latest-newsजयपुरराजनीतिराजस्थान

Save Aravalli अभियान: राजेंद्र राठौड़ का अशोक गहलोत पर पलटवार, बोले– भ्रम फैला रहे हैं

Save Aravalli अभियान: राजेंद्र राठौड़ का अशोक गहलोत पर पलटवार, बोले– भ्रम फैला रहे हैं

मनीषा शर्मा।   राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर राजनीति एक बार फिर तेज हो गई है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के हालिया बयानों पर तीखा पलटवार करते हुए कहा है कि गहलोत अरावली को लेकर जनता में भ्रम फैला रहे हैं और उनके इस अभियान में खुद उनकी पार्टी भी उनके साथ नहीं खड़ी है। रविवार को जयपुर स्थित भाजपा मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में राठौड़ ने गहलोत के ‘Save Aravalli’ अभियान को राजनीतिक दिखावा करार दिया।

‘Save Aravalli’ अभियान पर सवाल

राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत ने हाल ही में सोशल मीडिया पर ‘Save Aravalli’ नाम से अभियान शुरू किया और अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदली, लेकिन उनकी ही पार्टी के बड़े नेताओं ने इस अभियान से दूरी बनाए रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और सचिन पायलट जैसे नेताओं ने न तो अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदली और न ही इस अभियान का समर्थन किया। राठौड़ ने तंज कसते हुए कहा कि इससे साफ है कि यह कोई गंभीर पर्यावरणीय आंदोलन नहीं, बल्कि केवल राजनीतिक लाभ उठाने की कोशिश है। अगर यह वास्तव में पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा होता, तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का खुला समर्थन देखने को मिलता।

‘90 प्रतिशत अरावली खत्म होने’ के दावे को बताया झूठा

राजेंद्र राठौड़ ने अशोक गहलोत के उस बयान को भी सिरे से खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि अरावली का 90 प्रतिशत हिस्सा खत्म हो जाएगा। राठौड़ ने इसे पूरी तरह असत्य और भ्रामक बताया। उन्होंने कहा कि अरावली क्षेत्र का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा पहले से ही अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान और आरक्षित वनों के अंतर्गत आता है, जहां किसी भी प्रकार का खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसके अलावा उन्होंने स्पष्ट किया कि पूरे अरावली क्षेत्र में से केवल लगभग 2.56 प्रतिशत क्षेत्र ही ऐसा है, जहां सीमित और कड़े नियमों के तहत नियंत्रित खनन की अनुमति है। ऐसे में अरावली के व्यापक विनाश की बात करना तथ्यों से परे है और जनता को गुमराह करने का प्रयास है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की गलत व्याख्या का आरोप

राठौड़ ने आरोप लगाया कि अशोक गहलोत सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की जानबूझकर गलत व्याख्या कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली के संरक्षण और खनन नियमन को लेकर एक स्पष्ट आदेश दिया था। इस आदेश में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के नेतृत्व में गठित समिति की सिफारिशों को स्वीकार किया गया है। कोर्ट के आदेश के अनुसार, अरावली से जुड़े जिलों में स्थित कोई भी ऐसी भू-आकृति जो आसपास के भू-भाग से कम से कम 100 मीटर ऊंची हो, उसे ‘अरावली हिल्स’ माना जाएगा। राठौड़ ने कहा कि यह कोई नया मानदंड नहीं है, बल्कि इससे पहले भी 8 अप्रैल 2005 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनुपालना में यही परिभाषा तय की गई थी।

कांग्रेस सरकारों ने भी अपनाया था यही मानदंड

राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि 2005 के सुप्रीम कोर्ट आदेश के बाद कांग्रेस सरकारों ने भी इस 100 मीटर ऊंचाई वाले मानदंड को स्वीकार किया और उसी के अनुसार नीतियां बनाई गईं। अब जब वही मानदंड दोबारा लागू किया जा रहा है, तो गहलोत इसे गलत तरीके से पेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का उद्देश्य अरावली के संरक्षण के साथ-साथ पारदर्शी और नियंत्रित खनन व्यवस्था सुनिश्चित करना है, न कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाना। इसके बावजूद गहलोत जनता में डर और भ्रम का माहौल बना रहे हैं।

पर्यावरण बनाम राजनीति की बहस

राठौड़ ने साफ कहा कि भाजपा अरावली के संरक्षण के पक्ष में है, लेकिन तथ्यों के आधार पर और कानून के दायरे में रहकर। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस अरावली जैसे संवेदनशील मुद्दे को भी राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है। राठौड़ के अनुसार, यदि गहलोत वास्तव में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर होते, तो उनके कार्यकाल में अरावली क्षेत्र में हुए अवैध खनन और अतिक्रमण पर कठोर कार्रवाई दिखाई देती।

post bottom ad

Discover more from MTTV INDIA

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading