मनीषा शर्मा। भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित बीज विधेयक 2025 पर मंगलवार को पंत कृषि भवन के सभाकक्ष में महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने की। इस दौरान कृषि और उद्यानिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ विधेयक के विभिन्न प्रावधानों, उनके व्यावहारिक प्रभाव और किसानों को होने वाले प्रत्यक्ष लाभों पर विस्तार से चर्चा हुई।
डॉ. किरोड़ी लाल ने कहा कि यह विधेयक किसानों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा और उन्हें गुणवत्तापूर्ण व प्रमाणिक बीज उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इसे कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और दीर्घकालिक सुधार लाने वाला दूरदर्शी कानून बताया। उनके अनुसार, इस विधेयक के लागू होने से प्रदेश में पैदावार बढ़ेगी, लागत घटेगी और किसानों की आय में सुधार होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है, और बीज विधेयक 2025 खेती को अधिक संगठित और सुरक्षित बनाने की दिशा में निर्णायक कदम साबित होगा। इससे किसानों को भरोसेमंद बीज मिलने के साथ-साथ बाजार में मिलावटखोरी और घटिया गुणवत्ता पर सख्त रोक लगेगी।
मिलावटखोरी पर सख्ती और कानूनी सुरक्षा
बैठक में यह महत्वपूर्ण तथ्य भी सामने आया कि पिछले एक वर्ष में कृषि मंत्री द्वारा उर्वरक, बीज और कीटनाशक निर्माण तथा बिक्री इकाइयों की व्यापक जांच करवाई गई, जिनमें कई अनियमितताएं पाई गईं। किसानों की समस्याओं को उन्होंने स्वयं गांव-गांव जाकर सुना और समझा।
इन्हीं अनुभवों के आधार पर उन्होंने केंद्र सरकार को सुझाव भेजा कि बीज में मिलावट करने वालों के खिलाफ सख्त कानून लाया जाए और किसानों को मजबूत कानूनी सुरक्षा दी जाए। केंद्र सरकार ने इन सुझावों को स्वीकार करते हुए सीड बिल 2025 तैयार किया। साथ ही बताया गया कि जल्द ही उर्वरक और पेस्टिसाइड से संबंधित नए विधेयक भी लाए जाएंगे, ताकि कृषि इनपुट की गुणवत्ता को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सके।
अमरूद महोत्सव और कृषि तकनीकी मेला
बैठक में सवाई माधोपुर में 18–19 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले अमरूद महोत्सव और उन्नत कृषि तकनीकी मेले की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मेले में आने वाले किसानों के ठहरने, भोजन और परिवहन की बेहतरीन व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
उन्होंने अमरूद की विभिन्न किस्मों, प्रोसेसिंग तकनीकों और उससे बनने वाले उत्पादों के बारे में जानकारी ली। उद्देश्य यह है कि अमरूद को केवल फल नहीं, बल्कि जिला-गौरव, आजीविका और उद्यमिता के प्रतीक के रूप में स्थापित किया जाए। वर्तमान में सवाई माधोपुर जिले में लगभग 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 20 हजार से अधिक किसान अमरूद की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं। अमरूद कम समय में उत्पादन देने वाली, पोषण-समृद्ध और बहुउपयोगी फसल है, जो किसानों के लिए स्थिर आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकती है।
सफलता की कहानियों का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान डॉ. किरोड़ी लाल ने पंत कृषि भवन में समन्वित कृषि प्रणाली और जैविक खेती से समृद्ध किसानों की सफलता की कहानियों पर आधारित पुस्तिकाओं का विमोचन भी किया। इन पुस्तिकाओं का उद्देश्य अन्य किसानों को प्रेरित करना और उन्हें नई तकनीकों व टिकाऊ खेती के मॉडल से जोड़ना है।
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी
बैठक में प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी मंजू राजपाल, आयुक्त कृषि चिन्मयी गोपाल, आयुक्त उद्यानिकी शुभम चौधरी, जैविक बीज प्रमाणिकरण संस्था के निदेशक के.सी. मीणा, अतिरिक्त निदेशक कृषि गोपाल लाल और एस.एस. शेखावत सहित कई विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। सवाई माधोपुर से भी कृषि और उद्यानिकी अधिकारी बैठक में शामिल हुए। कुल मिलाकर, बीज विधेयक 2025 को लेकर हुई यह समीक्षा बैठक न केवल नीति-निर्माण की प्रक्रिया को मजबूत बनाती है, बल्कि यह संकेत भी देती है कि आने वाले समय में कृषि क्षेत्र अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और किसान-केंद्रित होने जा रहा है।

