राजस्थान की राजनीति में इन दिनों एक नया चलन लगातार चर्चा में है। प्रदेश के कई दिग्गज नेता अपने राजनीतिक वजूद के साथ-साथ अपने बेटों की भी सियासी जमीन तैयार करने में जुटे नजर आ रहे हैं। यह प्रवृत्ति अब केवल कयासों तक सीमित नहीं रही, बल्कि सार्वजनिक मंचों और राजनीतिक कार्यक्रमों में भी साफ दिखाई देने लगी है। इसी कड़ी में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं, जब वे हाल ही में पहली बार अपने बेटे आरान पायलट के साथ एक राजनीतिक कार्यक्रम में नजर आए।
एनएसयूआई द्वारा आयोजित अरावली बचाओ पैदल मार्च में आरान पायलट की मौजूदगी को राजनीतिक हलकों में उनके सियासी सफर की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है। यह पहला अवसर है, जब सचिन पायलट अपने बेटे के साथ किसी राजनीतिक गतिविधि में सार्वजनिक रूप से दिखाई दिए हैं।
एनएसयूआई के अरावली पैदल मार्च से मिला सियासी संकेत
बीते दिनों एनएसयूआई की ओर से निकाली गई अरावली बचाओ पैदल मार्च में सचिन पायलट सक्रिय भूमिका में रहे। इसी दौरान उनके साथ उनके बेटे आरान पायलट भी नजर आए। कांग्रेस से जुड़े युवा संगठनों के कार्यक्रम में आरान की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि पायलट परिवार अब अगली पीढ़ी को धीरे-धीरे राजनीति से परिचित करा रहा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी नेता के बेटे की सार्वजनिक राजनीतिक मंच पर पहली मौजूदगी यूं ही नहीं होती। इसे एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा माना जाता है, जिसमें युवा पीढ़ी को धीरे-धीरे संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच पहचान दिलाई जाती है।
कौन हैं आरान पायलट
कांग्रेस के दिग्गज नेता सचिन पायलट के दो बेटे हैं। बड़े बेटे का नाम आरान पायलट है, जबकि छोटे बेटे का नाम विहान पायलट है। आरान पायलट का जन्म वर्ष 2008 में हुआ था और वर्तमान में उनकी उम्र करीब 17 वर्ष है। आरान को खेलों में खास रुचि है और वे विशेष रूप से फुटबॉल के शौकीन हैं। उन्होंने फुटबॉल खिलाड़ी के रूप में अपनी अलग पहचान भी बनाई है।
राजनीति से दूरी बनाए रखने के बावजूद आरान की रुचियों और गतिविधियों पर पहले से ही लोगों की नजर रहती रही है। लेकिन एनएसयूआई के अरावली बचाओ मार्च में उनकी भागीदारी के बाद पहली बार उन्हें राजनीतिक नजरिए से देखा जा रहा है।
पिता से ज्यादा संपत्ति को लेकर भी चर्चा
सचिन पायलट और उनके परिवार को लेकर वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान एक और बड़ा खुलासा सामने आया था। चुनावी एफिडेविट के जरिए यह जानकारी सार्वजनिक हुई थी कि सचिन पायलट और उनकी पत्नी सारा पायलट के बीच तलाक हो चुका है। इसी एफिडेविट में संपत्ति से जुड़े आंकड़े भी सामने आए थे, जिसने राजनीतिक गलियारों में खासा ध्यान खींचा।
एफिडेविट के अनुसार, सचिन पायलट के पास 2.95 लाख रुपये नकद बताए गए थे, जबकि उनके दोनों बेटों आरान और विहान के नाम 3.50 लाख रुपये नकद दर्ज थे। इस खुलासे के बाद यह चर्चा भी हुई कि पायलट के बेटे अपने पिता से अधिक नकदी संपत्ति के मालिक हैं। हालांकि यह आंकड़े प्रतीकात्मक थे, लेकिन इसने आरान पायलट को लेकर जिज्ञासा और बढ़ा दी।
राजस्थान की राजनीति में बढ़ता वंशवादी ट्रेंड
राजस्थान की राजनीति में बीते कुछ वर्षों से यह साफ देखने को मिल रहा है कि कई नेता अपने बेटों को राजनीतिक रूप से सक्रिय कर रहे हैं। कहीं वे चुनावी सभाओं में साथ दिखते हैं, तो कहीं संगठनात्मक कार्यक्रमों में उनकी मौजूदगी दर्ज कराई जाती है। इसका उद्देश्य साफ है कि समय रहते अगली पीढ़ी को राजनीति की बारीकियों से परिचित कराया जाए।
सचिन पायलट के मामले में भी यही चर्चा है कि वे अपने बेटे आरान को धीरे-धीरे सियासी पाठशाला में उतार रहे हैं। एनएसयूआई जैसे छात्र संगठन से जुड़ा कार्यक्रम इस दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।
आगामी चुनाव और आरान पायलट का भविष्य
आरान पायलट फिलहाल नाबालिग हैं, लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव तक वे वयस्क हो जाएंगे। ऐसे में यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या सचिन पायलट भविष्य में अपने बेटे को चुनावी राजनीति में उतार सकते हैं। हालांकि इस बारे में पायलट परिवार की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन राजनीतिक संकेतों को देखते हुए अटकलें तेज हैं।


