कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव सचिन पायलट ने ईरान से जुड़े बढ़ते अंतरराष्ट्रीय तनाव, गैस सिलेंडर की सप्लाई में संभावित कमी और तेल संकट की आशंका को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए सरकार की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है और ऐसा लगता है कि देश से कुछ अहम तथ्य छिपाए जा रहे हैं।
मंगलवार को राजस्थान विधानसभा में प्रश्नकाल की कार्यवाही में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए पायलट ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर केवल उस क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर भी पड़ेगा। ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए यह जरूरी है कि सरकार पहले से तैयारी करे और संभावित संकट से निपटने के लिए स्पष्ट रणनीति बनाए।
उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों को देखते हुए सरकार को समय रहते गैस और पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए थी, लेकिन मौजूदा स्थिति यह संकेत दे रही है कि इस दिशा में अपेक्षित कदम नहीं उठाए गए हैं।
गैस सिलेंडर की सप्लाई और कीमतों पर सवाल
सचिन पायलट ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतों और सप्लाई को लेकर भी सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने गैस सिलेंडर के दाम तो बढ़ा दिए, लेकिन यह सुनिश्चित नहीं किया कि लोगों को पर्याप्त मात्रा में सिलेंडर मिल सकें।
पायलट के मुताबिक इस स्थिति का असर केवल आम उपभोक्ताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि होटल और रेस्टोरेंट उद्योग भी इससे प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में छोटे और मध्यम स्तर के होटल तथा भोजनालय गैस सिलेंडर पर निर्भर हैं। यदि सप्लाई में कमी आती है या कीमतें लगातार बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर इन व्यवसायों की लागत और संचालन पर पड़ेगा।
उन्होंने यह भी कहा कि पहले से महंगाई की मार झेल रहे आम नागरिकों के लिए गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतें एक अतिरिक्त बोझ बन रही हैं। ऐसे में सरकार को केवल मूल्य वृद्धि पर ध्यान देने के बजाय आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
पेट्रोल-डीजल कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका
पायलट ने चेतावनी दी कि अगर खाड़ी क्षेत्र में तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। उन्होंने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों पर पड़ता है।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में सरकार को ऊर्जा सुरक्षा के लिए दीर्घकालिक रणनीति बनानी चाहिए। इसमें वैकल्पिक स्रोतों की तलाश, भंडारण क्षमता बढ़ाना और आपूर्ति शृंखला को मजबूत करना जैसे कदम शामिल होने चाहिए। पायलट के अनुसार यदि समय रहते ठोस योजना नहीं बनाई गई तो आने वाले समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि से परिवहन, कृषि और उद्योग जैसे कई क्षेत्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
संसद में बयान को औपचारिकता तक सीमित न रखने की सलाह
सचिन पायलट ने कहा कि ईरान से जुड़े हालात को लेकर संसद में सरकार की ओर से जो बयान दिया गया है, उसे केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत को इस मामले में सक्रिय कूटनीतिक भूमिका निभानी चाहिए और शांति बहाली के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास करने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार का युद्ध किसी समस्या का स्थायी समाधान नहीं होता। संवाद और कूटनीति ही ऐसे विवादों का सही रास्ता है। भारत की विदेश नीति परंपरागत रूप से शांति और बातचीत पर आधारित रही है और इसी दिशा में पहल की जानी चाहिए।
खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीयों की सुरक्षा का मुद्दा
पायलट ने खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि एशिया और खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच वहां रह रहे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इन देशों में बड़ी संख्या में भारतीय कामगार रोजगार के लिए गए हुए हैं और वे भारत की अर्थव्यवस्था में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। ऐसे में यदि क्षेत्रीय तनाव बढ़ता है तो उनकी सुरक्षा और संभावित निकासी को लेकर सरकार के पास स्पष्ट योजना होनी चाहिए। पायलट के अनुसार सरकार को यह बताना चाहिए कि यदि हालात बिगड़ते हैं तो वहां मौजूद भारतीयों की सुरक्षा और सहायता के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे।
संसद में चर्चा की मांग
कांग्रेस नेता ने इस पूरे मुद्दे पर संसद में विस्तृत चर्चा कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि इतने गंभीर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और संभावित ऊर्जा संकट पर संसद में चर्चा होना बेहद जरूरी है ताकि देश को स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी मिल सके। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार इस विषय पर चर्चा से बच रही है तो इससे यह संदेश जाता है कि कहीं न कहीं सच्चाई को छिपाने की कोशिश की जा रही है।
पायलट ने कहा कि विपक्ष यह जानना चाहता है कि खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता और संभावित तेल संकट से निपटने के लिए सरकार की क्या ठोस योजना है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि इस तरह के संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को पारदर्शिता बरतनी चाहिए और संसद के माध्यम से देश को भरोसे में लेना चाहिए।


