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SIR विवाद: कांग्रेस विधायक रफीक़ ख़ान के गंभीर आरोप, बोले– बीजेपी योजनाबद्ध तरीके से कटवा रही वोटर नाम

SIR विवाद: कांग्रेस विधायक रफीक़ ख़ान के गंभीर आरोप, बोले– बीजेपी योजनाबद्ध तरीके से कटवा रही वोटर नाम

राजस्थान की राजनीति में SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस विधायक और सचेतक रफीक़ ख़ान ने इस मुद्दे पर भारतीय जनता पार्टी पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। रफीक़ ख़ान का कहना है कि बीजेपी पहले अपनी मर्जी से मतदाताओं के नाम सूची से नहीं कटवा पाई, लेकिन अब SIR के नाम पर एक सुनियोजित अभियान चलाकर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की कोशिश की जा रही है।

योजनाबद्ध तरीके से नाम हटाने का आरोप

रफीक़ ख़ान ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में एक रणनीति के तहत लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को प्रभावित करने का प्रयास है। विधायक के अनुसार, जिन इलाक़ों में बीजेपी के लोग कभी गए तक नहीं, उन क्षेत्रों के मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए आवेदन दे दिए गए हैं। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और इससे मतदाता सूची की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं।

एक BLA पर सैकड़ों नाम कटवाने के आवेदन का दावा

कांग्रेस विधायक ने दावा किया कि एक ही बूथ लेवल एजेंट (BLA) द्वारा 100 से लेकर 600 तक मतदाताओं के नाम कटवाने के लिए फॉर्म जमा कराए गए हैं। उन्होंने इसे बड़े पैमाने पर चल रहे अभियान का संकेत बताया। रफीक़ ख़ान के अनुसार, किसी एक व्यक्ति द्वारा इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने के आवेदन देना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हो सकता। यह साफ तौर पर दर्शाता है कि मतदाता सूची को प्रभावित करने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है।

कांग्रेस पार्षद और सामाजिक वर्गों को भी बनाया निशाना

रफीक़ ख़ान ने आरोप लगाया कि यह मामला केवल आम मतदाताओं तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा कि बीजेपी नेताओं ने कांग्रेस पार्षद अकबर ख़ान का नाम कटवाने के लिए भी आवेदन दे दिया है। इसके अलावा महावत बिरादरी के मुखिया का नाम हटाने की कोशिश किए जाने का आरोप भी लगाया गया। विधायक का कहना है कि इससे यह स्पष्ट होता है कि विपक्षी जनप्रतिनिधियों और सामाजिक रूप से प्रभावशाली लोगों को भी टारगेट किया जा रहा है, ताकि राजनीतिक और सामाजिक संतुलन को प्रभावित किया जा सके।

फर्जी कागज़ात और हस्ताक्षरों का आरोप

कांग्रेस विधायक ने SIR प्रक्रिया के दौरान फर्जी दस्तावेजों और फर्जी हस्ताक्षरों के इस्तेमाल का भी आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि ऐसे मामलों में तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई हो। रफीक़ ख़ान का कहना है कि यदि इस तरह की गतिविधियों को समय रहते नहीं रोका गया, तो इसका सीधा असर आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर पड़ेगा।

बीजेपी के BLA ने आरोपों से किया इनकार

इस पूरे मामले में रफीक़ ख़ान बीजेपी के BLA नईमुद्दीन और साबिर अली को भी मीडिया के सामने लेकर आए। दोनों BLA ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्होंने किसी भी मतदाता का नाम कटवाने के लिए कोई फॉर्म नहीं भरा। उनका दावा है कि किसी अन्य व्यक्ति ने उनके नाम से फर्जी हस्ताक्षर कर फॉर्म जमा कर दिए हैं। उन्होंने इसे उन्हें फंसाने की साजिश बताया। इस पर रफीक़ ख़ान ने कहा कि यदि BLA के नाम और हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल हुआ है, तो यह और भी गंभीर अपराध है और इस पर तुरंत एफआईआर होनी चाहिए।

निर्वाचन आयोग पर भी उठाए सवाल

रफीक़ ख़ान ने केवल बीजेपी ही नहीं, बल्कि निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि यदि इस तरह की गतिविधियों के बावजूद समय रहते कार्रवाई नहीं होती है, तो यह निर्वाचन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो कांग्रेस निर्वाचन आयोग के खिलाफ भी कोर्ट का दरवाजा खटखटाएगी।

कानूनी लड़ाई के संकेत

कांग्रेस विधायक ने साफ किया कि यदि SIR के नाम पर मतदाता सूची से गलत तरीके से नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं रोकी गई, तो पार्टी कानूनी रास्ता अपनाने से पीछे नहीं हटेगी। उनका कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची का निष्पक्ष और पारदर्शी होना बेहद जरूरी है। ऐसे में यह मामला केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ा एक गंभीर विषय बन चुका है।

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