राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा है कि किसान और पशुपालक राज्य की अर्थव्यवस्था के प्रमुख आधार स्तंभ हैं और राज्य सरकार इन्हें उन्नत, समृद्ध और खुशहाल बनाने के लिए लगातार ठोस निर्णय ले रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र एक-दूसरे के पूरक हैं और आपसी सामंजस्य के साथ कार्य करते हुए ये तीनों क्षेत्र “आपणो अग्रणी राजस्थान” के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा रविवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में किसानों, पशुपालकों और डेयरी संघों के पदाधिकारियों के साथ आयोजित बजट पूर्व संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस संवाद का उद्देश्य आगामी राज्य बजट को अधिक समावेशी और व्यावहारिक बनाना था। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार बनने के तुरंत बाद राज्य के समग्र विकास का रोडमैप तैयार किया गया, जिसमें कृषि क्षेत्र की बुनियादी आवश्यकताओं, विशेषकर पानी और बिजली, पर विशेष ध्यान दिया गया।
उन्होंने बताया कि पानी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए राम जल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, इंदिरा गांधी नहर परियोजना, गंगनहर, माही बांध और देवास परियोजना के कार्यों को गति दी गई है। वहीं, बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं और वर्ष 2027 तक किसानों को दिन में बिजली उपलब्ध कराने का लक्ष्य तय किया गया है।
मुख्यमंत्री ने किसानों को मिल रही आर्थिक सहायता का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली 6 हजार रुपये की राशि के अतिरिक्त राज्य सरकार मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के माध्यम से प्रतिवर्ष 3 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता दे रही है। अब तक चार किस्तों में 72 लाख किसानों को 2 हजार 73 करोड़ रुपये की अतिरिक्त सम्मान राशि दी जा चुकी है।
उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में 921 करोड़ रुपये के अनुदान से 59 हजार से अधिक सौर पंप संयंत्र लगाए गए हैं। इसके साथ ही 17 लाख 30 हजार मृदा स्वास्थ्य कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। किसानों को बाजार से सीधे जोड़ने के लिए अब तक 913 कृषक उत्पादक संगठनों का पंजीकरण किया गया है। वर्षा जल संग्रहण के लिए 35 हजार से अधिक फार्म पॉन्ड बनाए गए हैं और खेतों में तारबंदी के लिए भी सैकड़ों करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया है।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि किसानों की आय बढ़ाने और उनके उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयासरत है। सोजत की मेहंदी और नागौरी अश्वगंधा को जीआई टैग मिल चुका है, जबकि कई अन्य स्थानीय उत्पाद जीआई टैग की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने किसानों से रासायनिक उर्वरकों का सीमित उपयोग करने की अपील भी की, ताकि भूमि की उर्वरता बनी रहे।
पशुपालकों के हित में किए गए निर्णयों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री मंगला पशु बीमा योजना के तहत अब तक 12 लाख से अधिक पशुओं का निःशुल्क बीमा किया गया है। मोबाइल वेटेरिनरी सेवाओं के जरिए करीब 60 लाख पशुओं का उपचार किया जा चुका है। दुग्ध उत्पादकों को मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के तहत 5 रुपये प्रति लीटर का अनुदान दिया जा रहा है, जिससे अब तक 5 लाख से अधिक दुग्ध उत्पादकों को 1300 करोड़ रुपये से ज्यादा का भुगतान किया गया है।
बैठक में किसानों, पशुपालकों और डेयरी संघों के प्रतिनिधियों ने सरकार के फैसलों की सराहना करते हुए कई सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया कि सकारात्मक सुझावों को आगामी राज्य बजट में शामिल करने का प्रयास किया जाएगा।


