आज के समय में खेती सिर्फ मौसमी फसलों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का एक स्थायी आधार भी बनती जा रही है। परंपरागत फसलें जहां हर सीजन में सीमित आय देती हैं, वहीं कुछ कृषि विकल्प ऐसे भी हैं जो किसानों को लंबे समय तक स्थिर और बड़ा लाभ दिला सकते हैं। ऐसी ही उच्च मूल्य वाली फसलों में चंदन की खेती प्रमुख है। एक बार लगाए गए चंदन के पौधे 12 से 15 वर्षों में किसान परिवार को करोड़ों की आमदनी दे सकते हैं। यही कारण है कि इसे आज बुढ़ापे की पेंशन के रूप में भी देखा जा रहा है।
केंद्र सरकार का फोकस: उच्च मूल्य वाली कृषि और चंदन इको-सिस्टम
केंद्र सरकार ने बजट 2026 में चंदन सहित उच्च मूल्य वाली फसलों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया है। सरकार का लक्ष्य भारतीय चंदन इको-सिस्टम की खोई प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित करना है। इसके लिए राज्य सरकारों के साथ मिलकर योजनाएं तैयार की जाएंगी, जिनके माध्यम से—
चंदन की संगठित और वैज्ञानिक खेती को आगे बढ़ाने,
चंदन के पेड़ों की प्रोसेसिंग यूनिट्स की स्थापना,
लकड़ी और तेल के मूल्य संवर्धन पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि किसान न सिर्फ पेड़ उगाएं, बल्कि कटाई के बाद उसकी लकड़ी के मूल्य को बढ़ाने के लिए आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर भी उपलब्ध हो।
मिश्रित खेती से बढ़ती आमदनी
शबला सेवा संस्थान के संस्थापक अविनाश कुमार के अनुसार, सफेद चंदन की खेती को मिश्रित खेती के साथ करना बेहतर माना जाता है। इससे किसानों को निरंतर आमदनी मिलती रहती है। चंदन का पेड़ लंबी अवधि में लाभ देता है, इसलिए इसके साथ दूसरी फसलें लगाने से परिवार का खर्च चलता रहता है और चंदन की परिपक्वता तक आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
चंदन की खेती कैसे करें?
उपयुक्त मिट्टी
चंदन के पौधे के लिए मिट्टी की गुणवत्ता अत्यंत महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के अनुसार—
ऊसर, बंजर, धूस और पत्थरीली भूमि में भी चंदन उगाया जा सकता है।
दोमट और लाल दोमट मिट्टी चंदन के लिए सबसे उपयुक्त है।
ऊंची जमीन बेहतर होती है, क्योंकि जलभराव चंदन के लिए हानिकारक है।
पानी ठहरने वाले क्षेत्रों में चंदन की खेती नहीं करनी चाहिए। चंदन की जड़ें संवेदनशील होती हैं, इसलिए जमीन का जल निकास अच्छा होना अनिवार्य है।
होस्ट प्लांट की आवश्यकता
चंदन के पौधे को बढ़ने के लिए एक सहायक पौधा यानी होस्ट प्लांट की जरूरत होती है।
होस्ट प्लांट चंदन की जड़ों से पोषक तत्व साझा करता है।
विशेषज्ञ अरहर को सबसे उपयुक्त होस्ट प्लांट मानते हैं।
एक एकड़ में पौधों की संख्या
एक एकड़ में करीब 410 पौधे लगाए जा सकते हैं।
पौधे से पौधे की दूरी 10 फुट और पंक्ति से पंक्ति की दूरी 10 फुट रखी जाती है। यह दूरी पेड़ों को उचित विकास और जड़ों के फैलाव की अनुमति देती है।
कमाई का विस्तृत गणित
अविनाश कुमार के अनुसार चंदन की खेती में लागत कम और लाभ अत्यधिक होता है।
लागत
एक एकड़ में शुरुआती लागत लगभग 80 हजार से 1 लाख रुपये आती है।
इसमें पौधे, खेत की तैयारी, होस्ट प्लांट और सुरक्षा व्यवस्था शामिल है।
तैयार होने का समय
चंदन का पौधा 12 से 15 साल में परिपक्व होकर बिकने लायक हो जाता है।
लकड़ी का बाजार भाव
सफेद चंदन की लकड़ी का मौजूदा बाजार भाव 20,000 से 30,000 रुपये प्रति किलो है।
एक एकड़ से कुल आय
एक एकड़ में लगाए गए चंदन के पेड़ों से लगभग 4 से 5 करोड़ रुपये की आमदनी संभव है। चंदन की लकड़ी फर्नीचर, खिलौने, धार्मिक वस्तुएं, औषधीय उत्पाद और चंदन तेल बनाने में उपयोग होती है। चंदन तेल अत्यधिक महंगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में लोकप्रिय है।
क्या पेड़ की कटाई के लिए सरकारी अनुमति जरूरी है?
भारत में चंदन को मूल्यवान और संवेदनशील वृक्ष प्रजाति माना जाता है। इसलिए—
सफेद चंदन की खेती करने पर कोई विशेष कानूनी प्रक्रिया आवश्यक नहीं है।
लेकिन पेड़ काटने से पहले वन विभाग से अनुमति लेना अनिवार्य है। यह नियम देश के किसी भी राज्य में लागू होता है।
चंदन खेती: किसानों के लिए भविष्य का सबसे सुरक्षित निवेश
कम देखभाल, सीमित जोखिम, दीर्घकालिक स्थिरता और करोड़ों की संभावित कमाई चंदन की खेती को सबसे आकर्षक कृषि विकल्प बनाती है। केंद्र सरकार की नई नीतियां और इन्फ्रास्ट्रक्चर विकास की योजनाएं इस खेती को और अधिक सुरक्षित और लाभकारी बना सकती हैं। खेती में विविधता लाने और भविष्य की आर्थिक मजबूती के लिए चंदन की खेती किसानों के लिए एक मजबूत विकल्प साबित हो सकती है।


