शोभना शर्मा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने हर भर्ती परीक्षा के लिए अलग-अलग फीस वसूलने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए आयोग ने एक हफ्ते पहले सरकार को प्रस्ताव भेजा है। प्रस्ताव के अनुसार, आयोग ने सरकार से अनुरोध किया है कि कुछ भर्ती परीक्षाओं में लाखों उम्मीदवार निशुल्क फॉर्म तो भर रहे हैं, लेकिन केवल 15 प्रतिशत ही परीक्षा देने के लिए पहुंचते हैं। इससे आयोग को अतिरिक्त व्यवस्थाओं पर करोड़ों रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
क्यों पड़ी इसकी जरूरत?
पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने बेरोजगार युवाओं की सुविधा के लिए वन टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) की व्यवस्था लागू की थी। इस व्यवस्था के तहत, उम्मीदवार को केवल एक बार रजिस्ट्रेशन के समय शुल्क देना पड़ता है, जिसके बाद वे बिना किसी अतिरिक्त फीस के किसी भी सरकारी एग्जाम के लिए आवेदन कर सकते हैं। सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों के लिए OTR की फीस 600 रुपये और आरक्षित वर्ग के लिए 400 रुपये तय की गई थी।
इस योजना से बेरोजगारों को साल भर में निकलने वाली भर्तियों में बार-बार फीस भरने से छुटकारा मिल गया, लेकिन इसका नकारात्मक पक्ष यह रहा कि लाखों उम्मीदवार केवल फॉर्म भर रहे हैं और परीक्षा में शामिल नहीं हो रहे हैं। इससे न केवल परीक्षा की व्यवस्था पर खर्च बढ़ता है, बल्कि आयोग की समय और संसाधनों की भी हानि होती है।
हालिया परीक्षा की स्थिति
आयोग के अनुसार, हाल ही में हुए विभिन्न एग्जाम में काफी कम उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए। उदाहरण के लिए:
- असिस्टेंट प्रोफेसर (संस्कृत शिक्षा) परीक्षा: 37,918 आवेदनों में से केवल 8,350 उम्मीदवार ही परीक्षा देने आए, जो कुल का सिर्फ 22 प्रतिशत है।
- सहायक सांख्यिकी अधिकारी: 13,290 आवेदनों में से केवल 2,004 यानी 15 प्रतिशत उम्मीदवार ही शामिल हुए।
- पुरा लेखपाल: 1,706 आवेदकों में से केवल 191 ही परीक्षा में शामिल हुए।
- आरएएस प्री 2023: 6,96,969 आवेदनों में से 4,57,957 उम्मीदवार परीक्षा देने पहुंचे।
इस तरह की स्थिति आयोग के लिए बड़ी चुनौती बन गई है, क्योंकि हर कैंडिडेट पर लगभग 400 रुपए खर्च होते हैं। पेपर छपवाने, एग्जाम सेंटर की व्यवस्था, पेपर वितरण, एग्जामिनर तैनात करने, और चेकिंग जैसी व्यवस्थाओं में आयोग को भारी धनराशि खर्च करनी पड़ती है। जब उम्मीदवार परीक्षा में नहीं आते हैं, तो इन खर्चों पर किया गया धन व्यर्थ हो जाता है।
आरपीएससी का प्रस्ताव: फीस वसूली और रिफंड की व्यवस्था
आयोग ने अपने प्रस्ताव में यह सुझाव दिया है कि हर एग्जाम के लिए आवेदन फीस को फिर से लागू किया जाए। हालांकि, आयोग का कहना है कि यदि उम्मीदवार परीक्षा देने के लिए उपस्थित होते हैं, तो उनकी फीस एक महीने के भीतर रिफंड कर दी जाएगी। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल उन उम्मीदवारों को परीक्षा के लिए आवेदन करने के लिए प्रेरित करना है, जो वास्तव में परीक्षा में शामिल होने के इच्छुक हैं।
फीस वसूली की व्यवस्था का असर
यदि सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो यह उन 56 लाख उम्मीदवारों पर असर डालेगा, जिन्होंने वन टाइम रजिस्ट्रेशन कराया है। वे उम्मीदवार जो केवल फॉर्म भरने के लिए आवेदन कर रहे थे, वे अब सावधानीपूर्वक विचार करेंगे। इससे आयोग की व्यवस्थाओं पर होने वाला खर्च भी नियंत्रित होगा और वास्तविक उम्मीदवारों की संख्या बढ़ेगी।
आयोग का दावा: निशुल्क आवेदन का दुरुपयोग
आयोग का दावा है कि निशुल्क आवेदन की छूट का कैंडिडेट्स द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है। उम्मीदवार केवल फॉर्म भरकर एग्जाम में नहीं आ रहे हैं, जिससे आयोग को अनावश्यक खर्चों का सामना करना पड़ रहा है। प्रस्ताव में यह भी कहा गया है कि फीस वसूली से उम्मीदवार केवल वही फॉर्म भरेंगे, जिन्हें वास्तव में परीक्षा में शामिल होना है।
नकल रोकने के लिए OTR में सुधार
आयोग ने नकल पर रोक लगाने के लिए OTR में लाइव फोटो कैप्चर जैसी व्यवस्था लागू की है। अब उम्मीदवार को फॉर्म भरने के दौरान लाइव फोटो कैप्चर करना अनिवार्य कर दिया गया है। यह कदम नकल और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए उठाया गया है।
सरकार के निर्णय पर निर्भर है नई व्यवस्था
RPSC द्वारा सरकार को भेजे गए प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय सरकार के स्तर पर लंबित है। अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो आयोग की यह नई व्यवस्था लागू हो जाएगी और केवल वही उम्मीदवार आवेदन करेंगे, जो सच में परीक्षा देना चाहते हैं।


