शोभना शर्मा। राजस्थान में कोरोना संक्रमण एक बार फिर से चिंता का विषय बन गया है। राज्य के पाली जिले में कोविड-19 से दूसरी मौत की पुष्टि हुई है। मृतक एक 52 वर्षीय पुरुष था, जिसकी कोरोना रिपोर्ट मृत्यु के बाद पॉजिटिव आई। वहीं पाली के एक सरकारी अस्पताल में एक नर्सिंगकर्मी भी संक्रमित पाया गया है। इसके चलते जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर आ गए हैं।
अस्पताल में भर्ती थे संक्रमित मरीज
पाली के बांगड़ हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. एचएम चौधरी ने जानकारी देते हुए बताया कि मृतक व्यक्ति को 19 मई को अस्पताल में भर्ती किया गया था। करीब एक सप्ताह तक इलाज के बाद मरीज की स्थिति गंभीर होने पर उसे जोधपुर रेफर किया गया। जोधपुर में भी इलाज चलने के बाद परिजन उसे पुनः बांगड़ हॉस्पिटल में वापस ले आए।
इस बीच, 4 जून को मरीज का सैंपल कोरोना जांच के लिए भेजा गया, लेकिन 5 जून को ही उसकी मृत्यु हो गई। अगले दिन यानी 6 जून को उसकी रिपोर्ट पॉजिटिव आई।
यह घटना स्वास्थ्य सेवाओं और संक्रमण की निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।
नर्सिंग स्टाफ भी हुआ संक्रमित
इस मामले के साथ ही एक और नर्सिंगकर्मी के कोरोना संक्रमित पाए जाने से स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया है। अधिकारी अब संपर्क में आए सभी लोगों की पहचान कर रहे हैं और संक्रमितों की ट्रैकिंग और टेस्टिंग का कार्य तेज कर दिया गया है। अस्पतालों में सतर्कता बढ़ा दी गई है और स्टाफ को सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्ती से पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।
JN.1 वैरिएंट का बढ़ता खतरा
राजस्थान में सामने आए मामलों के पीछे JN.1 वैरिएंट को मुख्य रूप से जिम्मेदार माना जा रहा है। यह वैरिएंट ओमिक्रॉन के BA.2.86 सब-वैरिएंट का स्ट्रेन है, जिसकी पहचान पहली बार अगस्त 2023 में हुई थी। दिसंबर 2023 में WHO ने इसे ‘वैरिएंट ऑफ इंटरेस्ट’ घोषित किया।
इस स्ट्रेन में लगभग 30 म्यूटेशन्स पाए गए हैं, जो शरीर की इम्यूनिटी को कमजोर करने की क्षमता रखते हैं। अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, JN.1 अन्य वैरिएंट्स की तुलना में अधिक तेजी से फैलता है, हालांकि इसके लक्षण आमतौर पर गंभीर नहीं होते।
लक्षण और खतरे
JN.1 वैरिएंट के लक्षणों में बुखार, गले में खराश, थकान, खांसी, सिरदर्द, और बदन दर्द शामिल हो सकते हैं। कुछ मामलों में लक्षण एक हफ्ते या उससे अधिक समय तक बने रहते हैं, जो ‘लॉन्ग कोविड’ का संकेत हो सकते हैं – यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें कोविड-19 के लक्षण ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक बने रहते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की सख्ती
राज्य सरकार ने सभी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को कोरोना संक्रमण की संभावनाओं को लेकर सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। संक्रमितों के संपर्क में आए लोगों की पहचान, सैंपलिंग, और आइसोलेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी में कोविड जैसे लक्षण दिखें, तो वे तुरंत जांच करवाएं और भीड़भाड़ वाले इलाकों में मास्क पहनें।