शोभना शर्मा। राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) से जुड़े बहुचर्चित मामलों में एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा द्वारा प्रवर्तन निदेशालय को दिए गए पुराने बयान के दोबारा सामने आने के बाद यह मामला फिर सुर्खियों में है। इस बयान में कथित रूप से कांग्रेस नेता और पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश खोड़निया को एक करोड़ 20 लाख रुपये देने की बात कही गई थी। हालांकि अब दिनेश खोड़निया ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे बेबुनियाद बताया है और कहा है कि जो लोग इस मामले को जानबूझकर फिर से हवा दे रहे हैं, उनके खिलाफ वह मानहानि का दावा करेंगे।
दिनेश खोड़निया ने स्पष्ट किया कि इस पूरे प्रकरण में ईडी की जांच पूरी हो चुकी है और उन्हें पहले ही क्लीन चिट मिल चुकी है। उन्होंने बताया कि ईडी द्वारा उनके घर से जब्त किए गए 24 लाख रुपये भी वापस रिलीज कर दिए गए हैं। खोड़निया का कहना है कि इसके बावजूद पुराने और निस्तारित मामले को दोबारा उछालना न सिर्फ दुर्भावनापूर्ण है, बल्कि उनकी छवि को नुकसान पहुंचाने की साजिश भी है।
SI भर्ती परीक्षा से जुड़ा रहा है मामला
दरअसल, RPSC द्वारा आयोजित विभिन्न भर्ती परीक्षाओं को लेकर पिछले कुछ वर्षों में गंभीर सवाल उठते रहे हैं। इनमें सबसे बड़ा विवाद वर्ष 2021 में आयोजित सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा को लेकर सामने आया था। आरोप लगे थे कि परीक्षा का पेपर पहले ही लीक हो गया था। इस मामले की जांच राजस्थान पुलिस की विशेष संचालन समूह ने शुरू की थी, बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने भी इसे अपने हाथ में ले लिया।
SOG की जांच में यह सामने आया कि चयन के बाद ट्रेनिंग ले रहे 50 से अधिक अभ्यर्थियों की भूमिका संदिग्ध थी, जिन्हें गिरफ्तार भी किया गया। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ी, इसमें कुछ प्रभावशाली लोगों और कथित सिफारिशों की बात भी सामने आने लगी। इसी क्रम में आरपीएससी के तत्कालीन सदस्य रहे बाबूलाल कटारा से भी पूछताछ की गई।
पूछताछ के दौरान बाबूलाल कटारा ने अपने बयान में कुछ कांग्रेस विधायकों और नेताओं द्वारा नाम की सिफारिश किए जाने की बात कही थी। इसी बयान में दिनेश खोड़निया के साथ पैसों की डील का कथित उल्लेख भी किया गया, जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी थी।
खोड़निया का आरोपों से इनकार
दिनेश खोड़निया का कहना है कि बाबूलाल कटारा का यह बयान ढाई साल पुराना है और उस पर अदालत में पहले ही स्थिति स्पष्ट हो चुकी है। उन्होंने कहा कि कटारा खुद कोर्ट में अपने बयान से इनकार कर चुके हैं और उसे दबाव में दिया गया बताया है। खोड़निया ने दो टूक कहा कि उनका बाबूलाल कटारा से किसी भी तरह का कोई आर्थिक या व्यक्तिगत संबंध नहीं रहा है।
उन्होंने बताया कि ईडी ने उनके घर पर तलाशी ली थी, उनके मोबाइल फोन जब्त किए गए थे और 24 लाख रुपये नगद सीज किए गए थे। जांच एजेंसी ने उनसे कई-कई घंटे पूछताछ की, जिसमें उन्होंने पूरा सहयोग किया। इसके बाद ईडी ने दिल्ली की अदालत में करीब 45 पेज की रिपोर्ट पेश की, जिसमें साफ तौर पर कहा गया कि बाबूलाल कटारा और दिनेश खोड़निया के बीच किसी तरह का कोई लिंक नहीं पाया गया।
ED की रिपोर्ट और केस का निस्तारण
दिनेश खोड़निया के अनुसार, 28 फरवरी 2025 को इस केस को अंतिम रूप से बंद कर दिया गया था। ईडी ने अदालत में यह स्पष्ट किया कि जांच में उनके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। इसके बाद जब्त की गई नकदी भी उन्हें लौटा दी गई। खोड़निया का कहना है कि इसके बावजूद अगर कोई व्यक्ति या समूह इस मामले को दोबारा उठाकर उनकी छवि धूमिल करने की कोशिश कर रहा है, तो वह इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।
अपनी ही पार्टी के लोगों पर शक
खोड़निया ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर आशंका जताई है कि इस मामले को फिर से हवा देने के पीछे उनकी ही पार्टी के कुछ लोग भी हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता या व्यक्तिगत रंजिश के चलते कुछ लोग पुराने मामलों को उछालकर गलत संदेश फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि ट्रिब्यूनल स्तर पर भी उन्हें बरी किया जा चुका है।
मानहानि का दावा करने की तैयारी
कांग्रेस नेता ने साफ किया कि अब वह कानूनी रास्ता अपनाने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने जानबूझकर पुराने, निस्तारित और कोर्ट में खारिज हो चुके आरोपों को दोबारा उछाला है, उनके खिलाफ मानहानि का दावा किया जाएगा। खोड़निया के मुताबिक, लोकतंत्र में आलोचना का अधिकार सबको है, लेकिन झूठे और निराधार आरोप लगाकर किसी की छवि खराब करना स्वीकार्य नहीं है।


