शोभना शर्मा। राजस्थान के बाड़मेर जिले से एक ऐसी शर्मनाक घटना सामने आई है जिसने पूरे शिक्षा जगत को झकझोर कर रख दिया है। हापो की ढाणी उच्च माध्यमिक विद्यालय में कार्यरत शिक्षक मदन लाल को शराब के नशे में स्कूल आने और एक छात्रा के साथ अनुचित व्यवहार करने के आरोप में निलंबित कर दिया गया है। यह मामला न केवल शिक्षकों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि सरकारी स्कूलों में अनुशासन की स्थिति को भी उजागर करता है।
नशे में धुत शिक्षक बरामदे में पड़े मिले
जानकारी के अनुसार, शिक्षक मदन लाल दोपहर के समय स्कूल पहुंचे तो वे शराब के नशे में लथपथ थे। वे सीधे कक्षा में जाने की बजाय बरामदे में लेट गए। उनका यह हाल देखकर छात्राएं हैरान रह गईं। स्कूल परिसर में मौजूद अन्य शिक्षकों और छात्रों ने जब यह दृश्य देखा तो असहज माहौल बन गया। छात्राओं में भय और असुरक्षा की भावना फैल गई।
छात्रा की कॉपी पर लिखा मोबाइल नंबर, कहा- “रात को फोन करना”
इस बीच, मदन लाल ने 10वीं कक्षा की एक छात्रा की कॉपी चेक करते हुए उसमें अपना मोबाइल नंबर लिख दिया। इसके साथ ही उन्होंने छात्रा से कहा — “रात को फोन करना, बात करनी है।” छात्रा यह सुनकर घबरा गई और तुरंत अपनी सहेलियों के पास पहुंची। उसने पूरी बात उन्हें बताई। सहेलियां भी स्तब्ध रह गईं और सभी ने मिलकर प्रिंसिपल को इसकी जानकारी दी।
प्रिंसिपल की तत्परता से खुला मामला
स्कूल की प्रिंसिपल को जब यह गंभीर जानकारी मिली तो उन्होंने बिना देर किए इस पूरे मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी। बताया जा रहा है कि मदन लाल के खिलाफ पहले भी अनुशासनहीनता और शराब सेवन की शिकायतें दर्ज की गई थीं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई थी। इस बार छात्रा की हिम्मत और प्रिंसिपल की सतर्कता ने सबको सच दिखा दिया। शिक्षा विभाग ने तत्काल प्रभाव से मदन लाल को निलंबित कर दिया है और उनका मुख्यालय बदलकर सीबीईओ कार्यालय सेड़वा कर दिया गया है।
पुरानी आदतें बनीं अब सजा की वजह
सूत्रों के अनुसार, शिक्षक मदन लाल की यह हरकत पहली बार नहीं हुई है। वे लंबे समय से शराब के आदी हैं और कई बार स्कूल में नशे की हालत में आने की शिकायतें मिल चुकी हैं। कई शिक्षक और अभिभावक भी पहले इस मामले में आपत्ति दर्ज करा चुके थे, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस बार मामला छात्रा से जुड़ा होने और मीडिया में आने के बाद शिक्षा विभाग को मजबूरन कार्रवाई करनी पड़ी।
शिक्षा विभाग की भूमिका पर उठे सवाल
मामले के बाद शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि विभाग ने पहले की शिकायतों पर कार्रवाई क्यों नहीं की। अगर समय रहते कदम उठाए जाते तो इस तरह की शर्मनाक स्थिति से बचा जा सकता था। कई अभिभावकों ने जिला शिक्षा अधिकारी से दोषी शिक्षक पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है ताकि भविष्य में कोई शिक्षक इस तरह की हरकत करने की हिम्मत न कर सके।
अभिभावकों की नाराज़गी और मांग
इस घटना के बाद अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि सरकारी स्कूलों में अनुशासन और नैतिकता की स्थिति लगातार बिगड़ रही है। जब शिक्षक ही छात्रों के सामने गलत उदाहरण पेश करेंगे, तो शिक्षा का स्तर कैसे सुधरेगा? अभिभावक संघ ने यह भी मांग की है कि ऐसे मामलों में सिर्फ निलंबन नहीं बल्कि सेवा से बर्खास्तगी और आपराधिक मामला दर्ज किया जाना चाहिए।
महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक शिक्षक की गलती नहीं, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र के लिए चेतावनी है। जब स्कूल परिसर, जो सबसे सुरक्षित जगह मानी जाती है, वहां छात्राओं को असुरक्षा महसूस हो, तो यह स्थिति चिंताजनक है। शिक्षा विभाग को चाहिए कि वह अपने स्कूलों में सख्त अनुशासन लागू करे, नशे और अनुशासनहीनता के मामलों पर जीरो टॉलरेंस नीति अपनाए और शिक्षकों की नियमित निगरानी करे।
जांच और आगे की कार्रवाई
सीबीईओ सेड़वा ने पुष्टि की है कि मदन लाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है और विभागीय जांच के आदेश दिए गए हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो उनके खिलाफ सेवा समाप्ति और आपराधिक कार्रवाई दोनों की सिफारिश की जाएगी।


