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814वें उर्स पर सलमान चिश्ती ने उठाई वैश्विक ज़ुल्म के खिलाफ आवाज

814वें उर्स पर सलमान चिश्ती ने उठाई वैश्विक ज़ुल्म के खिलाफ आवाज

शोभना शर्मा, अजमेर। अजमेर में स्थित विश्वविख्यात सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती गरीब नवाज़ की दरगाह में आयोजित 814वें सालाना उर्स के मौके पर पूरी दुनिया के लिए अमन, मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम दिया गया। इस अवसर पर गद्दीनशीन एवं चिश्ती फाउंडेशन के चेयरमैन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश के 140 करोड़ नागरिकों को उर्स की मुबारकबाद पेश की और इंसानियत, आपसी सद्भाव तथा विश्व शांति के लिए विशेष दुआएं कीं।

हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने बताया कि उर्स के दौरान देश के कोने-कोने से आए करीब 10 लाख जायरीन अजमेर शरीफ दरगाह में हाज़िर हुए। उर्स के इन पवित्र दिनों में सिर्फ जायरीन की मौजूदगी ही नहीं रही, बल्कि पूरी मानवता की भलाई, विश्व में शांति और नफरत के अंत के लिए दुआ की गई। उन्होंने कहा कि ख्वाजा साहब की दरगाह हमेशा से प्रेम, करुणा और भाईचारे का केंद्र रही है, जहां हर धर्म, जाति और देश के लोग एक समान भाव से सिर झुकाते हैं।

इंसानियत के खिलाफ ज़ुल्म की कड़ी निंदा

814वें उर्स के मौके पर हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में इंसानियत के खिलाफ हो रहे अत्याचारों पर गहरी चिंता जताई। विशेष रूप से पड़ोसी देश बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय पर हो रहे कथित अत्याचारों की उन्होंने कड़े शब्दों में निंदा की। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज या देश में धर्म, जाति या पहचान के आधार पर ज़ुल्म करना मानवता के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है। सलमान चिश्ती ने विश्व के शासकों, वर्ल्ड लीडर्स, मानवाधिकार संगठनों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं से अपील की कि वे बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाएं। उन्होंने कहा कि वहां की सरकार की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने देश के हर नागरिक की सुरक्षा सुनिश्चित करे और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे।

आतंक और हिंसा के खिलाफ एकजुट होने की अपील

गद्दीनशीन हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने दुनिया के विभिन्न हिस्सों में हो रही आतंकी घटनाओं की भी कड़ी निंदा की। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों में हाल के समय में हुई हिंसक घटनाओं को मानवता के खिलाफ बताया। उनका कहना था कि आतंकवाद और हिंसा किसी भी धर्म या विचारधारा का प्रतिनिधित्व नहीं करते, बल्कि ये पूरी मानव सभ्यता के लिए खतरा हैं। उन्होंने सभी राष्ट्राध्यक्षों और वैश्विक नेतृत्व से अपील की कि आतंक और हिंसा के खिलाफ साझा और ठोस प्रयास किए जाएं। सलमान चिश्ती ने कहा कि जब तक दुनिया एकजुट होकर नफरत और हिंसा का मुकाबला नहीं करेगी, तब तक स्थायी शांति संभव नहीं है।

“वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना से ही बनेगी शांतिपूर्ण दुनिया

नववर्ष की अग्रिम शुभकामनाएं देते हुए हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने भारत की प्राचीन परंपरा “वसुधैव कुटुम्बकम्” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया एक परिवार है और इसी सोच के साथ अगर राष्ट्र, समाज और व्यक्ति आगे बढ़ें, तो वैश्विक शांति और सद्भाव को मजबूत किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ख्वाजा गरीब नवाज़ की शिक्षाएं आज के समय में पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक हैं। प्रेम, सेवा, सहिष्णुता और इंसानियत का संदेश ही दुनिया को नफरत, युद्ध और आतंक से बचा सकता है। 814वें उर्स के मौके पर अजमेर शरीफ से दिया गया यह संदेश न सिर्फ धार्मिक आयोजन तक सीमित रहा, बल्कि वैश्विक स्तर पर शांति, न्याय और मानवाधिकारों के समर्थन में एक मजबूत आवाज बनकर उभरा।

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