मनीषा शर्मा, अजमेर। भारतीय रुपया सोमवार को डॉलर के मुकाबले 84.66 के स्तर तक गिर गया, जो इसका ऐतिहासिक निम्न स्तर है। इस गिरावट के कई कारण हैं, जिनमें डॉलर इंडेक्स की मजबूती, FII की भारी बिकवाली, और वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता प्रमुख हैं।
रुपए की कमजोरी के कारण
रुपए में गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और विदेशी निवेशकों (FII) की बिकवाली है। नवंबर में भारतीय शेयर बाजार से FII ने 46,000 करोड़ रुपए की शुद्ध बिकवाली की है। इससे भारतीय मुद्रा पर दबाव और बढ़ गया। इसके अलावा, भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी घटकर 5 महीने के न्यूनतम स्तर पर आ गया है।
- डॉलर इंडेक्स की मजबूती:
डॉलर इंडेक्स, जो 6 प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की ताकत को दर्शाता है, वर्तमान में 106.3 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इसका मतलब है कि अमेरिकी मुद्रा अन्य वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूत हो रही है, जिससे भारतीय रुपया कमजोर पड़ रहा है।- क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें:
ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 72.3 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं। भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए क्रूड की बढ़ती कीमतें भुगतान संतुलन (Balance of Payments) पर दबाव डालती हैं, जिससे रुपए की कमजोरी बढ़ती है।- विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट:
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले 7 हफ्तों में 47 बिलियन डॉलर कम हुआ है। यह संकेत देता है कि रिजर्व बैंक भारतीय मुद्रा को स्थिर रखने के लिए डॉलर की बिक्री कर रहा है, लेकिन इसका प्रभाव सीमित है।- GDP ग्रोथ में गिरावट:
भारत की GDP ग्रोथ पिछले 7 तिमाहियों में सबसे कमजोर रही है। कमजोर आर्थिक आंकड़े और धीमी विकास दर विदेशी निवेशकों का विश्वास कमजोर करते हैं।FII की बिकवाली और भारतीय करेंसी पर प्रभाव
नवंबर में FII द्वारा भारतीय शेयर बाजार में भारी बिकवाली ने रुपए को और कमजोर कर दिया। पिछले दो महीनों में FII ने 1.6 लाख करोड़ रुपए की बिकवाली की है। विदेशी निवेशकों की यह धारणा कि भारतीय बाजार की स्थिति कमजोर हो रही है, भारतीय करेंसी के लिए नकारात्मक है।
डॉलर के मुकाबले रुपया 85 के स्तर तक गिर सकता है
अर्थशास्त्रियों और वित्तीय संस्थानों का मानना है कि रुपए पर दबाव बना रहेगा।
- HDFC सिक्योरिटीज: रुपया 84.35-84.94 के स्तर तक फिसल सकता है।
- केडिया कमोडिटी: 85 के स्तर तक गिरावट की संभावना जताई।
- मोतीलाल ओसवाल: रुपया 85.50 के स्तर तक पहुंच सकता है।
रुपए को स्थिर करने के लिए आरबीआई की भूमिका
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) रुपए को स्थिर करने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। इसके तहत डॉलर की बिक्री और मौद्रिक नीति में समायोजन शामिल हैं। हालांकि, वैश्विक कारकों और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के कारण आरबीआई की कोशिशों का असर सीमित है।
वैश्विक वित्तीय बाजारों में अस्थिरता का प्रभाव
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, जो वर्तमान में 4.21% पर है, भी डॉलर की मजबूती का संकेत देती है। विदेशी निवेशक उच्च यील्ड के चलते अमेरिकी बाजारों में पैसा लगा रहे हैं, जिससे उभरते हुए बाजारों की करेंसी दबाव में है।
आने वाले समय में रुपए पर असर डालने वाले कारक
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियां:
अमेरिकी फेड द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी के संकेत डॉलर को और मजबूत कर सकते हैं।- वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां:
यदि वैश्विक मंदी के संकेत बढ़ते हैं, तो डॉलर को सुरक्षित निवेश के रूप में देखा जाएगा, जिससे अन्य मुद्राओं पर दबाव बनेगा।- भारत का चालू खाता घाटा (CAD):
आयात में वृद्धि और निर्यात में गिरावट चालू खाता घाटे को बढ़ा सकती है, जो भारतीय करेंसी के लिए नकारात्मक है।डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया दबाव में है, और यह दबाव आने वाले समय में भी बना रह सकता है। मजबूत डॉलर इंडेक्स, FII की बिकवाली, और कमजोर घरेलू आर्थिक संकेतकों के कारण रुपया 85 के स्तर तक फिसल सकता है। हालांकि, आरबीआई और सरकार की नीतियों से स्थिरता लाने की कोशिशें जारी हैं।


