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राजस्थान में RTE प्रवेश प्रक्रिया 2025-26: 2.37 लाख बच्चों को मिला निशुल्क प्रवेश, 25 हजार आवेदन खारिज

राजस्थान में RTE प्रवेश प्रक्रिया 2025-26: 2.37 लाख बच्चों को मिला निशुल्क प्रवेश, 25 हजार आवेदन खारिज

शोभना शर्मा।  राजस्थान में शिक्षा सत्र 2025-26 के लिए  RTE (Right to Education Act) के तहत निजी स्कूलों में निशुल्क प्रवेश प्रक्रिया लगभग पूरी हो चुकी है। इस वर्ष राज्यभर के 31,720 निजी स्कूलों में कुल 2,37,407 बच्चों को निशुल्क प्रवेश मिला है। वहीं, 25 हजार से अधिक आवेदन दस्तावेजी खामियों के कारण निरस्त कर दिए गए हैं। इसके बावजूद अभी भी 42 हजार से अधिक बच्चे ऐसे हैं जिन्हें प्रवेश का इंतजार बना हुआ है। राजस्थान शिक्षा निदेशालय ने अब आरटीई के तहत प्रवेशित विद्यार्थियों के भौतिक सत्यापन (Physical Verification) की तैयारी शुरू कर दी है। यह सत्यापन प्रक्रिया 5 नवंबर 2025 तक पूरी की जाएगी, जिसके बाद ही फीस पुनर्भरण (Fee Reimbursement) की कार्रवाई शुरू होगी।

शिक्षा निदेशालय ने बनाए जिलेवार सत्यापन दल

प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने आरटीई के अंतर्गत प्रवेशित विद्यार्थियों की जानकारी की पुष्टि के लिए जिलेवार सत्यापन दलों का गठन किया है। इन दलों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जो कि आज (31 अक्टूबर) को समाप्त होगा। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सत्यापन दल निजी स्कूलों में जाकर बच्चों की वास्तविक उपस्थिति और डेटा का मिलान करेंगे। इससे यह सुनिश्चित किया जाएगा कि आरटीई के अंतर्गत दाखिल बच्चे वास्तव में कक्षाओं में अध्ययनरत हैं या नहीं। शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल डेटा की जांच नहीं बल्कि यह भी सुनिश्चित करना है कि किसी प्रकार की फर्जी प्रविष्टि या डुप्लिकेट रिकॉर्ड न हो।

चॉइस भरने के बावजूद नहीं मिला प्रवेश

आरटीई के तहत इस वर्ष राज्यभर के 308064 अभ्यर्थियों ने अपनी पसंद के निजी स्कूलों में चॉइस भरकर आवेदन किया था। इन आवेदनों में से लगभग 70,657 अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं मिल सका। इनमें से 26,567 आवेदन ऐसे थे जिनमें दस्तावेजों की खामियां पाई गईं और उन्हें खारिज कर दिया गया। वहीं 44,090 अभ्यर्थी पात्र होने के बावजूद किसी कारणवश चयन सूची में शामिल नहीं हो पाए। शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चयनित 2,37,407 विद्यार्थियों में से 63,727 बच्चों को नर्सरी और 1,73,680 को पहली कक्षा में निशुल्क प्रवेश दिया गया है। इस बार की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से की गई, जिससे पारदर्शिता बनी रही।

9 अप्रैल को हुई लॉटरी, 31 अगस्त को अंतिम आवंटन

राज्य सरकार ने आरटीई प्रवेश प्रक्रिया के तहत 9 अप्रैल 2025 को ऑनलाइन लॉटरी के माध्यम से वरीयता क्रम तय किया था। इसके बाद वरीयता के आधार पर अभ्यर्थियों को चयनित निजी स्कूलों में प्रवेश का अवसर दिया गया। आरटीई के तहत 25 प्रतिशत सीटें निशुल्क प्रवेश के लिए आरक्षित रहती हैं। इसी व्यवस्था के तहत इस वर्ष भी लगभग 31,720 निजी स्कूलों ने भाग लिया। 31 अगस्त 2025 को आरटीई के अंतिम चरण का आवंटन पूरा हुआ, जिसमें स्पष्ट हुआ कि 3,08,064 अभ्यर्थियों में से केवल 2,37,407 बच्चों को ही निशुल्क प्रवेश मिल सका।

सत्यापन के बाद शुरू होगी फीस पुनर्भरण प्रक्रिया

शिक्षा निदेशालय के अनुसार, जब तक भौतिक सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक फीस पुनर्भरण (Fee Reimbursement) की कार्यवाही शुरू नहीं होगी। सत्यापन दलों की रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद ही शिक्षा विभाग संबंधित निजी स्कूलों को निशुल्क प्रवेशित विद्यार्थियों की फीस का भुगतान करेगा। यह प्रक्रिया महत्वपूर्ण है क्योंकि कई बार स्कूलों की ओर से गलत या अधूरी जानकारी भेजे जाने के मामले सामने आते हैं। इस कारण से विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि केवल वास्तविक पात्र विद्यार्थियों की फीस ही चुकाई जाए।

शिक्षा विभाग की सख्ती, नौ स्कूलों को नोटिस

जयपुर जिले में कुछ निजी स्कूलों द्वारा आरटीई के तहत चयनित अभ्यर्थियों को प्रवेश नहीं दिए जाने की शिकायतें मिली हैं। इस पर कार्रवाई करते हुए प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने नौ निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया है। इन स्कूलों को अंतिम अवसर देते हुए कहा गया है कि वे तुरंत चयनित विद्यार्थियों को प्रवेश दें, अन्यथा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आरटीई प्रभारी चंद्र किरण पंवार ने बताया, “निशुल्क प्रवेशित बच्चों का भौतिक सत्यापन 5 नवंबर तक पूरा किया जाएगा। जयपुर के लगभग 9 निजी स्कूलों को आरटीई नियमों का पालन न करने पर अंतिम चेतावनी दी गई है।”

आरटीई योजना का उद्देश्य और प्रभाव

आरटीई (Right to Education) अधिनियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का समान अवसर मिले। इस योजना के तहत निजी स्कूलों में 25 प्रतिशत सीटें आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समुदायों के बच्चों के लिए आरक्षित रहती हैं। राजस्थान में हर वर्ष लाखों अभ्यर्थी इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदन करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आरटीई ने न केवल शिक्षा की पहुंच को बढ़ाया है, बल्कि सामाजिक समानता और समावेशी शिक्षा प्रणाली की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम रखा है। हालांकि दस्तावेजों की त्रुटियां, जागरूकता की कमी और कुछ निजी स्कूलों की लापरवाही अब भी इस योजना की गति को प्रभावित करती है।

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