राजस्थान में उप निरीक्षक (SI) भर्ती परीक्षा में हुए फर्जीवाड़ा मामले ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस मामले में विशेष संचालन समूह (SOG) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के तत्कालीन पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) राजकुमार यादव और उनके बेटे भरत यादव को हिरासत में लिया है।
कैसे हुआ खुलासा?
सूत्रों के अनुसार, राजकुमार यादव जयपुर पुलिस लाइन में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत थे और अशोक गहलोत के मुख्यमंत्री कार्यकाल में उनकी सुरक्षा में तैनात थे। SOG की जांच में सामने आया कि उन्होंने अपने बेटे भरत के लिए SI भर्ती का पेपर लीक करवाया था।भरत ने लिखित परीक्षा पास कर ली थी, लेकिन फिजिकल टेस्ट में असफल हो गया। इसके बाद भी जांच एजेंसियों ने उसकी परीक्षा में मिली संदिग्ध मदद की पुष्टि की।
गहलोत की प्रतिक्रिया
इस मामले पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने लिखा: “मीडिया के माध्यम से जानकारी में आया है कि मेरी सुरक्षा में तैनात जयपुर पुलिस लाइन के एक हेड कांस्टेबल एवं उनके पुत्र को SOG ने हिरासत में लिया है। किसी भी व्यक्ति की अपराध में संलिप्तता हो तो कानून अपना काम करे। मुझे आशा है कि SOG बिना किसी दबाव के इस मामले की जांच कर तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचेगी।” गहलोत का यह बयान साफ करता है कि वे इस मामले में राजनीतिक दखल से बचना चाहते हैं और जांच एजेंसी को स्वतंत्र रूप से काम करने का समर्थन कर रहे हैं।
SOG की कार्रवाई और जांच की दिशा
SOG ने राजकुमार यादव और भरत को कोर्ट में पेश किया है। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि पेपर लीक नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है, लेकिन जांच टीम इस पूरे मामले की तह तक जाने के लिए लगातार पूछताछ कर रही है। इस गिरफ्तारी के बाद जयपुर पुलिस लाइन में भी हड़कंप मच गया है, क्योंकि यह पहला मौका है जब किसी पूर्व CM की सुरक्षा में तैनात कर्मी पर इस तरह के गंभीर आरोप लगे हैं।
पुलिस लाइन से सुरक्षा गार्ड का चयन
जानकारी के मुताबिक, जयपुर पुलिस लाइन ने अशोक गहलोत के लिए सुरक्षा के तौर पर दो गार्ड उपलब्ध कराए थे, जिनमें से एक राजकुमार यादव थे। अब SOG यह जांच कर रही है कि क्या उनकी ड्यूटी के दौरान या उसके बाद इस फर्जीवाड़े से जुड़ी कोई और गतिविधि हुई थी।
पेपर लीक पर राजस्थान में बढ़ी सख्ती
राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक की घटनाएं लगातार सुर्खियों में रही हैं। सरकार और पुलिस विभाग ने कई बार ऐसे नेटवर्क को तोड़ने का दावा किया है, लेकिन इस घटना से साफ है कि यह समस्या अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।


