जीवन कभी भी आसान नहीं होता, लेकिन अगर जज्बा हो तो हर अंधेरे में रोशनी की किरण जरूर मिलती है। कुछ ऐसी ही प्रेरक कहानी है श्वेता सिन्हा की, जिन्होंने बचपन से लेकर युवावस्था तक कई मुश्किल दौर देखे, लेकिन हर मोड़ पर खुद को संभाला और आज एक सफल प्रोफेशनल, लेखिका, मोटिवेशनल स्पीकर और रेकी मास्टर के रूप में नई पहचान बना चुकी हैं।
बचपन की चोट: 8 साल की उम्र में पिता को खोया
श्वेता के जीवन का सबसे बड़ा आघात बचपन में ही आया, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया। मात्र आठ साल की उम्र में उन्होंने वो दुख झेला, जिसने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। बचपन मुस्कान से ज्यादा खामोशी और मजबूती का प्रतीक बन गया।
शैक्षणिक असफलता और आत्म-संदेह
किशोरावस्था में श्वेता बीकॉम की परीक्षा में फेल हो गईं। यह घटना उनके आत्मविश्वास को झकझोरने वाली थी। समाज की बातें और खुद की निराशा ने उन्हें घेर लिया, लेकिन उनके अंदर की एक आवाज़ कहती रही—”तुम इससे कहीं ज्यादा हो।”
टूटी सगाई और बदले जीवन के मायने
जब उनकी शादी तय होकर टूट गई, तो लगा मानो जिंदगी रुक गई हो। लेकिन वक्त ने दिखाया कि यह घटना उनके लिए एक वरदान थी, क्योंकि इसके बाद उनकी शादी ऐसे व्यक्ति से हुई, जिसने उन्हें पूरी तरह से सपोर्ट किया और जीवन को नई दिशा दी।
संघर्ष से शुरुआत, फिर उठान की ओर
शादी के बाद श्वेता ने फिर से पढ़ाई शुरू करने का साहसिक फैसला लिया और MBA पूरा किया। इसके बाद उन्होंने माँ बनने के लिए करियर को रोक दिया, लेकिन मातृत्व के साथ उन्होंने खुद को फिर से गढ़ना शुरू किया—एक नई आदत, एक नया कौशल, और एक नई ऊर्जा के साथ।
आज की श्वेता सिन्हा
✅ 14 साल से अधिक का अनुभव रखने वाली सेल्स और कस्टमर सक्सेस प्रोफेशनल हैं।
✅ एक प्रेरणादायक सेल्फ-ग्रोथ पुस्तक की प्रकाशित लेखिका हैं।
✅ एक प्रमाणित रेकी मास्टर और हीलर हैं।
✅ एक मोटिवेशनल स्पीकर हैं जो दूसरों को अपनी कहानी से प्रेरित करती हैं।
✅ एक उभरती हुई सॉफ्ट स्किल्स ट्रेनर और इमेज कंसल्टेंट बनने की राह पर हैं।
जीवन से सीखे सबक
- दर्द सबसे बड़ा शिक्षक होता है।
- हर असफलता, एक नई शुरुआत की तैयारी होती है।
- आत्म-विश्वास से कोई भी कहानी फिर से लिखी जा सकती है।
श्वेता का मानना है कि अगर उनकी कहानी किसी एक भी टूटे हुए दिल को उम्मीद दे सके, तो यही उनकी सबसे बड़ी सफलता होगी।