जैसलमेर में 15 करोड़ साल पुराने डायनासोर के फुटप्रिंट चोरी: लापरवाही का शिकार हुआ विज्ञान

जैसलमेर: राजस्थान के जैसलमेर जिले में स्थित थइयात गांव के पास से 15 करोड़ साल पुराने डायनासोर के दो फुटप्रिंट चोरी होने का मामला सामने आया है। यह घटना वैज्ञानिकों और इतिहास प्रेमियों के लिए एक बड़ा झटका है।

2014 में हुई थी खोज:

2014 में, इंटरनेशनल ग्रुप ऑफ साइंटि के वैज्ञानिकों ने जैसलमेर में डायनासोर के अस्तित्व के प्रमाण खोजने के लिए एक अभियान शुरू किया था। इस अभियान के दौरान, वैज्ञानिकों को थइयात गांव के पास दो फुटप्रिंट मिले थे। इन फुटप्रिंटों को मार्किंग कर सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया था।

प्रशासन की लापरवाही:

हालांकि, वैज्ञानिकों का दल जब दूसरी बार जैसलमेर आया तो उन्हें एक फुटप्रिंट गायब मिला। इसकी सूचना प्रशासन को दी गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन, दूसरा फुटप्रिंट भी चोरी हो गया।

महत्वपूर्ण खोज:

वैज्ञानिकों के अनुसार, जैसलमेर में मिले डायनासोर के फुटप्रिंट बहुत महत्वपूर्ण थे। ये फुटप्रिंट 15 करोड़ साल पुराने थे और इयुब्रोनेट्स ग्लेनेरोंसेंसिस थेरेपॉड डायनासोर के थे। यह डायनासोर 1 से 3 मीटर ऊंचा और 5 से 7 मीटर चौड़ा था।

अन्य देशों में भी मिले हैं ऐसे निशान:

इस तरह के डायनासोर के फुटप्रिंट पहले फ्रांस, पोलैंड, स्लोवाकिया, इटली, स्पेन, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका में भी मिले हैं। भारत में डायनासोर के जीवाश्म कच्छ बेसिन और जैसलमेर बेसिन में मिलने की संभावनाएं जताई जाती रही हैं।

प्रोफेसर डीके पांडे का बयान:

इस मामले पर प्रोफेसर डीके पांडे ने कहा, “प्रशासन की उदासीनता के कारण यह महत्वपूर्ण खोज लापरवाही का शिकार हो गई। यह जियो हेरिटेज और विज्ञान के लिए एक बड़ा नुकसान है।”

अंतरराष्ट्रीय महत्व:

यह खोज वैज्ञानिकों के लिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि यह दर्शाता है कि डायनासोर भारत में भी रहते थे। इस खोज से वैज्ञानिकों को डायनासोर के विकास और विलुप्त होने के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने में मदद मिल सकती थी।

जांच की मांग:

वैज्ञानिकों ने इस मामले की जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि चोरों को पकड़ा जाना चाहिए और फुटप्रिंटों को बरामद किया जाना चाहिए।

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