देश के पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बीच 4 मई को भारतीय शेयर बाजार ने मजबूती के साथ कारोबार समाप्त किया। निवेशकों के सकारात्मक रुख और बाजार में बनी स्थिरता के कारण प्रमुख सूचकांकों में उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की गई। कारोबारी सत्र के अंत में BSE Sensex 355 अंकों की तेजी के साथ 77,269 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि Nifty 50 121 अंक चढ़कर 24,119 के स्तर पर पहुंच गया।
विशेषज्ञों के अनुसार, चुनावी नतीजों के बीच निवेशकों में स्थिर सरकार की उम्मीद और आर्थिक नीतियों को लेकर भरोसा बढ़ा है, जिससे बाजार में खरीदारी का माहौल बना। इस दिन के कारोबार में विभिन्न सेक्टरों में अलग-अलग रुझान देखने को मिले। रियल्टी, मेटल, फार्मा और ऑटो सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक तेजी रही, जो इस बात का संकेत है कि निवेशक इन क्षेत्रों में भविष्य की संभावनाओं को लेकर आशावादी हैं।
दूसरी ओर, आईटी, सरकारी बैंक और मीडिया सेक्टर के शेयरों में दबाव देखने को मिला। इन क्षेत्रों में बिकवाली का रुख रहा, जिससे यह स्पष्ट होता है कि निवेशक फिलहाल इन सेक्टरों में सतर्कता बरत रहे हैं। बाजार के जानकारों का मानना है कि वैश्विक संकेतों और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों का भी इन सेक्टरों पर असर पड़ा है।
व्यक्तिगत शेयरों की बात करें तो Adani Ports और Hindustan Unilever के शेयरों में लगभग 5 प्रतिशत तक की तेजी दर्ज की गई। इन कंपनियों में आई तेजी ने बाजार की कुल मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान दिया। निवेशकों ने इन शेयरों में जमकर खरीदारी की, जिससे इनका प्रदर्शन अन्य कंपनियों की तुलना में बेहतर रहा।
भारतीय बाजार के साथ-साथ एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5 प्रतिशत से अधिक की तेजी के साथ बंद हुआ, जो वैश्विक निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है। जापान का निक्केई और हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स भी बढ़त के साथ बंद हुए। एशियाई बाजारों में आई यह तेजी भारतीय बाजार के लिए भी एक सकारात्मक संकेत रही, जिसने निवेशकों के मनोबल को मजबूत किया।
हालांकि, अमेरिकी बाजारों का रुख मिला-जुला रहा। 1 मई को हुए कारोबार में डाउ जोन्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जबकि नैस्डैक और एसएंडपी 500 में मामूली बढ़त देखने को मिली। वैश्विक स्तर पर इस तरह के मिश्रित संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार ने मजबूती दिखाई, जो घरेलू कारकों की अहमियत को दर्शाता है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) और घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की गतिविधियों ने भी बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पिछले सात दिनों में एफआईआई ने 12,620 करोड़ रुपये के शेयर बेचे हैं, जो बाजार के लिए एक नकारात्मक संकेत माना जाता है। वहीं, डीआईआई ने इस दौरान खरीदारी जारी रखी और बाजार को सहारा दिया। यह रुझान बताता है कि घरेलू निवेशकों का भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।
पिछले कारोबारी सत्र पर नजर डालें तो 30 अप्रैल को बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। उस दिन सेंसेक्स 583 अंक गिरकर 76,913 के स्तर पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी 180 अंकों की गिरावट के साथ 23,998 पर आ गया था। उस समय आईटी सेक्टर में खरीदारी रही थी, जबकि मेटल और सरकारी बैंकिंग शेयरों में दबाव देखने को मिला था।
इस पृष्ठभूमि में 4 मई को आई तेजी को एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है। बाजार के जानकारों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद यदि राजनीतिक स्थिरता बनी रहती है और सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाती है, तो आने वाले समय में बाजार में और मजबूती देखने को मिल सकती है। इसके अलावा, निवेशकों की नजर अब वैश्विक आर्थिक संकेतकों, महंगाई दर और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर भी बनी हुई है। यदि ये कारक अनुकूल रहते हैं, तो भारतीय शेयर बाजार में निवेश का माहौल और बेहतर हो सकता है।


