मनीषा शर्मा। राजस्थान में स्कूली और कॉलेज छात्रों की सुरक्षा को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। आए दिन सड़क पर दौड़ती ऐसी स्कूल बसें देखने को मिलीं, जिनके पास न तो वैध परमिट था और न ही फिटनेस टेस्ट कराया गया था। कई हादसों ने स्थिति की गंभीरता को और उजागर कर दिया। अब राज्य सरकार ने इस समस्या का ठोस समाधान निकालने की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के निर्देश पर राजस्थान परिवहन विभाग ने नई योजना की शुरुआत की है, जिसका नाम है ‘सुरक्षित सफर योजना’।
यह योजना राज्य के सभी स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। इसके तहत बसों के संचालन से लेकर ड्राइवर और सहायकों की जिम्मेदारी तक हर पहलू को सख्त मानकों के दायरे में लाया जाएगा।
योजना की आधिकारिक शुरुआत और बैठक
परिवहन सचिव शुचि त्यागी के निर्देशन में जयपुर के झालाना स्थित आरटीओ कार्यालय में इस योजना पर अहम बैठक बुलाई गई। बैठक में जयपुर शहर के सभी स्कूल और कॉलेज संचालकों के साथ-साथ बस ऑपरेटर्स को बुलाया गया। इस दौरान ‘सुरक्षित सफर योजना’ की रूपरेखा पर विस्तार से चर्चा की गई और सभी को निर्देश दिए गए कि बच्चों की सुरक्षा से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
स्कूल बसों के लिए नए नियम अनिवार्य
इस योजना का सबसे बड़ा उद्देश्य यह है कि हर बस सुरक्षा मानकों का पालन करे। सरकार ने साफ कर दिया है कि अब कोई भी बस बिना परमिट और फिटनेस टेस्ट के सड़कों पर नहीं दौड़ेगी। नए नियमों के तहत: हर बस के पास विशेष परमिट, वैध पंजीकरण, फिटनेस सर्टिफिकेट, बीमा और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र होना अनिवार्य होगा। बस के आगे और पीछे बड़े अक्षरों में “स्कूल बस” लिखा होना चाहिए। साथ ही संबंधित स्कूल का नाम भी साफ-साफ अंकित होना ज़रूरी होगा। बस के अंदर वाहन मालिक और चालक का नाम, मोबाइल नंबर और अन्य विवरण स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करना होगा।
तीन चरणों में लागू होगी योजना
राजस्थान सरकार ने इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का निर्णय लिया है ताकि बस ऑपरेटर्स और स्कूल प्रशासन को तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
पहला चरण (1 से 7 सितम्बर 2025): इस दौरान जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
दूसरा चरण (8 से 15 सितम्बर 2025): सभी बसों की जांच होगी और दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।
तीसरा चरण (16 से 30 सितम्बर 2025): वाहनों का अंतिम पंजीकरण और सत्यापन कार्य पूरा किया जाएगा।
इस तरह सितंबर महीने के अंत तक यह सुनिश्चित कर दिया जाएगा कि राज्य की सभी स्कूल और कॉलेज बसें सुरक्षा मानकों पर खरी उतरें।
तकनीकी उपकरणों से होगी निगरानी
बच्चों की सुरक्षा को और मज़बूत करने के लिए सरकार ने बसों में आधुनिक तकनीकी उपकरण लगाने का फैसला किया है। इन उपकरणों से न केवल हादसों को रोका जा सकेगा बल्कि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई भी हो पाएगी।
GPS सिस्टम: बस की लोकेशन हर समय ट्रैक की जा सकेगी।
CCTV कैमरे: सभी कैमरे 4G तकनीक से जुड़े होंगे। स्कूल प्रशासन बस की लाइव निगरानी कर सकेगा।
पैनिक बटन: किसी भी आपात स्थिति में ड्राइवर या स्टाफ इसे दबा सकता है। 2 से 5 सेकंड में बस की लोकेशन कंट्रोल रूम तक पहुंच जाएगी और नज़दीकी पुलिस वाहन तुरंत मौके पर रवाना होगा।
स्पीड गवर्नर: बस की गति पर नियंत्रण रखने के लिए लगाया जाएगा, जिससे ओवरस्पीडिंग रोकी जा सके।
ड्राइवर और सहायकों की होगी सख्त जांच
योजना के तहत सिर्फ वाहन ही नहीं, बल्कि ड्राइवर और सहायकों पर भी सख्त नियम लागू होंगे। सभी चालकों और सहायकों का पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य होगा। उन्हें चरित्र प्रमाण पत्र देना होगा। आपराधिक पृष्ठभूमि वाले किसी भी व्यक्ति को बच्चों से संपर्क की अनुमति नहीं होगी। यह कदम इसलिए अहम है ताकि बच्चों की यात्रा केवल सड़क पर ही नहीं बल्कि व्यक्तिगत स्तर पर भी सुरक्षित हो।
उल्लंघन करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई
परिवहन विभाग ने साफ किया है कि यदि कोई वाहन बिना परमिट या नियमों का पालन किए स्कूल बस के रूप में संचालित होता पाया गया तो उस पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी। इसमें बस का संचालन बंद करना और कानूनी दंड दोनों शामिल हो सकते हैं।