माघ पूर्णिमा हिंदू पंचांग में एक अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। यह दिन स्नान, दान, व्रत, तप और कल्पवास की समाप्ति से जुड़ा होता है। इसके धार्मिक महत्त्व के साथ-साथ यह अवसर खगोल विज्ञान और आकाशीय घटनाओं में रुचि रखने वालों के लिए भी महत्वपूर्ण होता है। वर्ष 2026 की माघ पूर्णिमा की रात विशेष इसलिए है क्योंकि इसी दिन आसमान में दुर्लभ और अत्यधिक चमकीले चंद्रमा, जिसे स्नो मून कहा जाता है, का दर्शन होगा।
स्नो मून को कब और कैसे देखा जा सकता है
खगोलप्रेमियों के लिए फरवरी की पूर्णिमा हमेशा उत्सुकता का विषय रही है। वर्ष 2026 में स्नो मून 1 फरवरी की शाम को अपनी चरम चमक पर पहुंचेगा। पूर्वी समयानुसार यह पूर्ण चंद्रमा शाम 5 बजकर 9 मिनट पर अपने सबसे चमकीले रूप में नजर आएगा। सूर्यास्त के बाद पूर्व दिशा में क्षितिज के ऊपर उगता हुआ यह चांद आसानी से देखा जा सकता है। इस दिन का चांद सामान्य दिनों की तुलना में अधिक बड़ा और चमकीला प्रतीत होता है। इसे नंगी आंखों से देखने के लिए किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होती, केवल साफ मौसम पर्याप्त है। शहर से दूर, कम प्रकाश और प्रदूषण वाले क्षेत्रों में स्नो मून का दृश्य और भी भव्य दिखाई देता है।
स्नो मून नाम के पीछे छिपा रोचक इतिहास
फरवरी के पूर्ण चंद्रमा को स्नो मून नाम कई शताब्दियों पूर्व मिला था। इसके नाम के पीछे लोक-परंपराओं और मौसम से जुड़ी वास्तविक परिस्थितियों का योगदान है। इसका उल्लेख 1760 के दशक में ‘द ओल्ड फार्मर्स अल्मनैक’ में भी मिलता है। प्राचीन समय में उत्तरी अमेरिका के कई क्षेत्रों में फरवरी के महीने में भारी बर्फबारी होती थी। इसलिए लोगों ने इस चंद्रमा को स्नो मून कहना शुरू कर दिया।
इसके अलावा इस पूर्णिमा को दो अन्य नामों—हंगर मून और स्टॉर्म मून—से भी जाना जाता है। भारी बर्फबारी के कारण भोजन की कमी होना आम बात थी, इसलिए हंगर मून नाम पड़ा। वहीं, तेज हवाओं और बर्फीले तूफानों के कारण इसे स्टॉर्म मून भी कहा गया। उस समय के लोग प्रकृति और ऋतुओं के आधार पर पूर्णिमा को विशेष नाम देते थे। यही कारण है कि वर्ष के हर महीने की पूर्णिमा का अपना अलग नाम है—जैसे वुल्फ मून, हार्वेस्ट मून, स्ट्रॉबेरी मून, कोल्ड मून आदि।
धार्मिक महत्व और खगोलीय उत्साह का मेल
माघ पूर्णिमा अपने आप में अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इस दिन का स्नान और दान बड़ा पुण्यदायी माना जाता है। कल्पवास की समाप्ति भी इसी तिथि को होती है। जब धार्मिक मान्यता और आकाशीय अद्भुत दृश्य एक साथ हों, तो यह दिन और भी विशेष बन जाता है। स्नो मून इस पूर्णिमा को खगोलप्रेमियों के लिए अविस्मरणीय अनुभव बनाता है।
वैज्ञानिक और सांस्कृतिक विरासत का संयोजन
स्नो मून न केवल वैज्ञानिक दृष्टि से दिलचस्प है, बल्कि यह मानव इतिहास, परंपराओं और प्रकृति के अवलोकन का भी प्रतीक है। प्राचीन सभ्यताओं के लोगों ने चंद्रमा के आधार पर ऋतुओं, कृषि और जीवनशैली की व्याख्या की। स्नो मून इसी परंपरा की एक कड़ी है, जो आज भी आधुनिक खगोल विज्ञान के साथ लोगों की रुचि का केंद्र बनी हुई है।


