मनीषा शर्मा। राजस्थान में हुए SI पेपर लीक प्रकरण ने एक बार फिर भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मामले में अब तक कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, लेकिन सबसे बड़ा खुलासा तब हुआ जब राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर (PSO) राजकुमार यादव का नाम सामने आया। एसओजी (स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप) की जांच में यह स्पष्ट हुआ कि राजकुमार यादव ने अपने बेटे भरत यादव के दबाव में पैसे देकर प्रश्नपत्र खरीदा था, ताकि उसका बेटा एसआई बन सके।
बेटे के दबाव में PSO ने लिया गलत फैसला
जांच में सामने आया कि भरत यादव लगातार अपने पिता पर दबाव डाल रहा था कि उसे किसी भी तरह से एसआई की नौकरी हासिल करनी है। इसी दबाव में आकर PSO राजकुमार यादव ने अपने परिचित कुंदन कुमार से संपर्क किया और मोटी रकम देकर परीक्षा का पेपर खरीदा। लेकिन यहीं मामला नहीं थमा। पैसों का बोझ कम करने और अधिक लाभ कमाने के लिए राजकुमार ने इस पेपर को आगे भी बेच दिया।
दूध वाले और परिचितों को भी बेचा पेपर
एसओजी के अनुसार, राजकुमार यादव ने अपने दूध बेचने वाले को भी पेपर की जानकारी दी। दूध वाला, अपने बेटे रविन्द्र सैनी को परीक्षा में पास कराने के इरादे से, राजकुमार को पैसे देकर पेपर हासिल कर लिया। इतना ही नहीं, राजकुमार ने अपने परिचित सतेन्द्र को भी यह पेपर बेच दिया, जिससे वह और अधिक आर्थिक लाभ ले सके। इस तरह पेपर लीक का नेटवर्क और विस्तृत हो गया।
एसओजी की गिरफ्त में आरोपी
राजकुमार यादव और उसका बेटा भरत यादव वर्तमान में रिमांड पर हैं। पूछताछ में भरत ने यह स्वीकार किया कि उसने अपने पिता से पेपर मंगवाया और उसकी मदद से परीक्षा में पास भी हो गया। हालांकि, फिजिकल टेस्ट में वह असफल रहा। भरत का पहले से ही सतेन्द्र और रविन्द्र सैनी से परिचय था, जिससे यह पूरा अवैध लेनदेन आसान हो गया।
ट्रेनी SI को फरार कराने में भी भूमिका
मामले में एक और बड़ा खुलासा तब हुआ जब यह सामने आया कि पीएसओ राजकुमार यादव ने ट्रेनी एसआई रविन्द्र सैनी को फरार होने की सलाह दी। दरअसल, एसओजी ने सबसे पहले सतेन्द्र को गिरफ्तार किया, जिसके बाद उसने राजकुमार यादव का नाम लिया। इसके बाद एसओजी ने रविन्द्र और राजकुमार को पूछताछ के लिए बुलाया। लेकिन इस दौरान रविन्द्र ने राजकुमार को फोन कर आगे की रणनीति पूछी। राजकुमार ने उसे फरार होने की सलाह दी, जिसके बाद रविन्द्र पुलिस लाइन से गायब हो गया।
पुलिस की दबिश जारी
एसओजी के एडीजी वीके सिंह के अनुसार, पुलिस टीमों ने संभावित ठिकानों पर दबिश देनी शुरू कर दी है और जल्द ही रविन्द्र सैनी की गिरफ्तारी की जाएगी। फिलहाल मामले में कई परतें खुल रही हैं और यह अंदेशा है कि इसमें और भी लोग शामिल हो सकते हैं।
भर्ती परीक्षाओं पर बढ़ा अविश्वास
यह मामला केवल एक व्यक्ति या एक परीक्षा तक सीमित नहीं है। राजस्थान में पिछले कुछ वर्षों में पेपर लीक के कई मामले सामने आए हैं, जिससे युवाओं का सरकारी नौकरियों की चयन प्रक्रिया पर भरोसा डगमगाया है। एसओजी की जांच से यह स्पष्ट हो रहा है कि पेपर लीक केवल धन के लालच का मामला नहीं, बल्कि इसमें रिश्तेदार, परिचित और यहां तक कि प्रभावशाली पदों पर बैठे लोग भी शामिल हैं।
सख्त कार्रवाई की उम्मीद
जनता और अभ्यर्थियों की मांग है कि इस मामले में दोषियों को कड़ी सजा दी जाए, ताकि भविष्य में कोई भी इस तरह की धोखाधड़ी करने की हिम्मत न कर सके। साथ ही भर्ती परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था और भी मजबूत करने की जरूरत है, ताकि योग्य उम्मीदवारों का हक न छीना जा सके।


