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सचिन पायलट बोले: “नौजवान की परिभाषा च्युइंग गम की तरह है”

सचिन पायलट बोले: “नौजवान की परिभाषा च्युइंग गम की तरह है”

शोभना शर्मा। जयपुर में हाल ही में आयोजित ‘महात्मा गांधी: एक संक्षिप्त परिचय’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और राजस्थान के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट शामिल हुए। लेखक नरेश दाधीच द्वारा लिखित इस पुस्तक के विमोचन के दौरान नीरजा चौधरी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। कार्यक्रम में पायलट ने महात्मा गांधी के विचारों और राजनीति में अपने अनुभवों पर विस्तार से बात की।

राजनीति में आने का फैसला सोच-विचार के बाद

कार्यक्रम के दौरान जब लेखक नरेश दाधीच ने पायलट को ‘एक्सीडेंटल पॉलिटिशियन’ बताया, तो पायलट ने स्पष्ट किया कि मैं एक्सीडेंटल पॉलिटिशियन नहीं हूं। यह कोई दुर्घटना नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया गया फैसला है। उन्होंने कहा, “मैंने अच्छी पढ़ाई की है, मैं किसी और काम में भी सफल हो सकता था। लेकिन सोच-विचार करने के बाद मैंने राजनीति को चुना।”

पायलट ने अपने पिता राजेश पायलट को याद करते हुए बताया कि उनके निधन के बाद यह निर्णय लेने में उन्हें चार साल लगे। उन्होंने कहा कि राजनीतिक जीवन में आने का यह निर्णय व्यक्तिगत विचार और सोच का परिणाम था।

महात्मा गांधी के विचारों का महत्व

सचिन पायलट ने कहा कि आजकल कुछ लोग महात्मा गांधी के नाम का केवल राजनीतिक लाभ उठाने के लिए इस्तेमाल करते हैं। जबकि गांधी ने विचारधारा से ऊपर उठकर राष्ट्र निर्माण का सपना देखा था। उन्होंने यह भी कहा कि गांधीजी का वह प्रसिद्ध वाक्य, “ईश्वर–अल्लाह तेरो नाम, सबको सन्मति दे भगवान”, आज भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

पायलट ने आगे कहा कि गांधीजी के चश्मे का उपयोग सफाई अभियान में किया जाता है, लेकिन उनके विचार और जीवन दर्शन को अपने व्यवहार में उतारना जरूरी है।

नौजवान की परिभाषा: च्युइंग गम की तरह

सचिन पायलट ने युवा वर्ग पर बात करते हुए कहा कि “नौजवान की परिभाषा च्युइंग गम की तरह है। इसे 20 से 70 तक बढ़ाया जा सकता है। नौजवान केवल 18, 20 या 25 साल के लोग नहीं होते।” उन्होंने कहा कि उम्र महज एक संख्या है, असली नवयुवक वही है जो सक्रिय, विचारशील और समाज के लिए काम करता है।

जनता का भरोसा जीतना ही असली चुनौती

सचिन पायलट ने कहा, “लोगों का भरोसा हासिल करना बड़ा काम है। इसे आप खरीद नहीं सकते। इसे आप पड़ोसी या रिश्तेदार से नहीं ले सकते। इसके लिए आपको लोगों के बीच रहना होगा, काम करना होगा। तभी जाकर आप उनका विश्वास जीत सकते हैं।” उन्होंने यह भी बताया कि युवा वर्ग के लिए समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है।

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