राजस्थान के श्रीकरणपुर क्षेत्र में टोल विवाद को लेकर हालात लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। इसी बीच रूपिंदर सिंह कुन्नर को मंगलवार को उनके आवास पर नजरबंद कर दिया गया, जिससे राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। सुबह से ही विधायक के 25 बीबी स्थित निवास के बाहर भारी पुलिस बल तैनात किया गया और उनकी गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।
जानकारी के अनुसार, सोमवार रात विधायक रूपिंदर सिंह कुन्नर ने अपने समर्थकों की एक बैठक मंगलवार को अपने आवास पर बुलाने का आह्वान किया था। प्रशासन को आशंका थी कि इस बैठक में बड़ी संख्या में लोग जुट सकते हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती है। इसी को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन कार्रवाई करते हुए उन्हें नजरबंद कर दिया।
दरअसल, यह पूरा मामला क्षेत्र में स्थित 18 बीबी टोल को लेकर चल रहे लंबे विवाद से जुड़ा हुआ है। स्थानीय लोग काफी समय से इस टोल के विरोध में आंदोलन कर रहे हैं और इसे हटाने या इसमें राहत देने की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि इस टोल की वैधता अवधि वर्ष 2024 में पूरी हो चुकी है, इसलिए अब यहां से शुल्क वसूलना नियमों के खिलाफ है।
सोमवार को स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब कोर्ट के आदेशों के बाद प्रशासन और पुलिस की टीम टोल संचालन शुरू कराने के लिए मौके पर पहुंची। लेकिन वहां पहले से ही टोल संघर्ष समिति के सदस्य धरने पर बैठे हुए थे, जिन्होंने प्रशासन के इस कदम का विरोध किया। इस दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया और स्थिति को संभालने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
तनाव बढ़ने पर पुलिस ने टोल संघर्ष समिति के संयोजक सुखबीर सिंह फौजी को हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई से आंदोलनकारियों में नाराजगी और बढ़ गई और विरोध तेज हो गया।
इसी बीच विधायक रूपिंदर सिंह कुन्नर भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने आंदोलनकारियों के समर्थन में धरना शुरू कर दिया। पूरे दिन पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास करते रहे, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल सका। शाम तक गतिरोध बना रहा, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए विधायक को भी हिरासत में ले लिया।
बताया जा रहा है कि हिरासत में लेने के बाद विधायक को देर रात किसी अज्ञात स्थान पर ले जाकर छोड़ दिया गया। हालांकि, इसके अगले ही दिन जब उन्होंने अपने समर्थकों को फिर से बैठक के लिए बुलाया, तो प्रशासन ने उन्हें नजरबंद करने का फैसला लिया। इस कदम को संभावित भीड़ और विरोध को रोकने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
टोल विवाद के दूसरे पक्ष यानी टोल संचालकों का कहना है कि कोरोना महामारी और किसान आंदोलन के दौरान लंबे समय तक टोल संचालन प्रभावित रहा, जिसके कारण उन्हें आर्थिक नुकसान हुआ। ऐसे में उन्हें टोल वसूली की अवधि में छूट मिलनी चाहिए। यही वजह है कि वे टोल को जारी रखने के पक्ष में हैं।
वहीं दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि टोल की अवधि पूरी हो चुकी है और अब इसे जारी रखना जनता पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डालने जैसा है। इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है, जिससे विवाद लगातार गहराता जा रहा है।
मंगलवार को विधायक के समर्थन में बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। इसी के चलते प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है। इसके साथ ही टोल संघर्ष समिति ने भी संकेत दिए हैं कि आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस बीच, क्षेत्र में डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती के कार्यक्रम भी प्रस्तावित हैं, जिसके चलते प्रशासन अतिरिक्त सतर्कता बरत रहा है। अधिकारियों को आशंका है कि इस मौके पर भीड़ बढ़ सकती है, जिससे स्थिति और जटिल हो सकती है।
पूरे घटनाक्रम ने स्थानीय राजनीति को भी गरमा दिया है। एक ओर विधायक के नजरबंद किए जाने को लेकर उनके समर्थकों में नाराजगी है, वहीं प्रशासन इसे कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम बता रहा है।


