मनीषा शर्मा। उत्तर पश्चिम रेलवे (NWR) ने अपने सेवानिवृत्त कर्मचारियों और पेंशनर्स की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। चौथे राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र अभियान (Digital Life Certificate Campaign 4.0) के तहत रेलवे प्रशासन ने पेंशनभोगियों के लिए विशेष शिविर आयोजित करने की घोषणा की है। यह पहल भारत सरकार के कार्मिक, लोक शिकायत तथा पेंशन मंत्रालय और पेंशन एवं पेंशनभोगी कल्याण विभाग के निर्देशों के तहत की जा रही है। जोधपुर मंडल के अंतर्गत आने वाले सभी प्रमुख रेलवे स्टेशनों और अस्पतालों में इन शिविरों का आयोजन किया जाएगा।
जोधपुर रेलवे अस्पताल में महीनेभर चलेगा शिविर
उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल रेलवे अस्पताल में 3 से 30 नवंबर 2025 तक रोजाना सुबह 10 बजे से विशेष शिविर आयोजित किया जाएगा। इन शिविरों का मुख्य उद्देश्य पेंशनभोगियों को उनके जीवन प्रमाण-पत्र (Jeevan Praman Patra) बनवाने में सहायता प्रदान करना है ताकि वे बिना किसी परेशानी के अपनी पेंशन जारी रख सकें। वरिष्ठ मंडल वित्त प्रबंधक विक्रम सिंह सैनी ने जानकारी दी कि ये शिविर मंडल रेल प्रबंधक (DRM) अनुराग त्रिपाठी के मार्गदर्शन में आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में रेलवे के पेंशनभोगियों को उनके डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र (Digital Life Certificate) बनवाकर मौके पर ही दिए जाएंगे।
पाली मारवाड़ में भी लगेगा विशेष शिविर
पाली और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले पेंशनर्स के लिए भी राहत भरी खबर है। 3 नवंबर, सोमवार को पाली मारवाड़ रेलवे स्टेशन पर सुबह 10 बजे से विशेष शिविर लगाया जाएगा। इस पहल से पाली क्षेत्र के सैकड़ों पेंशनर्स को अपने नजदीकी स्टेशन पर ही प्रमाण-पत्र बनवाने की सुविधा मिलेगी, जिससे उन्हें जोधपुर तक की यात्रा नहीं करनी पड़ेगी।
किन दस्तावेजों की होगी आवश्यकता
रेलवे प्रशासन ने पेंशनभोगियों से अपील की है कि वे शिविर में आने से पहले आवश्यक दस्तावेज अपने साथ लेकर आएं ताकि प्रक्रिया सुचारू रूप से पूरी की जा सके। इसके लिए पेंशनर्स को निम्नलिखित दस्तावेज लाने होंगे—
आधार कार्ड की कॉपी
रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर (जिस पर OTP प्राप्त हो सके)
बैंक खाता पासबुक की कॉपी
पीपीओ (Pension Payment Order) की नवीनतम कॉपी
इन दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर पेंशनर्स डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र बनवाने का लाभ उठा सकेंगे।
डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र का महत्व
हर वर्ष नवंबर माह में पेंशनभोगियों को यह प्रमाण-पत्र जमा करना अनिवार्य होता है। पारंपरिक प्रक्रिया में पेंशनर्स को बैंक या कार्यालय जाकर फॉर्म भरना पड़ता था, लेकिन अब डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र (Digital Life Certificate) से यह प्रक्रिया बेहद आसान हो गई है। अब पेंशनर्स अपने प्रमाण-पत्र को ऑनलाइन आधार ऑथेंटिकेशन के माध्यम से जमा कर सकते हैं। इससे उन्हें कार्यालयों में बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ते और उनका समय व श्रम दोनों की बचत होती है।
देशभर में सबसे बड़ा डिजिटल अभियान
यह चौथा राष्ट्रव्यापी डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र अभियान है, जिसे देशभर में 19 पेंशन वितरण बैंक, इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक, रेलवे, यूआईडीएआई (UIDAI) और पेंशनभोगी कल्याण संघों के सहयोग से चलाया जा रहा है। पिछले वर्ष 2024 में आयोजित तीसरे अभियान में रिकॉर्ड 1.62 करोड़ डिजिटल जीवन प्रमाण-पत्र जारी किए गए थे। इनमें से 50 लाख से अधिक प्रमाण-पत्र फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक से बनाए गए थे। इस बार का लक्ष्य 2 करोड़ प्रमाण-पत्र तैयार करने का है, जो अब तक का सबसे बड़ा लक्ष्य है।
रेलवे प्रशासन की पहल से बढ़ेगी पेंशनर्स की सुविधा
रेलवे प्रशासन का यह कदम निश्चित रूप से उन पेंशनभोगियों के लिए राहत लेकर आया है जो उम्रदराज होने या स्वास्थ्य संबंधी कारणों से बार-बार कार्यालय नहीं जा पाते। पूरे महीने तक चलने वाले इन शिविरों से पेंशनर्स अपनी सुविधा अनुसार किसी भी दिन आकर प्रमाण-पत्र बनवा सकेंगे। इसके अलावा, इन शिविरों में डिजिटल प्रक्रिया के लिए फेस रिकग्निशन ऑथेंटिकेशन सिस्टम का भी उपयोग किया जाएगा, जिससे प्रमाण-पत्र बनवाने में समय की बचत होगी और त्रुटियों की संभावना न्यूनतम रहेगी।
डिजिटल इंडिया की दिशा में एक और कदम
भारत सरकार द्वारा संचालित यह अभियान डिजिटल इंडिया मिशन की दिशा में एक और बड़ा कदम है। इससे न केवल पेंशन वितरण प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी, बल्कि सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों की पहचान में भी सटीकता आएगी। रेलवे प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि इस पहल से पेंशनभोगियों की जागरूकता बढ़ेगी और वे समय पर अपने प्रमाण-पत्र जमा कर पाएंगे। इससे पेंशन वितरण में किसी प्रकार की देरी नहीं होगी।


