुराम गोष्ठी, संवाद कार्यक्रम, भगवा रैली और विद्वानों के सम्मान समारोह शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि इन आयोजनों का उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ाना और युवा पीढ़ी को अपनी परंपराओं से जोड़ना है।
इस अवसर पर कई संत-महात्माओं की उपस्थिति ने कार्यक्रम को और अधिक गरिमामय बना दिया। प्रमुख रूप से स्वामी बालमुकुंदाचार्य महाराज, घाट बालाजी के सुदर्शनाचार्य महाराज, मंदिर के महंत पंडित जयकुमार, गीता गायत्री मंदिर के पंडित राजकुमार चतुर्वेदी, काली माता मंदिर के महंत प्रेम नारायण और स्वाध्याय केंद्र के पंडित योगेश सहित अनेक धर्माचार्य मौजूद रहे। इन सभी ने इस पहल को भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
यह पहल न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति के अंतरराष्ट्रीय विस्तार का भी उदाहरण है। विदेशों में बसे भारतीयों के लिए इस तरह के आयोजन उनकी सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। साथ ही यह अन्य देशों के लोगों को भी भारतीय परंपराओं और आध्यात्मिकता से परिचित कराने का अवसर प्रदान करते हैं।
समग्र रूप से देखा जाए तो जयपुर से ऑस्ट्रेलिया के लिए भगवान परशुराम की प्रतिमा का प्रेषण एक सांस्कृतिक सेतु के रूप में उभर रहा है, जो भारत और विदेशों में बसे भारतीय समुदाय के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को और अधिक मजबूत करेगा। आने वाले समय में इस तरह की पहलें भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान देने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।


