मनीषा शर्मा। राजस्थान में सरकारी नौकरियों के लिए निर्धारित तलाकशुदा महिला कोटे में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। जानकारी के अनुसार, कई महिलाएं केवल सरकारी नौकरी हासिल करने के लिए कागजों में फर्जी तलाक ले रही हैं, जबकि वास्तविकता में उनका वैवाहिक जीवन सामान्य रूप से चल रहा है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने अब जांच अभियान तेज करने का फैसला किया है। RSSB के अध्यक्ष आलोक राज ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि तलाकशुदा कोटे से विभिन्न विभागों में जॉइन करने वाली अभ्यर्थियों में यदि फर्जीवाड़ा पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस तरह के फर्जी मामलों की पुष्टि होने पर संबंधित नियुक्तियां रद्द की जा सकती हैं और कानूनी कार्रवाई भी संभव है।
तलाकशुदा महिला कोटे में कैसे होता है फायदा
राजस्थान सरकार की कई भर्तियों में तलाकशुदा महिलाओं के लिए अलग से 2% का कोटा निर्धारित है। इस कोटे के अंतर्गत कटऑफ अंक अन्य सामान्य श्रेणियों की तुलना में काफी कम रहते हैं। यही वजह है कि कई उम्मीदवार इस श्रेणी में आने के लिए फर्जी तलाक के दस्तावेज तैयार करवा लेते हैं। इसका लाभ उठाकर वे अपेक्षाकृत कम अंकों पर भी नौकरी हासिल कर लेते हैं। पिछले कुछ वर्षों में इस श्रेणी में चयनित अभ्यर्थियों पर शक की स्थिति बनती रही है, लेकिन हाल ही में दर्जनों शिकायतों ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज के अनुसार अब तक 12 से अधिक शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनमें अभ्यर्थियों के फर्जी तलाक लेकर नौकरी करने के आरोप लगाए गए हैं।
जांच में आने वाली चुनौतियां
फर्जी तलाक मामलों की जांच आसान नहीं है, क्योंकि इसमें कानूनी दस्तावेज शामिल होते हैं, जिनकी सत्यता की पुष्टि करने के लिए न्यायालयों, वकीलों और अन्य सरकारी विभागों से जानकारी जुटानी पड़ती है। कई मामलों में तलाक के कागजात विधिक रूप से पंजीकृत होते हैं, लेकिन वास्तविकता में पति-पत्नी साथ रह रहे होते हैं। इस तरह की धोखाधड़ी को पकड़ने के लिए RSSB अब SOG और संबंधित विशेषज्ञों की मदद ले रहा है। जांच में विभिन्न विभागों, नगर निगम, न्यायालय और स्थानीय प्रशासन की भी भूमिका होगी।
पहले भी सामने आ चुके हैं फर्जी दस्तावेज के मामले
सरकारी नौकरियों में फर्जीवाड़ा कोई नया मामला नहीं है। इससे पहले भी फर्जी डिग्री और डिप्लोमा के जरिए नौकरी हासिल करने के कई मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि, तलाकशुदा महिला कोटे में फर्जी तलाक लेकर नौकरी पाने का मामला नई चुनौती बनकर उभरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता को प्रभावित नहीं करता, बल्कि वास्तविक रूप से तलाकशुदा और जरूरतमंद महिलाओं का हक भी छीन लेता है।
आगे की कार्रवाई
SOG अब इस दिशा में व्यापक जांच करने जा रहा है। संबंधित अभ्यर्थियों की पृष्ठभूमि, दस्तावेजों की सत्यता और पारिवारिक स्थिति की गहन जांच होगी। यदि कोई दोषी पाया जाता है तो न केवल उसकी नौकरी रद्द होगी बल्कि उस पर धोखाधड़ी और फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करने के आरोप में मुकदमा भी दर्ज किया जाएगा।


