शोभना शर्मा। राजस्थान में हुए SI भर्ती 2021 को लेकर चल रहे विवाद पर आखिरकार हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुना दिया है। जस्टिस समीर जैन की एकलपीठ ने परीक्षा रद्द करने का आदेश देते हुए इसे पेपर लीक और अनियमितताओं का गंभीर मामला बताया। अदालत ने कहा कि जब परीक्षा का प्रश्नपत्र पूरे प्रदेश में लीक हो चुका था, तो भर्ती रद्द करना ही उचित कदम है। इस फैसले ने प्रदेश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
लोकेश शर्मा का तीखा हमला
हाईकोर्ट के फैसले के बाद पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के ओएसडी रहे लोकेश शर्मा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक तीखा ट्वीट किया। शर्मा ने इस पूरे घोटाले के लिए न सिर्फ पिछली कांग्रेस सरकार बल्कि मौजूदा बीजेपी सरकार की नीयत पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने लिखा, “SI भर्ती 2021 में पूर्व मुख्यमंत्री की जानकारी में उनकी नाक के नीचे सारा खेल हुआ। युवाओं के सपने चकनाचूर हुए। मिलीभगत कर बेईमान लोग मेहनती और ईमानदार युवाओं का हक डकार गए।” शर्मा ने आरोप लगाया कि यदि उस समय के सभी पेपर लीक की सही जांच की जाए तो एक बड़ा ‘नेक्सस’ सामने आ जाएगा। उन्होंने वर्तमान सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पेपर लीक की जांच के नाम पर खानापूर्ति होती रही और दोषियों पर कड़ा एक्शन नहीं हुआ। शर्मा ने उम्मीद जताई कि हाईकोर्ट का यह फैसला बड़ा संदेश देगा और अब “बड़े मगरमच्छ” भी अंजाम तक पहुंचेंगे।
RPSC की भूमिका पर उठे बड़े सवाल
लोकेश शर्मा के आरोपों के बाद फिर से RPSC (राजस्थान लोक सेवा आयोग) की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। अदालत ने अपने आदेश में साफ कहा है कि पेपर लीक मामले में RPSC के 6 सदस्यों की संलिप्तता पाई गई।
वकील हरेंद्र नील ने बताया कि कोर्ट ने तत्कालीन RPSC चेयरमैन के घर पर आरोपी बाबूलाल कटारा के जाने का जिक्र भी किया। बताया गया कि कटारा वहां कुछ अभ्यर्थियों को फायदा पहुंचाने के लिए गया था। अदालत ने माना कि यह मामला सिर्फ छोटे स्तर का नहीं बल्कि आयोग के भीतर तक फैला हुआ था।
अभ्यर्थियों को झटका और राहत
हाईकोर्ट का यह फैसला उन हजारों अभ्यर्थियों के लिए बड़ा झटका है जिन्होंने ईमानदारी से परीक्षा पास की थी और नियुक्ति का इंतजार कर रहे थे। उनकी उम्मीदों को धक्का जरूर लगा है, लेकिन कोर्ट ने उन्हें राहत भी दी है।
अदालत ने आदेश दिया कि 2021 की भर्ती के 1015 पदों में से 859 पदों को जुलाई 2025 में निकाले गए नए भर्ती विज्ञापन के साथ जोड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि पुराने अभ्यर्थियों को नए चयन में अवसर मिलेगा। सबसे अहम बात यह है कि 2021 में परीक्षा देने वाले वे सभी अभ्यर्थी जिनकी उम्र अब निकल चुकी है, वे भी नई भर्ती में शामिल हो सकेंगे।
राजनीति में हलचल
हाईकोर्ट का यह फैसला राजनीतिक गलियारों में भी बड़ा मुद्दा बन गया है। विपक्ष और सत्ता पक्ष दोनों एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। कांग्रेस जहां मौजूदा बीजेपी सरकार पर पेपर लीक घोटाले में ढिलाई बरतने का आरोप लगा रही है, वहीं बीजेपी यह कह रही है कि यह गड़बड़ी कांग्रेस शासनकाल में शुरू हुई थी।


