शोभना शर्मा। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को कमजोर करने, योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाने और ग्रामीणों के रोजगार के कानूनी अधिकार को समाप्त करने की कथित साजिश के विरोध में राजस्थान भर में कांग्रेस ने व्यापक और संगठित आंदोलन छेड़ दिया है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने धरना-प्रदर्शन, सत्याग्रह, मौन रैली और पैदल मार्च के जरिए केंद्र सरकार के फैसलों के खिलाफ जोरदार विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि मनरेगा केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि गरीब और ग्रामीण भारत की आर्थिक सुरक्षा की रीढ़ है और इससे छेड़छाड़ करना सीधे तौर पर संविधान और महात्मा गांधी के विचारों पर हमला है।
जोबनेर में गांधी चौक पर सत्याग्रह
जयपुर ग्रामीण के जोबनेर कस्बे में जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से गांधी चौक पर एक दिवसीय सत्याग्रह आंदोलन आयोजित किया गया। कांग्रेस जिलाध्यक्ष विद्याधर सिंह चौधरी के नेतृत्व में हुए इस धरने में मनरेगा योजना का नाम बदलने को लेकर गहरा आक्रोश देखने को मिला। सत्याग्रह में चौमूं विधायक डॉ. शिखा मील बराला, झोटवाड़ा कांग्रेस प्रत्याशी अभिषेक चौधरी और लोकसभा कांग्रेस प्रत्याशी अनिल चोपड़ा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। नेताओं ने कहा कि मनरेगा से महात्मा गांधी का नाम हटाना उनके संघर्ष और दर्शन को मिटाने की कोशिश है।
अजमेर में कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार प्रदर्शन
अजमेर में शहर और देहात कांग्रेस कमेटियों ने संयुक्त रूप से जिला कलेक्ट्रेट के बाहर जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार जानबूझकर मनरेगा को कमजोर कर रही है ताकि गरीबों और ग्रामीण मजदूरों के अधिकार खत्म किए जा सकें। धरने के दौरान राजस्थान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी मौके पर पहुंचे और केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि मनरेगा ने करोड़ों ग्रामीण परिवारों को सम्मान के साथ रोजगार दिया है और इसे कमजोर करना सामाजिक न्याय की अवधारणा के खिलाफ है।
डीडवाना में नारेबाजी के साथ धरना
डीडवाना में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी नरेगा योजना का नाम बदलने के विरोध में जिला कलेक्ट्रेट के सामने धरना दिया। जिला अध्यक्ष जाकिर हुसैन गैसावत के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह केवल नाम बदलने का मुद्दा नहीं, बल्कि गरीबों के अधिकारों को धीरे-धीरे खत्म करने की नीति का हिस्सा है।
बीकानेर में पैदल मार्च और बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता
बीकानेर में कांग्रेस ने गांधी पार्क से जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पर लगे बैरिकेड्स पर चढ़ गए और जोरदार नारेबाजी की। इस दौरान पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल, जिलाध्यक्ष मदन गोपाल मेघवाल सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि मनरेगा का नाम बदलना महात्मा गांधी के अपमान के समान है और भाजपा सरकार उनके नाम और विचारों से लगातार दूरी बना रही है।
अलवर में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली का सरकार पर हमला
अलवर में जिला कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर मिनी सचिवालय परिसर में धरना-प्रदर्शन किया गया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि गरीब और ग्रामीण भारत की जीवनरेखा है। उन्होंने कहा कि इस योजना के जरिए ग्रामीण मजदूरों को कानूनी रूप से रोजगार का अधिकार मिला है और इसका नाम बदलना या इसे कमजोर करना महात्मा गांधी के योगदान और विचारधारा का सीधा अपमान है।
जयपुर शहर में रोजगार के अधिकार पर सवाल
राजधानी जयपुर में शहर जिला कांग्रेस कमेटी की ओर से मनरेगा को कमजोर करने और महात्मा गांधी का नाम हटाने के विरोध में प्रदर्शन किया गया। शहर अध्यक्ष आर.आर. तिवाड़ी के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार रोजगार के कानूनी अधिकार को समाप्त करने की दिशा में कदम बढ़ा रही है। नेताओं ने कहा कि कांग्रेस इस साजिश को किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने देगी।
सीकर में मौन रैली के जरिए जताया विरोध
सीकर में कांग्रेस ने शांतिपूर्ण लेकिन प्रभावशाली तरीके से मौन प्रदर्शन किया। डाक बंगले से जिला कलेक्ट्रेट तक निकाली गई मौन रैली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हाथों में महात्मा गांधी का छायाचित्र लेकर भाजपा सरकार के फैसले के खिलाफ आक्रोश जताया। प्रदर्शनकारियों ने इसे राष्ट्रपिता के सम्मान पर हमला बताते हुए कहा कि महात्मा गांधी का नाम केवल इतिहास नहीं, बल्कि आज भी करोड़ों लोगों के संघर्ष और अधिकारों से जुड़ा हुआ है।
राज्यव्यापी आंदोलन से बढ़ी राजनीतिक गर्मी
राजस्थान के अलग-अलग जिलों में हुए इन प्रदर्शनों से यह साफ हो गया है कि मनरेगा का मुद्दा आने वाले दिनों में बड़ा राजनीतिक विवाद बन सकता है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि यदि केंद्र सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। पार्टी ने संकेत दिए हैं कि यह लड़ाई केवल सड़कों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि संसद और न्यायिक स्तर तक भी ले जाई जाएगी।


