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REET परीक्षा में हिजाब विवाद पर RSSB अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज का बयान

REET परीक्षा में हिजाब विवाद पर RSSB अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज का बयान

राजस्थान के कोटा शहर में आयोजित रीट भर्ती परीक्षा के दौरान बूंदी की एक युवती को हिजाब पहनने के कारण परीक्षा नहीं देने दिए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस पूरे विवाद पर राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा है कि बोर्ड की ओर से ड्रेस कोड को लेकर नियम पूरी तरह स्पष्ट हैं और उनका उद्देश्य केवल परीक्षा की निष्पक्षता और सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मेजर जनरल आलोक राज ने कहा कि अब तक उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है, जिसमें केवल ड्रेस कोड के कारण किसी अभ्यर्थी को परीक्षा देने से रोका गया हो। उन्होंने यह भी बताया कि बोर्ड की ओर से प्रत्येक परीक्षा से पहले ड्रेस कोड से जुड़े विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं, जिन्हें परीक्षा केंद्रों और अभ्यर्थियों दोनों तक पहुंचाया जाता है।

ड्रेस कोड का उद्देश्य और पांच प्रतिबंधित चीजें

RSSB अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि ड्रेस कोड का मकसद किसी विशेष समुदाय या पहनावे को निशाना बनाना नहीं है, बल्कि परीक्षा की शुचिता बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि ड्रेस कोड इसलिए बनाया गया है ताकि किसी भी परीक्षार्थी के पास पांच प्रतिबंधित चीजें न हों।

इनमें ब्लूटूथ डिवाइस, मोबाइल फोन, कैलकुलेटर, कैमरा और कोई ऐसा हथियार शामिल है, जिससे डर या नुकसान की स्थिति पैदा हो सकती है। आलोक राज के अनुसार, इन चीजों की सही तरीके से जांच के लिए यह जरूरी है कि परीक्षार्थी के शरीर का ऊपरी हिस्सा स्पष्ट रूप से दिखाई दे।

उन्होंने कहा कि यदि किसी महिला ने सिर को हिजाब या शॉल से ढक रखा हो, तो परीक्षक के लिए यह सुनिश्चित करना मुश्किल हो जाता है कि कहीं बालों या कानों के पास कोई ब्लूटूथ डिवाइस तो छिपी नहीं है। इसी कारण से यह नियम बनाया गया है कि गर्दन के ऊपर का हिस्सा खुला और साफ दिखाई देना चाहिए।

हिजाब और शॉल पर रोक, चुन्नी को लेकर अलग नियम

मेजर जनरल आलोक राज ने बताया कि हिजाब और शॉल पहनने की अनुमति इसी वजह से नहीं दी जाती, क्योंकि यह जांच प्रक्रिया में बाधा बन सकती है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुन्नी या दुपट्टे पर कोई रोक नहीं है।

उन्होंने कहा कि कई महिलाएं बिना दुपट्टे के असहज महसूस करती हैं, इसलिए उन्हें चुन्नी पहनने की छूट दी जाती है। आमतौर पर महिलाएं चुन्नी को गले में लपेट लेती हैं, जो सिर के नीचे रहती है और जांच में कोई परेशानी नहीं होती। यही कारण है कि चुन्नी और दुपट्टे को ड्रेस कोड में अनुमति दी गई है।

RSSB अध्यक्ष ने यह भी बताया कि ड्रेस कोड की पूरी सूची परीक्षा केंद्रों को भेजी जाती है और साथ ही अभ्यर्थियों को उनके एडमिट कार्ड के साथ भी यह जानकारी दी जाती है, ताकि किसी तरह का भ्रम न रहे।

परीक्षा केंद्रों पर अति उत्साह को लेकर चेतावनी

आलोक राज ने माना कि कई बार परीक्षा केंद्रों पर तैनात कार्मिक अति उत्साह में नियमों की जरूरत से ज्यादा सख्ती से पालना करवा देते हैं। उन्होंने ऐसे कार्मिकों से अपील की कि वे नियमों के अनुसार ही जांच करें।

उन्होंने कहा कि अगर किसी अभ्यर्थी को लेकर कोई आपत्ति लगती है, तो उसकी उचित तरीके से जांच की जाए। जरूरत पड़ने पर शपथ पत्र लेकर अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठने दिया जाना चाहिए, ताकि किसी का भविष्य प्रभावित न हो।

हिजाब उतारने को कहा गया, छात्रा ने छोड़ी परीक्षा

यह विवाद 18 जनवरी को उस समय सामने आया, जब कोटा के महावीर नगर स्थित स्थिर तिलक स्कूल परीक्षा केंद्र पर रीट मेन्स लेवल-2 की परीक्षा आयोजित की जा रही थी। बूंदी की रहने वाली अलीशा नाम की छात्रा को हिजाब पहनने के कारण परीक्षा देने से रोक दिया गया। परीक्षा केंद्र पर मौजूद कर्मचारियों ने छात्रा से हिजाब उतारकर परीक्षा देने को कहा। इस पर छात्रा ने परीक्षा देने से इनकार कर दिया और बिना परीक्षा दिए ही वापस लौट गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद राज्यभर में इस मुद्दे पर बहस शुरू हो गई।

छात्रा का पक्ष: आत्मसम्मान का सवाल

अलीशा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उसके एडमिट कार्ड पर हिजाब पहने हुए ही फोटो लगा हुआ था। उसने इससे पहले भी कई परीक्षाएं हिजाब पहनकर दी हैं और कभी कोई आपत्ति नहीं हुई।उसका कहना है कि परीक्षा केंद्र पर महिला सुरक्षाकर्मियों ने उसकी पूरी तलाशी ली थी और हिजाब खोलकर भी जांच की गई थी। जांच में कुछ भी आपत्तिजनक नहीं मिला, इसके बावजूद उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी गई। अलीशा ने कहा कि इतने छात्रों के सामने सिर खोलकर परीक्षा देना उसके लिए अपमानजनक था। उसके अनुसार यह सिर्फ एक परीक्षा का मामला नहीं था, बल्कि उसके मान-सम्मान और आत्मसम्मान से जुड़ा प्रश्न था।

पूरे मामले पर बढ़ी संवेदनशीलता

इस घटना के बाद ड्रेस कोड, धार्मिक पहचान और परीक्षा की निष्पक्षता जैसे मुद्दों पर बहस तेज हो गई है। RSSB अध्यक्ष के बयान के बाद जहां एक ओर नियमों की स्पष्टता सामने आई है, वहीं दूसरी ओर परीक्षा केंद्रों पर नियमों के व्यवहारिक और संवेदनशील पालन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस पूरे प्रकरण में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं और भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए क्या सुधार किए जाते हैं।

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