आज की व्यस्त जीवनशैली और अत्यधिक कार्यभार के बीच बहुत से लोग दिनभर थकान, चिड़चिड़ापन और गुस्से जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। अक्सर इसे डिप्रेशन या मानसिक कमजोरी समझ लिया जाता है, लेकिन यह वास्तव में बर्न आउट सिंड्रोम (Burnout Syndrome) भी हो सकता है। यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब व्यक्ति लंबे समय तक लगातार तनाव और मानसिक दबाव में रहता है। इससे उसकी मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक ऊर्जा धीरे-धीरे खत्म होने लगती है।
क्या है बर्न आउट सिंड्रोम?
बर्न आउट सिंड्रोम एक मानसिक और शारीरिक थकान की अवस्था है, जिसमें व्यक्ति काम के प्रति रुचि खो देता है, ऊर्जा में कमी महसूस करता है और भावनात्मक रूप से कमजोर पड़ने लगता है। यह अक्सर उन लोगों में देखा जाता है जो लंबे समय तक तनावपूर्ण माहौल में काम करते हैं या जिन पर काम का अत्यधिक बोझ होता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने बर्न आउट को एक “ऑक्यूपेशनल फिनॉमेनन” यानी कार्य-स्थान से संबंधित समस्या के रूप में वर्गीकृत किया है। यह सीधे तौर पर तनाव और मानसिक दबाव से जुड़ी स्थिति है।
किन लोगों को होती है बर्न आउट की समस्या
यह समस्या खासतौर पर उन लोगों में पाई जाती है जो लंबे समय तक कंप्यूटर या डेस्क पर बैठे रहते हैं और लगातार एक ही प्रकार का कार्य करते रहते हैं। ऑफिस कर्मचारी, शिक्षण संस्थानों से जुड़े लोग, डॉक्टर, नर्स, पत्रकार और आईटी सेक्टर के कर्मचारी बर्न आउट के ज्यादा शिकार होते हैं।
इसके अलावा जो लोग अपनी भावनाओं को व्यक्त नहीं कर पाते या मन की बात किसी से साझा नहीं करते, उनमें भी यह समस्या अधिक पाई जाती है। समय के साथ यह तनाव मानसिक और शारीरिक रोगों का रूप ले सकता है।
बर्न आउट सिंड्रोम के मुख्य लक्षण
बर्न आउट के लक्षण धीरे-धीरे विकसित होते हैं और शुरुआत में सामान्य थकान जैसे लग सकते हैं, लेकिन समय के साथ यह गंभीर मानसिक और शारीरिक समस्याओं का कारण बन जाते हैं। इसके प्रमुख लक्षण हैं –
लगातार थकान और कमजोरी महसूस होना
किसी भी काम में मन न लगना या उत्साह खत्म होना
हमेशा नकारात्मक विचारों का रहना
बार-बार गुस्सा आना और चिड़चिड़ापन बढ़ना
नींद न आना या बहुत अधिक नींद आना
सरदर्द, बॉडी पेन और मानसिक उलझन महसूस होना
लोगों से बातचीत या सामाजिक गतिविधियों से दूरी बनाना
बर्न आउट से बढ़ने वाले स्वास्थ्य जोखिम
बर्न आउट केवल मानसिक स्थिति नहीं है, बल्कि यह हार्ट और ब्रेन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर असर डालता है। शोधों के अनुसार, बर्न आउट होने पर हार्टबीट्स अनियमित हो जाती हैं और इससे हृदय रोगों का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा, पेट से जुड़ी परेशानियां, जैसे एसिडिटी, गैस, और पाचन में गड़बड़ी, भी आम हो जाती हैं। लंबे समय तक बर्न आउट की स्थिति रहने पर व्यक्ति को डिप्रेशन, एंग्जायटी और नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
बर्न आउट से बचने के उपाय
रोजाना पर्याप्त नींद लें – नींद शरीर और दिमाग की रिकवरी के लिए सबसे जरूरी है।
वर्क ब्रेक लें – लगातार काम करने की बजाय बीच-बीच में ब्रेक लेना जरूरी है।
फिजिकल एक्टिविटी करें – रोजाना व्यायाम, योग या ध्यान करने से मानसिक तनाव कम होता है।
डिजिटल डिटॉक्स अपनाएं – सोशल मीडिया और मोबाइल स्क्रीन से दूरी बनाना मानसिक शांति देता है।
किसी भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें – अपनी भावनाओं को व्यक्त करना मानसिक राहत देता है।
डाइट का ध्यान रखें – पोषण से भरपूर संतुलित आहार से शरीर की ऊर्जा बनी रहती है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। किसी भी प्रकार के लक्षण या स्वास्थ्य समस्या होने पर विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह अवश्य लें।


