राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से आयोजित स्कूल लेक्चरर (प्रथम श्रेणी शिक्षक) भर्ती परीक्षा का रविवार से विधिवत आगाज हो गया। प्रदेशभर में बनाए गए परीक्षा केंद्रों पर सुबह से ही अभ्यर्थियों की भारी भीड़ देखने को मिली। लंबे समय से इस भर्ती परीक्षा का इंतजार कर रहे हजारों अभ्यर्थी निर्धारित समय से पहले ही परीक्षा केंद्रों पर पहुंच गए थे। आयोग की ओर से परीक्षा की निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। परीक्षा केंद्रों पर प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की गहन जांच की गई और निर्धारित दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन कराया गया।
यह भर्ती प्रक्रिया राज्य के स्कूल शिक्षा विभाग में प्रथम श्रेणी शिक्षक यानी स्कूल लेक्चरर के 3225 रिक्त पदों को भरने के लिए आयोजित की जा रही है। परीक्षा का आयोजन 31 मई से 11 जून तक विभिन्न विषयों के लिए दो पारियों में किया जाएगा। भर्ती प्रक्रिया को लेकर अभ्यर्थियों में उत्साह के साथ-साथ प्रतिस्पर्धा का माहौल भी देखने को मिल रहा है, क्योंकि यह राज्य की सबसे महत्वपूर्ण शिक्षक भर्ती परीक्षाओं में से एक मानी जाती है।
परीक्षा के पहले दिन जनरल अवेयरनेस एंड जनरल स्टडीज का प्रश्नपत्र आयोजित किया गया। परीक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह पेपर संतुलित और पाठ्यक्रम आधारित रहा, हालांकि कुछ प्रश्नों ने अभ्यर्थियों की गहन तैयारी की भी परीक्षा ली। डेढ़ घंटे की अवधि वाले इस प्रश्नपत्र में कुल 75 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए, जिनके लिए 150 अंक निर्धारित थे। प्रत्येक प्रश्न दो अंकों का था। प्रश्नपत्र का दायरा व्यापक रखा गया था, जिसमें राजस्थान और भारत के इतिहास, भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन, सामान्य विज्ञान, गणित, सांख्यिकी, मानसिक योग्यता, हिंदी, अंग्रेजी, समसामयिक घटनाएं, भारतीय राजनीतिक व्यवस्था, राजस्थान का भूगोल, शैक्षणिक प्रबंधन, शिक्षा परिदृश्य और नई शिक्षा नीति से जुड़े विषयों को शामिल किया गया था।
परीक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि प्रश्नपत्र में राजस्थान के इतिहास और भूगोल को विशेष महत्व दिया गया। साथ ही शिक्षा क्षेत्र से जुड़े समकालीन विषयों और नई शिक्षा नीति पर भी पर्याप्त प्रश्न पूछे गए। इससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि आयोग केवल सामान्य ज्ञान ही नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था और शिक्षण से जुड़े मुद्दों पर भी अभ्यर्थियों की समझ को परखना चाहता है।
पहले दिन के प्रश्नपत्र में मेवाड़ और वागड़ क्षेत्र से संबंधित कई महत्वपूर्ण प्रश्न शामिल किए गए, जिन्होंने क्षेत्रीय इतिहास और भूगोल की जानकारी रखने वाले अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया। संयुक्त राजस्थान के गठन से संबंधित एक प्रश्न में सही तथ्यों की पहचान करने को कहा गया था। इस प्रश्न के माध्यम से राजस्थान के एकीकरण की ऐतिहासिक प्रक्रिया और उससे जुड़े प्रमुख व्यक्तित्वों के बारे में अभ्यर्थियों की जानकारी का आकलन किया गया।
इसी प्रकार प्रसिद्ध ग्रंथ ‘राजवल्लभ’ के लेखक से संबंधित प्रश्न भी पूछा गया। राजस्थान की स्थापत्य और सांस्कृतिक परंपरा से जुड़े इस प्रकार के प्रश्न यह दर्शाते हैं कि आयोग राज्य की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर को परीक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा मानता है। इसके अलावा गणगौर पर्व से जुड़े घुड़ला उत्सव पर आधारित प्रश्न ने लोक संस्कृति और परंपराओं के महत्व को भी रेखांकित किया।
राजस्थान पर्यटन से संबंधित एक प्रश्न में वर्ष 2025 के दौरान अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की सर्वाधिक संख्या वाले जिला युग्म की जानकारी पूछी गई। यह प्रश्न राज्य की पर्यटन गतिविधियों और हालिया आंकड़ों पर आधारित था, जिससे समसामयिक विषयों की तैयारी का महत्व भी सामने आया। इसी तरह पर्वत चोटियों के पूर्व से पश्चिम क्रम से संबंधित प्रश्न ने अभ्यर्थियों के भौगोलिक ज्ञान की परीक्षा ली।
भूगोल खंड में माही नदी और उसकी सहायक नदियों से जुड़ा प्रश्न भी शामिल था। इसके अतिरिक्त राजस्थान के उन जिलों के बारे में पूछा गया जहां जुलाई माह में वायु दाब 1000 मिलीबार से अधिक रहता है। ऐसे प्रश्नों ने प्राकृतिक भूगोल और पर्यावरण संबंधी विषयों की उपयोगिता को रेखांकित किया।
इतिहास खंड में मुगलकाल और मेवाड़ से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे गए। अकबर द्वारा मेवाड़ विजय के लिए भेजे गए अभियान के नेतृत्व से संबंधित प्रश्न अभ्यर्थियों की मध्यकालीन इतिहास की समझ को परखने के लिए शामिल किया गया था। वहीं 1857 की क्रांति के दौरान राजस्थान की रियासतों की भूमिका से जुड़े प्रश्न ने आधुनिक भारतीय इतिहास और स्वतंत्रता संग्राम में क्षेत्रीय योगदान को परीक्षा का हिस्सा बनाया।
विशेषज्ञों के अनुसार प्रश्नपत्र का स्तर सामान्य से मध्यम रहा, लेकिन कुछ प्रश्न ऐसे थे जिनके लिए गहन अध्ययन और तथ्यात्मक जानकारी आवश्यक थी। विशेष रूप से राजस्थान के इतिहास, संस्कृति, भूगोल और शिक्षा व्यवस्था पर केंद्रित प्रश्नों ने यह स्पष्ट कर दिया कि आयोग पाठ्यक्रम की गहराई से तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को प्राथमिकता देना चाहता है।
परीक्षा के बाद अभ्यर्थियों के बीच प्रश्नपत्र को लेकर चर्चा का दौर भी चलता रहा। अधिकांश अभ्यर्थियों ने पेपर को संतुलित बताया और कहा कि नियमित अध्ययन तथा राजस्थान विशेष विषयों की अच्छी तैयारी रखने वाले उम्मीदवारों के लिए प्रश्नपत्र अपेक्षाकृत आसान रहा। हालांकि कुछ अभ्यर्थियों ने माना कि समसामयिक घटनाओं और तथ्यात्मक प्रश्नों ने चुनौती पेश की।
आरपीएससी की यह भर्ती परीक्षा आने वाले दिनों में विभिन्न विषयों के लिए जारी रहेगी। आयोग की ओर से परीक्षा को शांतिपूर्ण और पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई हैं। ऐसे में लाखों अभ्यर्थियों की निगाहें अब आगामी विषयवार परीक्षाओं और अंततः भर्ती परिणाम पर टिकी हुई हैं, जो राज्य के शिक्षा विभाग में नई नियुक्तियों का मार्ग प्रशस्त करेगा।


