शोभना शर्मा। भारत की पहली ट्रांसजेंडर खिलाड़ी रितिका सिंह ने आगरा में आयोजित समर आइस स्टॉक चैंपियनशिप 2025 में गोल्ड मेडल जीतकर एक बार फिर इतिहास रच दिया है। रितिका की इस जीत ने न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश को गौरवान्वित किया है। उनके प्रदर्शन ने यह साबित किया है कि अगर प्रतिभा और अवसर मिल जाए तो ट्रांसजेंडर खिलाड़ी भी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक देश का परचम लहराने की क्षमता रखते हैं।
रितिका मूल रूप से राजस्थान के टोंक जिले के मालपुरा की रहने वाली हैं और वर्तमान में जयपुर में रहकर ट्रेनिंग लेती हैं। गोल्ड मेडल जीतने के बाद रितिका ने कहा कि समाज ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को अलग नजरिए से देखता है, लेकिन वे खेल के माध्यम से अपनी पहचान को मजबूत बनाकर आगे बढ़ने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। उनका मानना है कि खेल ही वह माध्यम है जिसके जरिए ट्रांसजेंडर समुदाय समाज में सम्मानपूर्वक अपना स्थान स्थापित कर सकता है।
खेलों में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के लिए स्पोर्ट्स कोटा की मांग
गोल्ड जीतने के बाद रितिका सिंह ने केंद्र और राजस्थान सरकार से अपील की कि खेलों में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों के लिए भी स्पोर्ट्स कोटा होना चाहिए। उनका कहना है कि कई ट्रांसजेंडर युवा खेलों में आगे बढ़ना चाहते हैं, लेकिन उन्हें समान अवसर नहीं मिल पाता। यदि खेलों में विशेष कोटा निर्धारित किया जाए तो ऐसे खिलाड़ियों को मंच मिल सकेगा और देश के लिए अधिक प्रतिभाएं उभरकर सामने आएंगी।
2024 में मिली थी देश की पहली ट्रांसजेंडर खिलाड़ी की पहचान
रितिका को देश की पहली ट्रांसजेंडर खिलाड़ी का दर्जा वर्ष 2024 में मिला था। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के गुलमर्ग में आयोजित नेशनल आइस स्टॉक स्पोर्ट्स चैंपियनशिप में एक गोल्ड, एक सिल्वर और दो ब्रॉन्ज मेडल जीतकर खुद को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित किया था। वह उपलब्धि रितिका के लिए टर्निंग पॉइंट साबित हुई और इसके बाद उन्हें कैबिनेट मंत्री कन्हैयालाल चौधरी और तत्कालीन टोंक कलेक्टर सौम्या झा द्वारा सम्मानित भी किया गया था।
रितिका ने पहली बार नवंबर 2023 में समर आइस स्टॉक चैंपियनशिप में भाग लिया था, जिसमें उन्होंने सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए थे। लगातार शानदार प्रदर्शन के बाद उन्होंने अब 2025 में गोल्ड मेडल जीता है, जो उनके कड़ी मेहनत और जज्बे का परिणाम है।
कठिन परिस्थितियों से निकलकर बनाई पहचान
रितिका सिंह की सफलता आसान नहीं रही। उन्होंने बताया कि 12वीं के बाद उनके मन में पहचान को लेकर गहरी उलझन पैदा हुई और हार्मोनल परिवर्तन के चलते जेंडर पहचान स्पष्ट होने लगी। इसके बाद परिवार की सहमति से 2021 में जेंडर परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू की, जो साल 2023 में पूरी हुई। हालांकि यह फैसला आसान नहीं था। गांव में लोगों द्वारा लगाए गए तानों और भेदभाव के कारण उन्हें अपना घर और गांव छोड़ना पड़ा।
रितिका उस समय मालपुरा में 12वीं कक्षा की पढ़ाई कर रही थीं। तानों से परेशान होकर उन्होंने गांव छोड़ दिया और जयपुर आकर नई जिंदगी की शुरुआत की। यहीं से आइस स्टॉक गेम के प्रति उनका रुझान बढ़ा और फिर उन्होंने इसे प्रोफेशनल स्तर पर अपनाया। यह खेल सर्दियों में बर्फ की सतह पर खेला जाता है और भारत में धीरे-धीरे लोकप्रिय हो रहा है।
कौन हैं रितिका सिंह?
रितिका सिंह टोंक जिले के मालपुरा की निवासी हैं। उनके पिता दुकानदार हैं और माता गृहिणी हैं। रितिका तीन भाई-बहनों में दूसरे नंबर की हैं। एक बड़ा भाई और एक छोटी बहन है। बचपन से खेलों में रुचि रखने वाली रितिका ने अपनी पहचान बदलने के बाद भी खुद को खेलों से जोड़े रखा और आज कई राष्ट्रीय पदक अपने नाम कर चुकी हैं।


