शोभना शर्मा। राजस्थान में चर्चित रीट पेपर लीक प्रकरण से जुड़े ईडी मामले में आरोपी राजू ईराम को बड़ा झटका लगा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका खारिज कर दी है। जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने यह आदेश पारित करते हुए माना कि मामले की गंभीरता और आरोपों की प्रकृति को देखते हुए जमानत देना उचित नहीं है। कोर्ट के इस फैसले के बाद एक बार फिर रीट पेपर लीक प्रकरण चर्चा में आ गया है।
ईडी ने 19 जुलाई 2024 को किया था गिरफ्तार
प्रवर्तन निदेशालय की जयपुर टीम ने रीट-2021 पेपर लीक मामले में मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े आरोपों के तहत राजू ईराम को 19 जुलाई 2024 को गिरफ्तार किया था। इससे पहले वह अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल में बंद था। ईडी की जांच में सामने आया कि पेपर लीक के इस नेटवर्क में बड़े पैमाने पर अवैध लेनदेन हुआ था, जिसमें राजू ईराम की अहम भूमिका बताई गई है।
5 करोड़ रुपये में सौदे का आरोप
ईडी की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राजू ईराम पर रीट पेपर लीक के लिए 5 करोड़ रुपये में सौदा करने का आरोप है। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि इस सौदे के तहत करीब एक करोड़ रुपये का ट्रांजेक्शन भी किया गया था। एजेंसी का कहना है कि यह रकम अलग-अलग माध्यमों से इधर-उधर की गई, जिससे यह मनी लॉन्ड्रिंग का मामला बनता है। इन्हीं तथ्यों के आधार पर ईडी ने जमानत का विरोध किया।
राज्य के कई थानों में दर्ज हैं एफआईआर
राजू ईराम मूल रूप से जालोर जिले के भीनमाल का रहने वाला है। उसे वर्ष 2022 में जालोर पुलिस ने बीकानेर से गिरफ्तार किया था। इसके बाद स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने उससे गहन पूछताछ की और उसे जेल भेज दिया गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, राजू ईराम के खिलाफ एसओजी सहित राज्य के अलग-अलग थानों में तीन दर्जन से अधिक एफआईआर दर्ज हैं। इससे उसकी आपराधिक संलिप्तता का दायरा काफी व्यापक माना जा रहा है।
रीट-2021 परीक्षा और समिति का गठन
रीट-2021 परीक्षा का आयोजन 26 सितंबर 2021 को हुआ था। इस परीक्षा के लिए राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से एक राज्य स्तरीय समिति का गठन किया गया था। इस समिति में सेवानिवृत्त सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रदीप पाराशर भी सदस्य थे। आरोप है कि समिति की जिम्मेदारियों का दुरुपयोग करते हुए बिना किसी लिखित आदेश के एक सहायक राम कृपाल मीणा को नियुक्त किया गया।
स्ट्रांग रूम तक पहुंच और पेपर चोरी
जांच में सामने आया कि राम कृपाल मीणा को शिक्षा संकुल स्थित उस स्ट्रांग रूम तक पहुंच मिल गई थी, जहां रीट-2021 के प्रश्न पत्र सुरक्षित रखे गए थे। आरोप है कि इसी पहुंच का दुरुपयोग कर प्रश्न पत्र की चोरी की गई। पुलिस के अनुसार, इस पूरे घटनाक्रम में डॉ. प्रदीप पाराशर की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
प्रो. पाराशर और राम कृपाल की गिरफ्तारी
पुलिस ने पहले सहायक राम कृपाल मीणा को गिरफ्तार किया। पूछताछ के दौरान उसने कई अहम जानकारियां दीं, जिनके आधार पर डॉ. प्रदीप पाराशर को भी गिरफ्तार किया गया। आगे की जांच में पेपर लीक नेटवर्क की कड़ियां राजू ईराम तक पहुंचीं। इसके बाद उसे भी इस मामले में आरोपी बनाया गया और गिरफ्तार किया गया।
हाईकोर्ट में जमानत की दलीलें
राजू ईराम की ओर से हाईकोर्ट में जमानत याचिका दायर कर यह तर्क दिया गया कि वह लंबे समय से जेल में है और जांच में सहयोग कर रहा है। वहीं, ईडी ने कोर्ट को बताया कि आरोपी प्रभावशाली है और बाहर आने पर सबूतों से छेड़छाड़ या गवाहों को प्रभावित कर सकता है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया।
जांच जारी, आगे हो सकती है कार्रवाई
हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि रीट पेपर लीक मामले में जांच एजेंसियां किसी भी स्तर पर ढील देने के मूड में नहीं हैं। ईडी और अन्य एजेंसियां अभी भी इस नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में इस प्रकरण में और भी खुलासे हो सकते हैं और नए आरोपियों पर कार्रवाई संभव है।


