मनीषा शर्मा। राजस्थान में हुए बहुचर्चित ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती-2022 पेपर लीक मामले में राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा की जमानत याचिका को खारिज कर दिया, जबकि मामले में उनके भांजे विजय डामोर को राहत दी गई। जस्टिस प्रवीर भटनागर की एकलपीठ ने यह आदेश सुनाते हुए स्पष्ट किया कि कटारा के खिलाफ गंभीर आरोप और पर्याप्त सबूत मौजूद हैं, जो उन्हें जमानत देने में बाधा हैं।
भांजे को सुप्रीम कोर्ट के आधार पर राहत
मामले में विजय डामोर को हाईकोर्ट से जमानत मिल गई, जिसका आधार सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले दी गई राहत रही। विजय पर आरोप है कि उसने पेपर लीक प्रक्रिया में अपने मामा बाबूलाल कटारा की मदद की थी। हालांकि, हाईकोर्ट ने माना कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को ध्यान में रखते हुए डामोर को जमानत दी जा सकती है।
सरकार का विरोध और कटारा पर आरोप
बाबूलाल कटारा की ओर से दलील दी गई कि वह लंबे समय से जेल में हैं और मामले की सुनवाई में अभी लंबा समय लगेगा, इसलिए उन्हें जमानत दी जाए। लेकिन सरकार की ओर से इस याचिका का कड़ा विरोध किया गया। सरकारी पक्ष ने कहा कि कटारा ने संवैधानिक पद पर रहते हुए पेपर लीक की साजिश रची और अपने पद का दुरुपयोग किया। उन्होंने पेपर को अपने सरकारी आवास पर मंगाकर सह-आरोपियों को सौंप दिया।
एसओजी की जांच में बाबूलाल कटारा के घर से 51 लाख 20 हजार रुपए नकद और 541 ग्राम सोने के 9 आभूषण बरामद हुए थे। एसओजी ने कटारा को 18 अप्रैल 2023 को गिरफ्तार किया था।
चलती बस में पेपर हल करवा रहे थे आरोपी
यह मामला दिसंबर 2022 में तब सामने आया, जब उदयपुर जिले के बेकरिया थाना पुलिस ने एक बस को पकड़ा। उस बस में पेपर लीक के मुख्य आरोपियों द्वारा द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती परीक्षा के 49 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले ही पेपर हल करवाया जा रहा था। इस खुलासे ने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी और बाद में जांच एसओजी को सौंप दी गई।
कैसे हुआ RPSC पेपर लीक
एसओजी के अनुसार, कटारा को इस परीक्षा के प्रश्नपत्र और उत्तर कुंजी तैयार करने का जिम्मा सौंपा गया था। परीक्षा 24 दिसंबर 2022 को होनी थी, लेकिन चार्जशीट में खुलासा हुआ कि पेपर अक्टूबर 2022 में ही लीक हो चुका था, यानी परीक्षा से पूरे 60 दिन पहले।
जांच में पाया गया कि कटारा पेपर तैयार होते ही सभी सेट की मूल कॉपी अपने सरकारी आवास पर ले गया था। उसने अपने भांजे विजय डामोर से सभी प्रश्न एक रजिस्टर में लिखवाए और फिर पेपर प्रिंटिंग के लिए वापस RPSC ऑफिस में जमा कर दिया। इसके बाद विजय ने वह रजिस्टर मास्टरमाइंड शेर सिंह मीणा को दे दिया। शेर सिंह ने रजिस्टर की फोटो अपने मोबाइल से खींची और उसी से पेपर टाइप कर गिरोह को बेच दिया। सबूत मिटाने के लिए बाद में रजिस्टर जला दिया गया।
बरामदगी और सबूत
कटारा के घर से हुई बरामदगी ने इस मामले को और गंभीर बना दिया। न केवल भारी मात्रा में नकदी और सोना मिला, बल्कि यह भी साबित हुआ कि उन्होंने संवैधानिक पद का दुरुपयोग कर आर्थिक लाभ उठाया। एसओजी ने इसे सुनियोजित अपराध बताते हुए चार्जशीट में कटारा की भूमिका को केंद्रीय माना।
न्यायालय का रुख
हाईकोर्ट ने माना कि मामले में लगे आरोप बेहद गंभीर हैं और इसमें एक संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा विश्वासघात शामिल है। अदालत ने कहा कि इस स्तर के पद पर आसीन व्यक्ति का कर्तव्य था कि वह भर्ती प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखे, लेकिन यहां मामला उल्टा निकला।
कटारा की जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब उनके जेल में ही रहने की संभावना है, जबकि भांजे विजय डामोर को मिली जमानत के बाद वह कानूनी लड़ाई बाहर से लड़ पाएंगे। एसओजी की ओर से इस मामले में जांच और गवाहों के बयान जारी हैं।


