राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) यानी राजस्थान लोक सेवा आयोग ने भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बदलाव किया है। आयोग ने पहली बार किसी भर्ती परीक्षा में लिखित परिणाम जारी करने और इंटरव्यू से पहले अभ्यर्थियों के दस्तावेजों का सत्यापन करने का निर्णय लिया है। यह नई व्यवस्था डिप्टी कमांडेंट भर्ती-2025 में लागू की जा रही है, जिसे भर्ती प्रणाली में सुधार की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इस फैसले के तहत लिखित परीक्षा में शामिल सभी 255 अभ्यर्थियों को 15 से 20 अप्रैल के बीच आयोग के कार्यालय में उपस्थित होकर अपने दस्तावेजों का सत्यापन कराना होगा। इसके बाद ही आयोग लिखित परीक्षा का परिणाम जारी करेगा और योग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाएगा। इस प्रक्रिया के जरिए भर्ती को अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
आयोग द्वारा यह निर्णय लेने के पीछे एक बड़ा कारण इस भर्ती में सामने आई अनियमितताएं हैं। जानकारी के अनुसार, बड़ी संख्या में ऐसे अभ्यर्थियों ने आवेदन कर दिया था, जो निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते थे। यहां तक कि कई उम्मीदवार बिना योग्यता के परीक्षा में भी शामिल हो गए। ऐसे में आयोग ने यह सुनिश्चित करने का निर्णय लिया कि अयोग्य अभ्यर्थियों को पहले ही छांट दिया जाए, ताकि आगे की प्रक्रिया में कोई बाधा न आए।
डिप्टी कमांडेंट के कुल चार पदों के लिए जारी इस भर्ती में प्रारंभिक स्तर पर 10 हजार से अधिक आवेदन प्राप्त हुए थे। हालांकि, पात्रता की सख्ती और आयोग की चेतावनी के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन वापस ले लिए। अंततः करीब 4,221 अभ्यर्थी ही इस प्रक्रिया में बचे। इसके बावजूद, 11 जनवरी 2026 को आयोजित लिखित परीक्षा में केवल 255 अभ्यर्थी ही शामिल हुए, जो इस भर्ती प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है।
इस भर्ती के लिए पात्रता मानदंड बेहद स्पष्ट थे। केवल भारतीय सेना के कैप्टन स्तर के रिटायर्ड अधिकारी, सेवात्याग करने वाले पूर्व अधिकारी अथवा इमरजेंसी और शॉर्ट सर्विस कमीशन से मुक्त उम्मीदवार ही आवेदन के पात्र थे। इसके बावजूद बड़ी संख्या में अन्य श्रेणियों के अभ्यर्थियों ने भी आवेदन कर दिया, जो बाद में जांच में अयोग्य पाए गए।
आयोग ने ऐसे अभ्यर्थियों को आवेदन वापस लेने का अवसर भी दिया था। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई थी कि यदि अयोग्य अभ्यर्थी अपना आवेदन वापस नहीं लेते हैं, तो उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 की धारा 217 के तहत कार्रवाई की जा सकती है। इस सख्ती के बाद लगभग 6 हजार अभ्यर्थियों ने अपने आवेदन वापस ले लिए।
अब आयोग ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सभी पात्र अभ्यर्थियों को आयोग की आधिकारिक वेबसाइट से काउंसलिंग पत्र और विस्तृत आवेदन पत्र डाउनलोड करना होगा। इसके साथ ही उन्हें आवेदन पत्र की दो प्रतियां भरकर लानी होंगी, जिसमें सभी आवश्यक जानकारियां सही तरीके से दर्ज की गई हों। इसके अलावा 50 रुपए के ऑनलाइन शुल्क भुगतान की रसीद, शैक्षणिक प्रमाण पत्र, सेना से संबंधित सेवा प्रमाण पत्र, एनओसी, पीपीओ, जाति प्रमाण पत्र, मूल निवास प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की स्वप्रमाणित प्रतियां और मूल दस्तावेज साथ लाना अनिवार्य होगा।
यह भर्ती मार्च 2025 में शुरू हुई थी, जब आयोग ने 18 मार्च को विज्ञापन जारी कर 24 मार्च से 22 अप्रैल तक ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए थे। इस दौरान बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए, लेकिन पात्रता की शर्तों और सख्त जांच के कारण अंततः सीमित संख्या में ही अभ्यर्थी प्रक्रिया में बने रहे।
इस भर्ती से जुड़े आंकड़े भी कई दिलचस्प पहलुओं को उजागर करते हैं। उदाहरण के लिए, जिन श्रेणियों में कोई पद ही नहीं था, उनमें भी अभ्यर्थियों ने आवेदन किया। अनुसूचित जनजाति (ST) के एक पद के लिए 791 आवेदन प्राप्त हुए, जबकि अनुसूचित जाति (SC) के दो पदों के लिए लगभग एक हजार आवेदन आए। वहीं, एक्स-सर्विसमैन की संख्या बेहद कम रही, जो इस भर्ती की मूल पात्रता को दर्शाती है।
इसके अलावा, आयोग को परीक्षा आयोजन में भी अतिरिक्त संसाधन खर्च करने पड़े। जहां परीक्षा एक ही केंद्र पर आयोजित की जा सकती थी, वहीं अधिक आवेदन संख्या के कारण 17 परीक्षा केंद्र बनाए गए। इससे आयोग पर आर्थिक बोझ भी बढ़ा और परीक्षा आयोजन में लगभग 20 लाख रुपए खर्च करने पड़े, जबकि यह कार्य सामान्यतः एक लाख रुपए में पूरा हो सकता था।
इस पूरे घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और सख्ती कितनी आवश्यक है। आयोग का यह नया कदम भविष्य में अन्य भर्तियों के लिए भी एक मॉडल साबित हो सकता है, जिससे न केवल समय और संसाधनों की बचत होगी, बल्कि योग्य अभ्यर्थियों को ही आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।
कुल मिलाकर, राजस्थान लोक सेवा आयोग का यह निर्णय भर्ती प्रक्रिया को अधिक प्रभावी और निष्पक्ष बनाने की दिशा में एक अहम पहल के रूप में देखा जा रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस नई व्यवस्था से भर्ती प्रणाली में कितनी पारदर्शिता आती है और क्या इससे अयोग्य अभ्यर्थियों की संख्या में कमी लाई जा सकेगी।

