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AEN ऑफिस में करोड़ों का घोटाला? किसानों के फर्जी कनेक्शन और बिलिंग का खुलासा

AEN ऑफिस में करोड़ों का घोटाला? किसानों के फर्जी कनेक्शन और बिलिंग का खुलासा

मनीषा शर्मा। राजस्थान में जोधपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (JDVVNL) के भीनमाल सहायक अभियंता (AEN) कार्यालय से जुड़ा करोड़ों रुपये का गंभीर घोटाला सामने आया है। किसानों द्वारा बिजली कनेक्शन के लिए जमा कराई गई डिमांड राशि विभागीय रिकॉर्ड से गायब बताई जा रही है, जबकि उन्हीं कनेक्शनों पर ट्रांसफार्मर लगाकर नियमित बिल जारी हो रहे हैं। इस पूरे मामले ने विभागीय पारदर्शिता और सिस्टम की विश्वसनीयता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

किसानों की जमा राशि रिकॉर्ड में नहीं, फिर भी कनेक्शन चालू

आरोप यह है कि ठेकेदार ने अधिकारियों की मिलीभगत से डिमांड राशि विभागीय खाते में जमा किए बिना ही ट्रांसफार्मर लगाकर कनेक्शन चालू कर दिए। एक किसान लक्ष्मण राम चौधरी ने करीब 1.80 लाख रुपये जमा कराने का दावा किया, लेकिन कार्यालय रिकॉर्ड में न तो राशि दिखी और न ही संबंधित डिमांड नंबर। जब मीडिया टीम ने रिकॉर्ड खंगाला, तो कार्यालय के अधिकारी जवाब देने के बजाय बचते नज़र आए—जिससे संदेह और गहरा गया।

फर्जी कागजात और दूर-दराज़ जमीन पर कनेक्शन

सूत्र बताते हैं कि इस क्षेत्र में कई कनेक्शन ऐसे जारी किए गए हैं जो नियमों के विपरीत हैं। कई मामलों में किसानों की जमीन 20–25 किलोमीटर दूर दिखाई गई, और फर्जी रजिस्ट्री-दस्तावेज़ों के आधार पर कनेक्शन स्वीकृत किए गए। पूर्व में ट्रांसफर हो चुके अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते रहे, जबकि ठेकेदार मनमर्जी से काम करता रहा।

एक ही K-नंबर पर दो-दो बिल — सिस्टम पर सवाल

सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि एक ही K-नंबर से अलग-अलग तरीके से बिल जारी हुए। यह सीधे तौर पर लेखा व्यवस्था, आईटी सिस्टम और आंतरिक निगरानी पर सवाल उठाता है। यहां तक कि जिन किसानों की डिमांड राशि खातों में दर्ज ही नहीं, उन्हीं के खेतों पर ट्रांसफार्मर लगाकर नियमित बिलिंग शुरू कर दी गई।

डिमांड राशि गई कहां — जवाब कौन देगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है — डिमांड राशि आखिर गई कहां और विभागीय एंट्री में क्यों नहीं दिख रही?

अवैध तरीके से कनेक्शन जारी करने और ट्रांसफार्मर लगाने से सरकार को राजस्व नुकसान हो रहा है, वहीं किसान परेशान हैं। कई किसानों ने बताया कि ट्रांसफार्मर के लिए महीनों इंतजार करना पड़ता है, लेकिन गलत तरीके से लगाए गए कनेक्शन आसानी से चालू हो जाते हैं।

जांच और जवाबदेही की जरूरत

इस पूरे मामले ने JDVVNL की कार्यशैली, वित्तीय नियंत्रण और निगरानी तंत्र पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं। जरूरत है कि रिकॉर्ड की गहन जांच हो, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो और किसानों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जाए—ताकि भविष्य में इस तरह की अनियमितताओं पर रोक लग सके।

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