मनीषा शर्मा । राजस्थान में सब-इंस्पेक्टर (SI) भर्ती परीक्षा 2021 को हाई कोर्ट ने रद्द कर दिया है। इस फैसले के बाद राज्यभर में राजनीति और अभ्यर्थियों के बीच खासी हलचल मची हुई है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि फैसले के कई दिन गुजर जाने के बाद भी सरकार ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। अब तक न तो कोर्ट से फैसले की सर्टिफाइड कॉपी मांगी गई है और न ही अपील करने का कोई संकेत दिया गया है। इससे यह सवाल उठने लगे हैं कि क्या भजनलाल सरकार इस मामले को आगे बढ़ाना ही नहीं चाहती?
कोर्ट की कॉपी क्यों जरूरी होती है?
किसी भी न्यायिक फैसले के खिलाफ अपील करने से पहले उस फैसले की प्रमाणित कॉपी लेना अनिवार्य होता है। इसके लिए संबंधित पक्ष को कोर्ट में आवेदन देना होता है। जब तक यह कॉपी नहीं मिलती, अपील दाखिल करना संभव नहीं होता। लेकिन राजस्थान SI भर्ती मामले में सरकार की ओर से अब तक ऐसा कोई कदम नहीं उठाया गया है। यह चुप्पी इस ओर इशारा कर रही है कि शायद सरकार अपील में नहीं जाएगी।
सरकार की चुप्पी पर उठे सवाल
भजनलाल सरकार की इस चुप्पी ने कई तरह की अटकलों को जन्म दिया है। राजनीतिक हलकों और अभ्यर्थियों में चर्चा है कि क्या सरकार ने भर्ती घोटाले की सच्चाई को मान लिया है और इसलिए फैसले को चुनौती नहीं देना चाहती? यह भी कहा जा रहा है कि अगर सरकार अपील में जाती है तो उसे अपने ही SIT की रिपोर्ट के खिलाफ खड़ा होना पड़ेगा।
गौरतलब है कि SI भर्ती की जांच भजनलाल सरकार ने ही करवाई थी। एसओजी के मुखिया वीके सिंह की देखरेख में बनी SIT ने कई गड़बड़ियों का खुलासा किया था। इन्हीं रिपोर्ट्स के आधार पर भर्ती को रद्द करने की मांग जोर पकड़ने लगी थी। ऐसे में संभव है कि सरकार ने अपनी ही जांच के नतीजों पर भरोसा करते हुए कोर्ट का फैसला स्वीकार करने का रास्ता चुना हो।
चयनित अभ्यर्थियों की बेचैनी
भर्ती रद्द होने से सबसे ज्यादा नुकसान उन अभ्यर्थियों को हुआ है, जिन्हें चयनित कर लिया गया था। इनमें से कई अभ्यर्थियों को रेंज और जिले तक अलॉट हो चुके थे। वे पुलिस लाइन में अपनी ड्यूटी भी देने लगे थे। फैसले के अगले दिन तक उन्होंने पुलिस लाइन में अपनी हाजिरी दर्ज कराई।
इन अभ्यर्थियों में गहरी निराशा है। उनका कहना है कि कुछ लोगों की गलती की सजा पूरे बैच को क्यों दी जा रही है? वे मानते हैं कि अगर कुछ उम्मीदवार फर्जी तरीके से चयनित हुए हैं, तो उन्हें बाहर किया जाए, न कि पूरे परिणाम को रद्द किया जाए। यही वजह है कि चयनित अभ्यर्थियों का बड़ा समूह अब हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करने की तैयारी में है। वे वकीलों से सलाह ले रहे हैं और उम्मीद कर रहे हैं कि उन्हें न्याय मिलेगा।
राजनीतिक बयानबाजी
इस बीच, विपक्ष और सत्तारूढ़ दल के नेताओं के बयान भी सामने आए हैं। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ और नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने साफ किया है कि राज्य सरकार अभी इस पूरे मामले की समीक्षा कर रही है। उनका कहना है कि जो भी उचित लगेगा, उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इस बयान से यह संकेत मिलता है कि सरकार ने अभी तक अंतिम निर्णय नहीं लिया है। हालांकि, कोर्ट के फैसले के कई दिन बाद भी सर्टिफाइड कॉपी तक नहीं मांगे जाने से यह सवाल और गहराता जा रहा है कि क्या सरकार वास्तव में अपील करना चाहती है?
भर्ती घोटाले का साया
राजस्थान में बीते कुछ वर्षों से प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियां सामने आती रही हैं। पेपर लीक और फर्जीवाड़े के मामलों ने भर्ती प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे में SI भर्ती 2021 को रद्द करने के फैसले को कई लोग न्यायसंगत मान रहे हैं। उनका कहना है कि इससे भविष्य में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।
दूसरी तरफ, अभ्यर्थी यह मानते हैं कि सरकार को गड़बड़ी करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी, न कि मेहनत से पास हुए अभ्यर्थियों को सजा देनी चाहिए थी। यही असंतुलन इस पूरे प्रकरण को और पेचीदा बना रहा है।
आगे क्या होगा?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या भजनलाल सरकार अपील में जाएगी या कोर्ट के फैसले को अंतिम मान लेगी। अगर सरकार अपील नहीं करती, तो यह भर्ती रद्द मानी जाएगी और चयनित अभ्यर्थियों की उम्मीदें टूट जाएंगी। लेकिन अगर सरकार अपील में जाती है, तो मामला लंबा खिंच सकता है और अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर अनिश्चितता बनी रहेगी।