मनीषा शर्मा। राजस्थान में चल रही गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) को लेकर कुछ प्राइवेट हॉस्पिटल संचालकों के विरोध के बीच अब सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। जयपुर समेत प्रदेश के कई शहरों में ऐसे अस्पताल जो इस योजना के तहत सेवाएं देने से इंकार कर रहे हैं, उन्हें पैनल सूची से बाहर करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। सरकार का कहना है कि योजना का विरोध करने वालों की जगह नए अस्पतालों को RGHS की पैनल सूची में शामिल किया जाएगा ताकि मरीजों को इलाज में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े। मेडिकल हेल्थ डिपार्टमेंट की प्रिंसिपल सेक्रेटरी गायत्री राठौड़ ने कहा कि RGHS योजना के तहत सेवा देने से इनकार करने वाले हॉस्पिटल संचालकों की सूची तैयार की जा रही है। इन पर नियमों के तहत कार्रवाई कर इन्हें सूची से बाहर किया जाएगा।
50 फीसदी से ज्यादा हॉस्पिटल RGHS में दे रहे सेवाएं
राजस्थान सरकार की इस योजना के तहत फिलहाल 50 फीसदी से ज्यादा हॉस्पिटल संचालक इलाज की सेवाएं दे रहे हैं। हालांकि, कुछ बड़े निजी अस्पतालों ने विरोध करते हुए इस योजना के तहत काम करने से इंकार कर दिया है। सरकार ने साफ किया है कि लाभार्थियों को परेशानी न हो, इसके लिए सभी प्रमुख स्थानों पर नए हॉस्पिटल को पैनल में जोड़ा जाएगा। विभाग के अनुसार अब तक प्रदेशभर के 350 से ज्यादा हॉस्पिटल RGHS से जुड़ने के लिए आवेदन कर चुके हैं। इसका सीधा मतलब है कि योजना को लेकर विरोध की स्थिति बनने के बावजूद, कई अस्पताल इसमें शामिल होने के इच्छुक हैं।
जयपुर के 5 से 7 हॉस्पिटल पर गड़बड़ी के आरोप
इस विवाद की जड़ जयपुर के 5 से 7 बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल हैं। आरोप है कि इन अस्पतालों ने RGHS योजना के तहत बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां कीं। मरीजों के इलाज से जुड़े बिलों में अनियमितताओं की शिकायत मिलने पर विभाग ने इन पर लाखों रुपये की पेनल्टी लगाई थी। इसी पेनल्टी से बचने और दबाव बनाने के लिए इन अस्पतालों ने नया एसोसिएशन बनाकर RGHS सेवाएं बंद करने का ऐलान कर दिया। इतना ही नहीं, इन्होंने प्रदेश के अन्य प्राइवेट अस्पताल और फार्मा स्टोर संचालकों को भी अपने विरोध में शामिल करने की कोशिश की।
850 करोड़ से ज्यादा का भुगतान किया गया
अस्पताल संचालकों ने बकाया भुगतान का मुद्दा उठाते हुए RGHS का विरोध किया था। हेल्थ डिपार्टमेंट की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष अप्रैल से लेकर अब तक सरकार ने हॉस्पिटल संचालकों को लगभग 850 करोड़ रुपये का भुगतान किया है। मार्च 2025 से पहले का लगभग सारा बकाया भुगतान किया जा चुका है। केवल उन्हीं अस्पतालों के बिल लंबित हैं, जिन पर अनियमितताओं और गड़बड़ियों के आरोप हैं। अधिकारियों के अनुसार, ऐसे मामलों में जांच चल रही है या दोषी पाए गए हॉस्पिटल के भुगतान रोके गए हैं।
सरकार का सख्त रुख
सरकार ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वह योजना का विरोध करने वाले अस्पतालों के दबाव में आने वाली नहीं है। यदि कोई अस्पताल RGHS में सेवाएं देने से मना करता है तो उसे सूची से बाहर कर दिया जाएगा। इसके साथ ही, सरकार नए अस्पतालों को सूची में जोड़ रही है ताकि मरीजों को कोई परेशानी न हो। इस कदम से साफ है कि सरकार अब नियमों को लेकर किसी भी तरह की ढील देने के मूड में नहीं है।
RGHS योजना क्यों है जरूरी?
राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) प्रदेश के लाखों सरकारी कर्मचारियों, पेंशनर्स और उनके परिवारों के लिए चलाई जा रही है। इसके तहत लाभार्थियों को कैशलेस उपचार की सुविधा मिलती है। इस योजना का उद्देश्य गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों को निजी और सरकारी अस्पतालों में गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध कराना है। लेकिन कुछ निजी अस्पतालों द्वारा इसका विरोध करने से मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी। ऐसे में सरकार का यह कदम लाभार्थियों के लिए राहत देने वाला है।
राजस्थान सरकार ने यह स्पष्ट कर दिया है कि RGHS योजना का विरोध करने वाले हॉस्पिटल अब पैनल से बाहर होंगे। जयपुर और अन्य शहरों के ऐसे अस्पताल जो योजना का पालन नहीं कर रहे, उन पर कार्रवाई की जाएगी और उनकी जगह नए अस्पतालों को सूचीबद्ध किया जाएगा। मार्च 2025 तक के अधिकांश भुगतान निपटा दिए गए हैं और केवल उन्हीं अस्पतालों के भुगतान रोके गए हैं, जिनके खिलाफ गड़बड़ी की शिकायतें हैं। सरकार का यह सख्त रुख न केवल अस्पतालों पर अनुशासन कायम करेगा बल्कि लाखों लाभार्थियों को समय पर और सही इलाज दिलाने में भी मदद करेगा।


