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SI भर्ती परीक्षा पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

SI भर्ती परीक्षा पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर और प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद के बीच सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने 5 और 6 अप्रैल 2026 को प्रस्तावित परीक्षा पर रोक लगाने या उसे स्थगित करने से साफ इनकार कर दिया है। इसके साथ ही स्पष्ट कर दिया गया है कि परीक्षा अपने तय कार्यक्रम के अनुसार ही आयोजित की जाएगी। यह निर्णय न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने सुनाया। इस फैसले से हजारों अभ्यर्थियों के लिए स्थिति स्पष्ट हो गई है, जो लंबे समय से परीक्षा को लेकर असमंजस में थे।

अभ्यर्थियों को मिली प्रोविजनल अनुमति

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने परीक्षा पर रोक नहीं लगाई, लेकिन अभ्यर्थियों को राहत देते हुए उन्हें परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इन अभ्यर्थियों की भागीदारी पूरी तरह अस्थायी यानी प्रोविजनल होगी।

पीठ ने निर्देश दिया कि ऐसे अभ्यर्थियों के परिणाम फिलहाल घोषित नहीं किए जाएंगे। उनके परिणाम भविष्य के न्यायिक आदेशों के अधीन रहेंगे। साथ ही कोर्ट ने यह भी साफ किया कि इस प्रोविजनल भागीदारी से अभ्यर्थियों के पक्ष में कोई कानूनी अधिकार या समानता उत्पन्न नहीं होगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि अभ्यर्थियों का अवसर भी बना रहे और कानूनी प्रक्रिया भी प्रभावित न हो।

पेपर लीक मामले से जुड़ा है विवाद

यह पूरा विवाद राजस्थान की पूर्व सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 के पेपर लीक प्रकरण से जुड़ा हुआ है। इस मामले की सुनवाई राजस्थान हाई कोर्ट में अभी भी लंबित है।

अभ्यर्थियों का कहना था कि जब तक आयु सीमा में छूट को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो जाता, तब तक नई भर्ती परीक्षा आयोजित नहीं की जानी चाहिए। उनका तर्क था कि इससे कई उम्मीदवारों के साथ अन्याय हो सकता है, जो आयु सीमा के कारण परीक्षा से बाहर हो सकते हैं। इसी आधार पर अभ्यर्थियों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर परीक्षा स्थगित करने की मांग की थी।

अभ्यर्थियों की ओर से रखी गई दलील

अभ्यर्थियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पी.बी. सुरेश और अधिवक्ता हरेन्द्र नील ने कोर्ट में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही राजस्थान हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वह आयु सीमा में छूट से संबंधित अपीलों पर 31 मार्च 2026 तक फैसला दे।

हालांकि, निर्धारित समयसीमा के बावजूद हाईकोर्ट की ओर से अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं आया है। इस कारण अभ्यर्थियों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। वकीलों ने तर्क दिया कि ऐसे में परीक्षा आयोजित करना उचित नहीं होगा, क्योंकि इससे उन उम्मीदवारों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं जो आयु सीमा में छूट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।

राज्य सरकार ने किया विरोध

दूसरी ओर, राजस्थान सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने परीक्षा स्थगित करने का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि परीक्षा के लिए सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और हजारों अभ्यर्थी इसमें शामिल होने वाले हैं।

सरकार का तर्क था कि इस स्तर पर परीक्षा स्थगित करने से व्यापक अव्यवस्था फैल सकती है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। सरकार ने यह भी कहा कि परीक्षा समय पर कराना आवश्यक है, ताकि भर्ती प्रक्रिया में और देरी न हो।

संतुलित दृष्टिकोण अपनाया कोर्ट ने

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में दोनों पक्षों के तर्कों को ध्यान में रखते हुए संतुलित दृष्टिकोण अपनाया। एक ओर परीक्षा को तय समय पर आयोजित करने की अनुमति दी गई, वहीं दूसरी ओर अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए उन्हें प्रोविजनल आधार पर शामिल होने की अनुमति दी गई। यह निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक आवश्यकताओं के बीच संतुलन स्थापित करने का प्रयास माना जा रहा है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस फैसले से भर्ती प्रक्रिया में अनावश्यक देरी नहीं होगी और साथ ही कोर्ट के अंतिम निर्णय तक अभ्यर्थियों के अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे।

आगे क्या रहेगा असर

अब 5 और 6 अप्रैल को परीक्षा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार आयोजित होगी। हालांकि, जिन अभ्यर्थियों को प्रोविजनल अनुमति दी गई है, उनके परिणाम कोर्ट के अंतिम आदेश तक रोके जाएंगे। इसका मतलब है कि भर्ती प्रक्रिया का अंतिम परिणाम हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के आगामी फैसलों पर निर्भर करेगा।

यह मामला आने वाले समय में और भी महत्वपूर्ण हो सकता है, क्योंकि इससे न केवल इस भर्ती पर बल्कि भविष्य की भर्तियों की प्रक्रिया पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

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