शोभना शर्मा। राजस्थान में बहुचर्चित सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा 2021 (SI Exam-2021) पेपरलीक मामले में एक अहम कानूनी घटनाक्रम सामने आया है। राजस्थान हाईकोर्ट ने इस मामले में चार आरोपियों को जमानत प्रदान कर दी है। हाईकोर्ट की एकलपीठ ने आरोपी कैलाश कुमार, मंगलाराम, परमेश चौधरी और विनोद कुमार जाट उर्फ विनोद रेवाड़ की जमानत याचिकाएं स्वीकार करते हुए उन्हें राहत दी है। कोर्ट ने यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद कुमार भारवानी की एकलपीठ द्वारा पारित किया।
यह मामला राज्य की सबसे बड़ी भर्ती परीक्षाओं में शामिल SI परीक्षा से जुड़ा है, जिसमें पेपर लीक, डमी कैंडिडेट और पेपर खरीद-बेच जैसे गंभीर आरोप सामने आए थे। इस प्रकरण ने न केवल परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए, बल्कि राज्य की राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था में भी हलचल मचा दी थी।
आरोपियों पर क्या हैं आरोप
इस मामले में आरोपी कैलाश कुमार और मंगलाराम पर यह आरोप है कि उन्होंने डमी कैंडिडेट शेर सिंह से अपनी जगह परीक्षा दिलवाई। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों आरोपियों ने कथित तौर पर वास्तविक अभ्यर्थी की जगह शेर सिंह को परीक्षा में बैठाया, जिससे भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता प्रभावित हुई।
वहीं आरोपी विनोद कुमार जाट उर्फ विनोद रेवाड़ और परमेश चौधरी के खिलाफ पेपर खरीदने और बेचने से जुड़ा मामला दर्ज है। आरोप है कि इन दोनों ने परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र की अवैध खरीद-फरोख्त में भूमिका निभाई। इस तरह के आरोपों को जांच एजेंसियों ने संगठित गिरोह के रूप में देखा था, जो SI भर्ती परीक्षा को प्रभावित करने की साजिश में शामिल था।
कोर्ट में बचाव पक्ष की दलीलें
चारों आरोपियों की ओर से सीनियर एडवोकेट राजेश गोस्वामी, प्रिंसिपल सिंह, जय भारद्वाज, गर्वित सारस्वत और शिव जांगिड़ ने अदालत में पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। ऐसे में अब आरोपियों को लंबे समय तक जेल में रखने का कोई औचित्य नहीं है।
वकीलों ने यह भी दलील दी कि आरोपियों को झूठे मामले में फंसाया गया है और वे लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं। ट्रायल शुरू होने में देरी की संभावना को देखते हुए जमानत दिया जाना न्यायसंगत होगा। बचाव पक्ष ने यह तर्क भी रखा कि इसी मामले में कई सह-आरोपियों को पहले ही समकक्ष पीठ और सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, इसलिए समानता के आधार पर इन आरोपियों को भी राहत दी जानी चाहिए।
अभियोजन पक्ष का विरोध
वहीं विशेष लोक अभियोजक ने जमानत याचिकाओं का कड़ा विरोध किया। अभियोजन पक्ष का कहना था कि आरोपी विनोद कुमार जाट लंबे समय तक फरार रहा, जो उसकी संलिप्तता और अपराध की गंभीरता को दर्शाता है। अभियोजक ने यह भी कहा कि अन्य आरोपियों ने पेपर खरीदकर परीक्षा दी, जिससे राज्य की भर्ती प्रक्रिया को गंभीर नुकसान पहुंचा है।
अभियोजन की ओर से यह तर्क दिया गया कि इस तरह के अपराध समाज और युवाओं के भविष्य से जुड़े होते हैं, इसलिए आरोपियों को जमानत देना गलत संदेश देगा। अपराध की प्रकृति और उसके व्यापक प्रभाव को देखते हुए जमानत याचिकाएं खारिज की जानी चाहिए।
हाईकोर्ट का फैसला और आधार
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राजस्थान हाईकोर्ट ने संतुलित रुख अपनाया। कोर्ट ने माना कि चारों आरोपी काफी समय से हिरासत में हैं और मामले का ट्रायल जल्द पूरा होने की संभावना कम है। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी ध्यान में रखा कि इसी मामले में सह-आरोपियों को पहले ही जमानत दी जा चुकी है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वह मामले के गुण-दोष पर कोई टिप्पणी किए बिना जमानत प्रदान कर रहा है। कोर्ट का मानना था कि ट्रायल में देरी और समानता के सिद्धांत को देखते हुए आरोपियों को राहत देना उचित है। इसी आधार पर चारों आरोपियों की जमानत याचिकाएं स्वीकार कर ली गईं।
मामले का व्यापक असर
SI भर्ती परीक्षा 2021 पेपरलीक मामला राजस्थान में भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता से जुड़ा एक बड़ा उदाहरण बन चुका है। इस केस में लगातार सामने आ रही जमानतें यह संकेत देती हैं कि न्यायिक प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है। हालांकि, कोर्ट का यह फैसला अंतिम निर्णय नहीं है और आरोपों की सच्चाई का फैसला ट्रायल के बाद ही होगा।


