महर्षि दयानंद सरस्वती (MDS) विश्वविद्यालय, अजमेर ने स्नातक स्तर की सेमेस्टर परीक्षाओं को लेकर महत्वपूर्ण और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये नियम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अंतर्गत लागू किए जा रहे हैं, जिनका उद्देश्य परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, अनुशासित और समयबद्ध बनाना है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि अब छात्रों को अनिश्चित काल तक डिग्री पूरी करने की छूट नहीं मिलेगी और हर सेमेस्टर में सीमित अवसर ही दिए जाएंगे। विश्वविद्यालय की ओर से यह निर्देश सभी संबद्ध कॉलेजों के प्रिंसिपलों और विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य रूप से लागू होंगे।
NEP के तहत हर सेमेस्टर में सिर्फ तीन अवसर
परीक्षा नियंत्रक डॉ. एस.के. टेलर ने जानकारी देते हुए बताया कि नई शिक्षा नीति के तहत प्रत्येक छात्र को किसी भी सेमेस्टर के सभी विषयों को पास करने के लिए कुल तीन मौके ही दिए जाएंगे। इनमें एक मुख्य परीक्षा और दो बैकलॉग या पूरक परीक्षाएं शामिल होंगी। यदि कोई छात्र इन तीनों अवसरों में भी किसी विषय को पास नहीं कर पाता है, तो उसे उस पूरे सेमेस्टर के सभी विषयों में दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। यानी केवल एक विषय नहीं, बल्कि पूरे सेमेस्टर की पुनः परीक्षा देनी पड़ेगी।
ग्रेजुएशन डिग्री के लिए अधिकतम 6 साल की सीमा
MDS यूनिवर्सिटी ने यह भी साफ कर दिया है कि तीन साल की स्नातक डिग्री को अब अधिकतम 6 साल की अवधि में ही पूरा करना होगा। इस अवधि में ही सभी सेमेस्टर, बैकलॉग और पुनः रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि इस नियम से छात्रों में समय पर पढ़ाई पूरी करने की जिम्मेदारी बढ़ेगी और डिग्री को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी।
6th सेमेस्टर में बकाया पेपर की अनुमति नहीं
नए नियमों के तहत एक बड़ा बदलाव यह किया गया है कि किसी भी छात्र को छठे सेमेस्टर में तभी रजिस्ट्रेशन की अनुमति दी जाएगी, जब वह पहले सेमेस्टर से लेकर पांचवें सेमेस्टर तक के सभी विषयों में पूर्ण रूप से उत्तीर्ण हो। अर्थात अब छठे सेमेस्टर में किसी भी पिछले सेमेस्टर का बकाया या बैकलॉग पेपर ले जाने की अनुमति नहीं होगी। यदि छात्र पांचवें सेमेस्टर तक सभी विषय पास नहीं करता है, तो उसे छठे सेमेस्टर में प्रवेश नहीं मिलेगा।
11 फरवरी से शुरू होंगी मुख्य परीक्षाएं
महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की मुख्य परीक्षा-2026 आगामी 11 फरवरी से प्रारंभ होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय ने सभी परीक्षा केंद्र अधीक्षकों और संबद्ध कॉलेजों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। परीक्षा नियंत्रक डॉ. सुनील कुमार टेलर ने बताया कि परीक्षा संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी केंद्रों पर सख्त निगरानी रखी जाएगी।
नकल पर सख्त कार्रवाई के निर्देश
विश्वविद्यालय ने नकल और अनुचित साधनों के खिलाफ भी कड़े निर्देश जारी किए हैं। यदि कोई छात्र परीक्षा के दौरान नकल या अन्य अनुचित साधनों का उपयोग करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसकी पूरी जानकारी तुरंत विश्वविद्यालय को भेजनी होगी। इस जानकारी में छात्र का नाम, रोल नंबर, विषय, परीक्षा पाली और पूरा पता शामिल करना अनिवार्य होगा। साथ ही, नकल के मामलों में दोनों उत्तर पुस्तिकाएं परीक्षा समाप्त होते ही रजिस्टर्ड डाक से विश्वविद्यालय भेजनी होंगी।
नकल रोकथाम अधिनियम के तहत एफआईआर जरूरी
डॉ. सुनील कुमार टेलर ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक परीक्षाओं में नकल रोकथाम अधिनियम, 1992 के तहत ऐसे मामलों में संबंधित पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराना भी अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखना और ईमानदार छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करना है।
छात्रों और कॉलेजों को सतर्क रहने की अपील
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सभी छात्रों और कॉलेज प्रशासन से अपील की है कि वे नए परीक्षा नियमों को गंभीरता से लें और समय पर सभी प्रक्रियाएं पूरी करें। नियमों की अनदेखी करने पर छात्रों को शैक्षणिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।


