केंद्रीय राज्य मंत्री एसपी बघेल ने गायों के गर्भधारण और पशुपालन से जुड़ी नई तकनीकों को लेकर एक अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में गायों के गर्भधारण के लिए सेक्स सॉर्टेड सीमन का उपयोग किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह है कि अधिकतर बछिया पैदा हों और नंदी महाराज यानी बैल कम संख्या में जन्म लें। मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि प्रयास यही है कि नंदी महाराज पैदा ही न हों, क्योंकि आज के समय में बैलों का उपयोग लगभग समाप्त हो चुका है। यह बयान उन्होंने अजमेर में जयपुर रोड स्थित एक निजी होटल में केंद्रीय बजट को लेकर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया।
बैलों के उपयोग खत्म होने का तर्क
एसपी बघेल ने अपने बयान में ग्रामीण जीवन और पारंपरिक खेती के उदाहरण देते हुए कहा कि अब हल नहीं चल रहे हैं, बैलगाड़ियां नहीं चलतीं, कोल्हू और रहट भी बंद हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि पहले खेती और ग्रामीण अर्थव्यवस्था बैलों पर आधारित थी, लेकिन अब मशीनों और आधुनिक तकनीक ने उनकी जगह ले ली है। मंत्री ने कहा कि ट्रैक्टर, थ्रेसर और अन्य आधुनिक कृषि यंत्रों के आने से बैल पूरी तरह उपयोगहीन हो गए हैं। इसी वजह से सरकार यह सोच रही है कि बैलों की संख्या नियंत्रित की जाए और गायों से अधिक बछिया पैदा हों।
पहले और अब के समय का अंतर बताया
केंद्रीय मंत्री ने पुराने समय को याद करते हुए कहा कि जब वे छोटे थे, तब किसी घर में बछड़ा पैदा होने पर मिठाई बांटी जाती थी और गीत गाए जाते थे। उन्होंने यह भी कहा कि ग्रामीण मान्यताओं के अनुसार, यदि किसी घर में मौत हो जाती थी और उसी दौरान बछड़ा पैदा हो जाता था, तो उसे अपशकुन दूर होने का संकेत माना जाता था। एसपी बघेल ने कहा कि समय के साथ परिस्थितियां बदल गई हैं। अब वही बछड़ा, जो कभी खुशी और शुभ संकेत माना जाता था, आज बोझ समझा जाने लगा है। मशीनों के आने से बैलों की उपयोगिता लगभग समाप्त हो गई है।
90 प्रतिशत बछिया और 10 प्रतिशत बछड़े का लक्ष्य
केंद्रीय राज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य यह है कि 90 प्रतिशत बछिया पैदा हों और केवल 10 प्रतिशत बछड़े हों। उन्होंने कहा कि 10 प्रतिशत नंदी महाराज पर्याप्त होंगे। मंत्री के अनुसार, जो 10 प्रतिशत बछड़े पैदा होंगे, वे अच्छी नस्ल के होंगे और उन्हें विशेष रूप से ब्रीडिंग के उद्देश्य से खरीदा जाएगा। इससे पशुधन की गुणवत्ता बेहतर होगी और अनावश्यक संख्या में बैलों के पालन की समस्या भी नहीं रहेगी।
कृत्रिम गर्भाधान और AI तकनीक का जिक्र
एसपी बघेल ने यह भी कहा कि अभी पूरा देश कृत्रिम गर्भाधान में आधुनिक AI तकनीक का उपयोग नहीं कर रहा है। कई जगहों पर अब भी परंपरागत तरीकों से ही गायों का गर्भधारण कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार धीरे-धीरे आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा दे रही है, ताकि पशुपालन अधिक वैज्ञानिक, लाभकारी और टिकाऊ बन सके। सेक्स सॉर्टेड सीमन इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
केंद्रीय बजट को बताया विकसित भारत का रोड मैप
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एसपी बघेल ने केंद्रीय बजट पर भी विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा पेश किया गया बजट 57 लाख करोड़ रुपए का है और यह सर्वव्यापी बजट है। उन्होंने दावा किया कि इस बजट में किसी भी राज्य को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा गया है। चाहे वह बीजेपी शासित राज्य हों या अन्य दलों द्वारा शासित, सभी वर्गों और क्षेत्रों का इस बजट में ध्यान रखा गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर और हर वर्ग का ध्यान
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बजट विकसित भारत का रोड मैप है। इसमें इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए बड़े पैमाने पर प्रावधान किए गए हैं। सड़क, रेलवे, ऊर्जा और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर विशेष फोकस रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि बजट में किसान, मजदूर, मध्यम वर्ग और युवाओं सभी के हितों को ध्यान में रखा गया है।
मनरेगा पर कांग्रेस के आरोपों का जवाब
मनरेगा योजना को लेकर कांग्रेस के विरोध पर प्रतिक्रिया देते हुए एसपी बघेल ने कहा कि विपक्ष बार-बार यह दावा करता है कि यह योजना समाप्त हो जाएगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का तर्क है कि जैसे ही मजदूरों को कम काम मिलेगा, उनकी बात सही साबित हो जाएगी। मंत्री ने कहा कि कांग्रेस की सरकार 100 दिन का काम देती थी, जबकि मौजूदा सरकार 125 दिन का काम दे रही है। उन्होंने यह भी कहा कि भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए 10 हजार रुपए तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
शिकायतों के समाधान का दावा
एसपी बघेल ने बताया कि मनरेगा से जुड़ी एक लाख से ज्यादा शिकायतें सामने आई थीं। सरकार ने उन शिकायतों को दूर करने का काम किया है। उन्होंने मनरेगा को मजदूरों के लिए एक शानदार योजना बताया और कहा कि सरकार इसे और मजबूत बनाने के लिए लगातार काम कर रही है।
कुल मिलाकर, एसपी बघेल का यह बयान न सिर्फ पशुपालन नीति को लेकर नई बहस छेड़ता है, बल्कि बजट और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार की सोच को भी सामने रखता है।


