राजस्थान गर्वमेंट हेल्थ स्कीम के तहत कथित RGHS फर्जी बिलिंग और अनावश्यक जांचों के जरिए करोड़ों रुपये के क्लेम उठाने के मामले में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने शुक्रवार को प्राथमिकी दर्ज की है। यह कार्रवाई स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी की शिकायत के आधार पर की गई। एजेंसी की ओर से दीपी गोयल ने विस्तृत रिपोर्ट के साथ शिकायत सौंपी थी, जिसके बाद जांच एजेंसी ने मामला दर्ज कर लिया। एफआईआर में आरोप है कि RGHS कार्डधारकों के नाम पर फर्जी ओपीडी पर्चियां बनाकर और महंगी एमआरआई जांचें दिखाकर सरकारी खजाने से रकम क्लेम की गई। जांच के अनुसार यह कृत्य सुनियोजित तरीके से किया गया और इसमें सरकारी चिकित्सकों तथा एक निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के बीच मिलीभगत की आशंका जताई गई है।
RGHS घोटाला: किन-किन के खिलाफ मामला दर्ज
जांच एजेंसी ने सीकर स्थित डॉ. विजय एंड बी लाल डायग्नोस्टिक सेंटर तथा राजकीय श्रीकल्याण चिकित्सालय, सीकर के कई चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें एसोसिएट प्रोफेसर और वरिष्ठ विशेषज्ञ स्तर के डॉक्टर शामिल हैं। आरोप है कि इन्होंने आरजीएचएस योजना के तहत लाभार्थियों के नाम पर बिना वास्तविक परामर्श के पर्चियां बनाईं और महंगी जांचें लिखीं। इससे पहले मेडिकल एवं स्वास्थ्य विभाग ने परियोजना निदेशक डॉ. निधि पटेल की अनुशंसा पर संबंधित डॉक्टरों को निलंबित कर दिया था। अब एसओजी की एफआईआर के बाद जांच आपराधिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ेगी।
350 पेज की जांच रिपोर्ट में खुलासे
स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी ने करीब 350 पन्नों की जांच रिपोर्ट एसओजी को सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कई मामलों में आरजीएचएस कार्डधारक सीकर में किसी डॉक्टर या डायग्नोस्टिक सेंटर पर परामर्श के लिए गए ही नहीं थे, फिर भी उनके नाम पर ओपीडी पर्चियां तैयार की गईं। जांच में यह भी सामने आया कि एक ही लाभार्थी के नाम पर पांच से अधिक एमआरआई जांचें दिखाई गईं। अनेक मामलों में मरीज को देखे बिना ही महंगी जांचें लिखी गईं और सीधे निजी डायग्नोस्टिक सेंटर के लिए रेफर कर दिया गया। शिकायतों और दर्ज जांचों के बीच स्पष्ट विसंगति पाई गई, जिससे फर्जीवाड़े की आशंका मजबूत हुई।
सस्ती पैकेज जांच की जगह महंगी अलग-अलग एमआरआई
रिपोर्ट के अनुसार स्पाइन स्क्रीनिंग पैकेज कम लागत पर उपलब्ध होने के बावजूद अलग-अलग स्पाइन एमआरआई लिखी गईं, जिनकी कुल लागत कई गुना अधिक थी। इसी तरह दोनों घुटनों और दोनों कंधों की संयुक्त जांच के सस्ते पैकेज उपलब्ध थे, लेकिन अलग-अलग जांचें बुक कर अधिक रकम का क्लेम उठाया गया। कई मामलों में लाभार्थियों को कराई गई अतिरिक्त जांचों की जानकारी तक नहीं दी गई और उन्हें न तो बिल दिया गया और न ही रिपोर्ट सौंपी गई। इसके बावजूद संबंधित जांचों की राशि राज्य सरकार से क्लेम कर ली गई।
सरकारी खजाने पर संभावित असर
एफआईआर में आरोप है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से करोड़ों रुपये का क्लेम उठाया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचा। आरजीएचएस योजना का उद्देश्य राज्य के कर्मचारियों और पेंशनरों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है, लेकिन कथित अनियमितताओं ने योजना की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप साबित होते हैं तो यह न केवल वित्तीय अनियमितता का मामला होगा, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ेगा।
आगे की जांच और संभावित कार्रवाई
एसओजी अब दस्तावेजों, बिलिंग रिकॉर्ड, रेफरल स्लिप और लाभार्थियों के बयान के आधार पर जांच आगे बढ़ाएगी। संबंधित डॉक्टरों और डायग्नोस्टिक सेंटर संचालकों से पूछताछ की जाएगी। आवश्यक होने पर वित्तीय लेनदेन की फॉरेंसिक जांच भी कराई जा सकती है। सरकार की ओर से पहले ही प्रशासनिक स्तर पर निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है। अब आपराधिक जांच के परिणामों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।


